कोरोना से चरमराई अर्थव्यवस्था में सुधार के दिखे संकेत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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NIRMALA
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नई दिल्ली। भारत ने 2020 में प्रवेश आर्थिक मोर्चे पर कम वृद्धि अनुमानों के साथ किया था। इसके पीछे कई तिमाहियों की मंथर गति वाली GDP वृद्धि थी। लेकिन कोरोना वायरस महामारी ने स्थिति को और निराशाजनक कर दिया था। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कोरोना वायरस जैसी महामारी देश की अर्थव्यवस्था को इस कदर चोट पंहुचाएगी कि उससे उभरने में कितना समय लगेगा ये बता पाना मुश्किल हो जाएगा।

भविष्य कैसी करवट लेगा, इसकी सही-सही भविष्यवाणी करना आसान बात नहीं है और फिलहाल संभव भी नहीं है।. लेकिन ज़्यादातर अर्थशास्त्री एक बात पर सहमत होते नजर आ रहे हैं कि आज के विकासशील देश कल की आर्थिक महाशक्तियां होंगे।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र के दम पर अर्थव्यवस्था में तेजी एक बार फिर से लौटेगी और इसके ‘हरे संकेत’ दिखाई भी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कृषि उत्पाद में खरीद, खाद बिक्री, ऊर्जा मांग, माल आवाजाही, डिजिटल ट्रांसजेक्शन और विदेशी मुद्रा आमदनी में वृद्धि से ये संकेत साफ दिखाई पड़ रहे हैं।

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वित्त मंत्री ने अपने एक बयान में कहा कि, ”कृषि क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव है। सामान्य मॉनसून अर्थव्यवस्था के लिए मददगार साबित होगा। सरकारी एजेंसियों ने 16 जून तक किसानों से रिकॉर्ड 382 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद की है। यह 2012-13 की रिकॉर्ड खरीद से काफी अधिक है। इसे कोविड-19 की महामारी की चुनौती और सोशल डिस्टेंशिंग के प्रतिबंधों के बीच अंजाम दिया गया है। 42 लाख किसानों को एमएसपी के रूप में कुल 73,500 करोड़ रुपए दिए गए हैं।”

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