आर्टिस्ट ने महारानी एलिजाबेथ की इतनी छोटी बनाई मूर्ति कि आप बिना माइक्रोस्कोप नहीं देख सकेंगे

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ब्रिटेन में महारानी को शासन संभालते हुए 70 साल पूरे हो गए। इस अवसर पर पूरे ब्रिटेन में चार दिन का प्लेटिनम जुबली समारोह मनाया गया। लोगों ने अपने-अपने तरीके से महारानी के प्रति सम्मान जाहिर किया। इस बीच एक माइक्रो आर्टिस्ट ने महारानी की एक मिलीमीटर की मूर्ति बनाई, जिसे सुई के सुराख से आसानी से निकाला जा सकता है।

माइक्रो आर्टिस्ट डेविड लिंडन ने महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की 0.6 मिमी चौड़ी और 1 मिमी लंबी मूर्ति बनाई है। ताज पहने महारानी की यह नन्ही सी मूर्ति प्लेटिनम की छड़ के सिरे पर बनाई गई है। ब्रिटेन की महारानी की यह मूर्ति इतनी छोटी है कि इसे सुई के सुराख से निकाला जा सकता है।

मूर्ति तराशने में लगा तीन माह का वक्त
डेविड बताते हैं कि ताज पहने महारानी की इस मूर्ति को तराशने में तीन महीने से ज्यादा का वक्त लगा। मूर्ति को तराशते वक्त बेहद सावधानी बरतनी होती थी। इस बात पर खास ध्यान दिया गया कि कहीं छींक या खांसी न आ जाए। अगर काम करते हुए गलती से भी छींक या खांसी आ जाती तो पूरी मेहनत बर्बाद हो सकती थी। घर के बाहर से गुजरने वाले वाहनों की वजह से होने वाले कंपन और शोर से बचने के लिए वे रात में काम करते थे।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, डेविड लिंडन पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के लिए एयरक्राफ्ट सिस्टम और यूरोफाइटर पर काम किया, लेकिन 5 साल पहले इंजीनियरिंग छोड़ दुनिया में सबसे बेहतरीन मानी जाने वाली माइक्रो आर्ट को जीवन बना लिया। इसके बाद उन्होंने रिकॉर्ड सुई के सुराख में फिट आ जाएं, ऐसी कई मूर्तियां बनाईं, लेकिन डेविड अपनी इस मूर्ति को सबसे छोटी और सबसे बेहतर मानते हैं।

समाधि में जाने जैसा था मूर्ति बनाना
वह कहते हैं कि यह काम बेहद बारीक है और चुनौतियां पहाड़ सी हैं। शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला काम है। इसमें सबसे अधिक धैर्य की जरूरत होती है। इस मूर्ति को बनाना बिल्कुल समाधि में जाने जैसा है। हाथों को साधना, सांसों की गति धीमी करना और धड़कन को काबू में रखना होता है। बस पूरा का पूरा फोकस माइक्रोस्कोप को देखने पर रहता है।

सुई की आंख में बना दी युवा महारानी
एक अन्य माइक्रो आर्टिस्ट डॉ. विलार्ड विगन ने महारानी के युवावस्था के दौरान की एक मूर्ति बनाई है। इस मूर्ति में महारानी व्हाइट गाउन पहने ताज पहनने के लिए तैयार नजर आ रहीं हैं। यह मूर्ति सुई के सुराख में बनाई गई है, जिसे माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है। डॉ. विलार्ड कहते हैं कि इसे 200 पार्ट में पूरा किया गया है। महारानी के प्रति मेरा यह अब तक का सबसे बड़ा सम्मान है। साल 2007 में 65 वर्षीय डॉ. विलार्ड को कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा देने के लिए एमबीई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। इससे पहले उन्होंने महारानी की डायमंड जुबली के लिए 24 कैरेट सोने का छोटा सा ताज बनाया था।

2 जून, 1953 में बनी थीं महारानी

एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म 21 अप्रैल 1926 को लंदन में हुआ था। पिता जार्ज VI की मृत्यु के बाद 2 जून 1953 में वो महारानी बनीं।

 

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