राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत महाविद्यालयों में शोध कार्यों को दिया जा रहा प्रोत्साहन

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सभी परास्नातक एवं स्नातक विभागों के शिक्षकों को मिलेगी शोध निर्देशन की सुविधा

फर्स्ट आई न्यूज डेस्क:

लखनऊ:राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश स्थित महाविद्यालयों में शोध कार्यों को प्रोत्साहन/बढ़ावा दिये जाने हेतु सभी परास्नातक एवं स्नातक विभागों के शिक्षकों को शोध निर्देशन की सुविधा अनुमन्य कराए जाने के संबंध में 05 नवम्बर, 2021 के शासनादेश द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश प्रसारित किए गए थे। उक्त शासनादेश में यह व्यवस्था थी कि ऐसे नियमित व पूर्णकालिक शिक्षक जो पीएच0डी0 किए हो तथा कम से कम 05 शोध पत्र रेफर्ड जनरल में प्रकाशित किए हों, शोध निर्देशन कर सकेंगे।
महाविद्यालयों के शैक्षिक संगठनों द्वारा उप मुख्यमंत्री से मांग की गई कि यू0जी0सी0 विनियम में निर्धारित मानक के अनुसार महाविद्यालयों के शिक्षकों हेतु संदर्भित पत्रिकाओं में 05 के स्थान पर 02 शोध पत्र प्रकाशित किए गये हों, को शोध निर्देशन हेतु अनुमन्य किया जाए।
उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा द्वारा शैक्षिक संगठनों के मांगों को स्वीकार करते हुए यू0जी0सी0 विनियम में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आदेश निर्गत करने के निर्देश दिय गये। इस संबंध में मोनिका एस. गर्ग, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बताया गया कि प्रदेश में स्थित महाविद्यालयों में शोध कार्यों के प्रोत्साहन/बढ़ावा देने हेतु यू0जी0सी0 द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर सभी परास्नातक एवं स्नातक विभागों के शिक्षकों द्वारा शोध निर्देशन किया जाएगा। मानित विश्वविद्यालय का कोई भी नियमित रूप से नियुक्त आचार्य, जिसने किसी संदर्भित पत्रिका में कम से कम 05 शोध प्रकाशित किए हों तथा विश्वविद्यालय/मानित विश्वविद्यालय संस्थान/महाविद्यालय का कोई नियमित सह/सहायक आचार्य जो पीएच0डी उपाधि धारक हो तथा जिसके संदर्भित पत्रिकाओं में 02 शोध प्रकाशन प्रकाशित किए गये हों, ऐसे शिक्षक शोध निर्देशन कर सकेगें। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश शासनादेश दिनांक 06-01-2022 द्वारा निर्गत कर दिया गया है।

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