रिजर्व बैंक के दायरे में आएंगे कोऑपरेटिव बैंक, छोटे आदमी को होगा बड़ा फायदा, जानिए कैसे?

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नई दिल्ली।  बुधवार को नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। सूचना औऱ प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी दी की बैंकिंग सेक्टर को लेकर मोदी सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। कैबिनेट ने अध्यादेश पर मुहर लगाते हुए सभी कोऑपरेटिव बैंको को रिजर्व बैंक के दायरे में लाने का फैसला लिया। सरकार के इस फैसले से लोगों को उनके द्वारा की गई बचत की गारंटी मिलेगी।

प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि देश में 1482 अर्बन कोऑपेटिव बैंक और हैं 85 मल्टी स्टेक कोऑपरेटिव बैंक हैं, इनको लेकर आज अध्यादेश लाया गया है कि अब ये सभी बैंक रिजर्व बैंक के सुपरविजन में आएंगी। सभी बैंकिंग नियम अब कोऑपरेटिव बैंकों पर भी लागू होंगे। जो लोग पैसा जमा करेंगे उनको इस बात का भरोसा मिलेगा कि उनका पैसा सुरक्षित है और डूबेगा नहीं। सभी कोऑपेटिव बैंकों में मिलाकर 8 करोड़ 60 लाख खाताधारक हैं । इन बैंको में करीब 4 लाख करोड़ 84 लाख रुपए जमा हैं। उनका कहना है कि इस पैसे की अच्छी रक्षा हो सकेगी। रिस्ट्रक्चरिंग के समय लोगों के मन में पैसा डूबने का डर बना रहता था।

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अब मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत शिशु मुद्रा लोन लेने वाले 9 करोड़ 37 लाख लोगों को ब्याज में दो फीसदी की छूट भी मिलेगी। ठेले और रेहड़ी लगाने वाले या छोटे दुकानदारों मुद्रा योजना से पहले साहूकारों से पैसा लेते थे, उन्हें काफी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता था लेकिन अब उन्हें बैंकों से पैसा मिलता है। इस योजना से छोटे कारोबारी को भी बड़ा लाभ होगा। बता दें कि ये योजना 1 जून 2020 से लागू होगी और 31 मई 2021 तक चलेगी। इसके लिए इस वर्ष में 1540 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

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