नैशनल डॉक्टर्स डे 2020: कोविड-19 महामारी के समय लोगों की सेवा करने का अनुभव कैसा रहा कैजुअल्टी वॉर्ड के डॉक्टर से जानें | health – News in Hindi

0
6

कोविड-19 महामारी से पहले उनका वजन 76 किलो था जो अब घटकर 68 किलो हो गया है. उनके यूरिन का रंग गहरा पीला हो गया है- जो कि 6 से 8 घंटे की लंबी शिफ्ट में हर वक्त पीपीई किट पहनने वाले ज्यादातर हेल्थकेयर वर्कर का हो रहा है और इसकी वजह है शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और विषाक्त पदार्थों का शरीर में जमा होना. चेहरे पर डबल मास्क, आंखों पर प्रोटेक्टिव चश्मे, हाथों में डबल ग्लव्स और ये सब दिल्ली की इस जबरदस्त गर्मी और नमी से भरे मौसम में. डॉ स्नेम मोहन सोनी जैसे लोग अपनी निजी जिंदगी और जरूरतों को अलग रखकर कोविड-19 महामारी के समय मरीजों की सेवा और देखभाल करने में लगे हैं.

नई दिल्ली के झिलमिल स्थित इंदिरा गांधी ईएसआईसी हॉस्पिटल में जूनियर रेसिडेंट कैजुअल्टी के डॉक्टर हैं डॉ सोनी और कोविड-19 महामारी के समय वे मुख्य चिकित्सा अधिकारी के तौर पर कार्य कर रहे हैं. हर साल 1 जुलाई को सेलिब्रेट किए जाने वाले नैशनल डॉक्टर्स डे के मौके पर एक इंटरव्यू में डॉ सोनी ने बताया कि कैसे कोविड-19 वॉर्ड्स में सिर्फ डॉक्टर ही नहीं है जिन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

शुरुआती दिनों में चिंता और फिक्र ज्यादाजब आप कोविड वॉर्ड में काम करते हैं तो आपको पता होता है कि आपके सभी पेशंट्स कोविड-19 पॉजिटिव हैं और आपको बहुत ज्यादा सतर्क रहने और ऐहतियात बरतने की जरूरत है. कैजुअल्टी वॉर्ड में हर तरह के मरीजों का आना होता है फिर चाहे वे बुखार के मरीज हों या फिर टीबी के. जब तक कि इन मरीजों के टेस्ट रिजल्ट नहीं आ जाते तब तक ये कहा नहीं जा सकता कि इनमें से किस मरीज को संक्रामक बीमारी है और किसे नहीं. इसका मतलब है कि हमें हर वक्त जरूरी सावधानियां बरतनी है, अपने आसपास के माहौल को लेकर सतर्क रहना है और शिफ्ट के दौरान सही फैसले लेने हैं ताकि बिना रूके, बिना थके ज्यादा से ज्यादा काम किया जा सके.

डॉ सोनी बताते हैं, ‘महामारी के शुरुआती दिनों में कोविड-19 के कंफर्म्ड मरीज की एक नजदीकी संपर्क वाली महिला ईएसआई कार्ड के साथ आयी- हम बीमा वाले अस्पताल हैं और वह वॉर्ड में करीब 6 घंटों तक बैठी रही और उसके बाद वह दूसरे अस्पताल में टेस्टिंग के लिए गयी. वह कोविड-19 पॉजिटिव निकली और हमारे पूरे कैजुलअटी वॉर्ड को क्वारंटीन किया गया. निःसंदेह हमने उस परिस्थिति का भी सामना किया और पीपीई किट्स पहनने के दौरान भी इस तरह के कई परिदृश्य देखने को मिले.’

पीपीई किट्स डॉक्टर्स को सुरक्षित तो रखता है लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं करता. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि लगातार कई घंटों तक पीपीई किट पहने रहने की वजह से इसका सेहत पर भी गंभीर प्रतिघात देखने को मिलता है. डॉ सोनी बताते हैं कि वे जब शिफ्ट खत्म होने के बाद अपनी पीपीई किट और डबल ग्लव्स उतारते हैं तो उनके हाथों पर इतनी झुर्रियां होती हैं मानो उन्होंने पूरे गांव के कपड़े एकसाथ धोएं हों. इतना ही नहीं, इस तरह की इतनी बड़ी महामारी के समय जानकारी की कमी या साफ-सफाई के सुरक्षित अभ्यासों के बारे में अज्ञानता या नादानी दिखाने पर भी डॉक्टरों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है.

खुद अपना इलाज करते फिजिशियन
ऐसी ही एक डराने वाली घटना को याद करते हुए डॉ सोनी बताते हैं, ‘जैसे ही मेरी शिफ्ट खत्म होने वाली थी ठीक उसी समय कोविड-19 के लक्षणों वाला एक मरीज कैजुअलटी वॉर्ड में आया. हमने उससे कहा कि वह मास्क पहन ले, बैठ जाए और कुछ देर इंतजार करे. मैं बस अस्पताल से निकलने ही वाला था इसलिए मैंने अपना पीपीई, मास्क, सुरक्षात्मक गियर सबकुछ उतार दिया था. हमारे द्वारा बार-बार कहने के बाद भी वह मरीज जिसने अब तक अपना मास्क नहीं पहना था वह मेरे पास आ गया और बात करते वक्त मेरे मुंह पर ही उसने खांस दिया.’

अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह घटना कितनी डराने वाली थी. बावजूद इसके एक स्वास्थ्यकर्मी को जिस तरह से प्रफेशनल व्यवहार करना चाहिए डॉ सोनी वहीं खड़े रहे। डॉ सोनी आगे बताते हैं, ‘इस घटना के बाद मुझ में भी कोविड-19 के कुछ लक्षण दिखने लगे और मैंने पहली बार अपना टेस्ट करवाया और जरूरी क्वारंटीन की प्रक्रिया का पालन किया जब तक दूसरा टेस्ट रिजल्ट भी नहीं आ गया. अच्छी बात ये है कि मेरे दोनों ही टेस्ट रिजल्ट नेगेटिव आए और मैं तुरंत ही अपनी ड्यूटी पर लौट आया. लेकिन इस घटना के बाद अस्पताल में हमने सुनिश्चित किया कि कोई भी डॉक्टर बिना पीपीई या मास्क पहने किसी भी मरीज के साथ बातचीत नहीं करेगा.’

इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि डॉक्टरों को प्राकृतिक रूप से कितना स्ट्रेस है. डॉ सोनी बताते हैं कि उन्हें नींद से जुड़ी कई तरह की समस्याएं भी हो गई हैं और नींद की कमी की वजह से उनका हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन भी बढ़ गई है लेकिन उनके पास मौजूदा समय में इन सारी चीजों से निपटने का समय नहीं है. यही वजह है कि डॉक्टरों को मौजूदा समय में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है.

चारों तरफ महामारी का प्रकोप है और इसलिए हमें अपनी निजी समस्याओं को अभी अलग कैटिगरी में रखने की जरूरत है. इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए दिनभर में कई बार गर्म पानी पीना, काढ़ा पीना या कई दूसरे उपाय करना संभव नहीं है क्योंकि आपको हर वक्त प्रोटेक्टिव गियर पहनकर रखना है. पोषण से भरपूर सेहतमंद डायट का सेवन करें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, जितना हो सके आराम करें और मेडिकल कम्यूनिटी द्वारा अनुशंसित रोगनिरोधी दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन का सेवन करें- यह सब करना इस वक्त बेहद जरूरी है न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने उन सभी सहयोगियों के लिए जिन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो.

अतीत के बारे में न सोचकर आगे भविष्य की ओर देखना
मौजूदा समय में हम सब डॉक्टरों की मदद करने के लिए आखिर अपनी तरह से क्या कर सकते हैं? इस बारे में डॉ सोनी का सुझाव है, ‘अपनी सेहत और ऐहतियाती कदमों को गंभीरता से लें. आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि चूंकि आपकी इम्यूनिटी थोड़ी मजबूत है इसलिए आपको ये बीमारी नहीं होगी या आप आसानी से ठीक हो जाएंगे. यह एक गंभीर बीमारी है और हेल्थकेयर सिस्टम पर इसका गंभीर असर देखने को मिल रहा है. मौजूदा समय में अगर आपको टायफाइड के लक्षण भी दिखते हैं तब भी अस्पताल आपको पहले कोविड-19 का टेस्ट करवाने के लिए कहेंगे और उसके बाद आपका संपूर्ण चेकअप और इलाज किया जाएगा.’

लिहाजा जब तक कि कोई वैक्सीन न बन जाए- जिसे बनने में कम से कम 1 साल का वक्त लगेगा- ऐहतियात बरतना ही एकमात्र उपाय है जो आप कर सकते हैं और इसका सबसे आसान तरीका है सही तरीके से मास्क पहनना. डॉ सोनी बताते हैं, ‘एक दिन वॉर्ड के वेटिंग रूम में इंतजार कर रही एक महिला जिसने मास्क नहीं पहना था उसे मैंने मास्क पहनने के लिए टोका तो उसने अपनी साड़ी के पल्लू से नाक और मुंह को ढक लिया. अब आप ही बताइए मैं कितनी बार लोगों को यह समझाउं को ऐसा करना काफी नहीं है.’

साक्षरता और शिक्षित होने में अंतर होता है और इसलिए डॉ सोनी मानते हैं कि अब बहुत समय हो गया है और हमें बेसिक हेल्थकेयर एजुकेशन को सभी के लिए अनिवार्य कर देना चाहिए. ऐसे कई देश हैं जहां बेसिक फर्स्ट एड, सीपीआर देना और दूसरी चिकित्सीय आपातकालीन नियमों को सभी के लिए अनिवार्य कर दिया है. अगर कभी कहीं पर डॉक्टर तुरंत मौजूद न हो तो आपातकालीन स्थिति में लोगों की जान को बचाया जा सकता है. अगर स्कूल कॉलेजों में बाकी के विषयों की ही तरह बेसिक हेल्थकेयर की चीजें भी सिखायी जाएं तो निश्चित तौर पर इससे एक बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है.

यह हम सभी का कर्तव्य है. हमें खुद को सिर्फ दर्शक बनने से रोकना होगा और हमारी आबादी को शिक्षित करने का जिम्मा लेना होगा, उन्हें यह समझाना होगा कि स्वास्थ्य सेवा एक बुनियादी अधिकार है और इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पीपीई पहनने के लिए अपनाएं ये 10 कदम के बारे में पढ़ें.

न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.



Source link