टेलीकॉम कंपनियों की आफत आई, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा 10 साल का बहीखाता

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नई दिल्ली। टेलीकॉम कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (AGR) जमा करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। ने बकाया ना चुकाने वाली टेलीकॉम कंपनियों से सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल का बहीखाता मांगा है। इसी के साथ कंम्पनियों को कहा गया है कि वो 10 साल में दिए गए टैक्स का ब्यौरा कोर्ट में दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो कंपनियों की भुगतान योजना पर विचार करे और कोर्ट को इस संबंध में जानकारी दे। इस याचिका पर अब अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते में होगी।

जस्टिस एमआर शाह ने कहा कि कोरोना संकटकाल के दौरान दूरसंचार एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा है जो लगातार पैसा कमा रहा है। इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को कुछ धनराशि जमा करनी होगी। क्योंकि सरकार को महामारी के इस दौर में पैसे की जरूरत है। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए जानकारी दी कि PSU के खिलाफ AGR बकाया क्यों बढ़ गया है।साथ ही यह भी कहा गया कि 4 लाख करोड़ रुपये का 96% बिल वापस ले लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि टेलीकॉम कंपनियों ने हलफनामा दाखिल कर दिया है. दूरसंचार विभाग को जवाब देना है और इसके लिए कुछ समय मिलना चाहिए।

मामले की सुनवाई के दौरान टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार और कंपनियों को समाधान के लिए साथ बैठना चाहिए जिससे बकाया भुगतान को लेकर फैसला लेना आसान हो जाए। इससे पहले एजीआर जमा करने के संबंध में दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते सुनवाई में टेलीकॉम कंपनियों को हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा था कि वे बकाया का भुगतान कैसे करेंगे। इसी के साथ कोर्ट ने टाइमफ्रेम के बारे में भी बताने के लिए कहा था।

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क्या है एजीआर (AGR)

एजीआर यानी एडजस्ट ग्रॉस रेवेन्यू जो दूरसंचार विभाग की तरफ से टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूसेज और लाइसेंसिंग फीस है। आंकड़ों के मुताबिक, इन कंपनियों पर एजीआर के तहत 1.47 लाख करोड़ रुपया बकाया है। भारती एयरटेल पर करीब 35 हजार करोड़ और वोडाफोन-आइडिया पर 53 हजार करोड़ बाकी चल रहा है। इसके अलावा कुछ औऱ कंपनियों पर भी बकाया है।

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