बाबा रामदेव की बढ़ सकती है मुसीबत, कोरोना मरीजों की हालत गंभीर होने पर दी एलोपैथिक दवाई

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नई दिल्लीयोग गुरु बाबा रामदेव द्वारा लॉन्च की गई कोरोना वायरस की दवाई कोरोनिल पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बाबा रामदेव ने लॉन्चिंग के वक्त ये दावा किया था कोरोनिल कोरोना संक्रमित को सौ प्रतिशत ठीक करने में कारगार है।बाबा ने इस दवा को लॉन्च करते हुए कोविड-19 के सौ प्रतिशत इलाज का दावा किया था लेकिन बुधवार को आयुष मंत्रालय द्वारा बाबा रामदेव से जवाब मांगे जाने के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि उन्होंने ऐसी किसी दवा के लिए कोई लाइसेंस नहीं दिया है। वहीं राजस्थान सरकार ने ये भी कहा कि उनके पास इस दवा के ट्रायल की कोई जानकारी नहीं है।व गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने कहा था कि इस दवा का ट्रायल राजस्थान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड़ रिसर्चेस (NIMS) में किया गया है। जो कि एक निजी अस्पताल है जहां पर कोरोना के मरीजों का इलाज चल रहा है।

आपको ये भी बता दें कि जिस ट्रायल का दावा बाबा रामदेव ने किया उसमें  गंभीर रोगियों को नही शामिल किया गया है।जानकारी के लिए बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इस दवा का ट्रायल सिर्फ हल्के लक्षणों वाले और लक्षणविहीन कोरोना रोगियों पर किया गया है। और जैसे ही रोगियों की हालत गंभी हुई और उनमें गंभीर लक्षण दिखे तो उनको दवाएं दी गईं।

सूत्रों के मुताबिक निम्स में लक्षणविहीन रोगी भर्ती हो रहे हैं। दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल हेल्थ ऑफिसर नरोत्तम शर्मा ने जानकारी दी की NIMS अस्पताल में सिर्फ लक्षणविहीन कोरोना रोगी ही भर्ती कराए जा रहे हैं। इसलिए ये कहना ठीक नहीं है के बाबा रामदेव की ये दवा कोरोना रोगियों का 100 प्रतिशत इलाज करने में कारगार है।

 

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