सरकारी दफ्तरों में मराठी इस्तेमाल नहीं की तो महाराष्ट्र में नहीं होगा इन्क्रीमेंट

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Edited By Nilesh Mishra | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

सांकेतिक तस्वीरसांकेतिक तस्वीर
हाइलाइट्स

  • महाराष्ट्र के सरकारी दफ्तरों में मराठी भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य, सरकार ने जारी किया आदेश
  • आदेश के मुताबिक, सरकारी कामकाज में मराठी इस्तेमाल ना करने पर रुक सकता है इन्क्रीमेंट
  • पहले भी इस संदर्भ में आदेश जारी किए जा चुके हैं लेकिन कभी सख्ती से नहीं हुआ पालन

मुंबई

महाराष्ट्र में शिवसेना की सत्ता आने के साथ ही ‘मराठी विमर्श’ फिर से शुरू हो गया है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने साफ कहा है कि सभी कर्मचारी मराठी भाषा का इस्तेमाल करें। खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास ही यह विभाग है, ऐसे में यह स्पष्ट है कि ‘मराठी मानुष’ की विचारधारा को प्रमोट करने वाली शिवसेना ही इस विचार के पीछे है।

राज्य सरकार के इस सर्कुलर में साफ कहा गया है कि सभी सरकारी दफ्तरों, मंत्रालयों, डिविनजल दफ्तर और निकाय कार्यालयों में आधिकारिक इस्तेमाल के लिए लिखे जाने वाले पत्रों और अन्य संचार तरीकों में सिर्फ मराठी भाषा का इस्तेमाल किया जाए। ऐसा ना करने पर कर्मचारियों को या तो चेतावनी दी जाएगी या फिर उसकी कॉन्फिडेन्शियल रिपोर्ट में इसकी एंट्री कर दी जाएगी या फिर उसका इन्क्रीमेंट एक साल के लिए रोक दिया जाएगा।

पहले भी जारी हुए आदेश, पालन नहीं हुआ

मंत्रालय के सर्कुलर में कहा गया है कि इस मामले में दोषी पाए जाने पर छूट तभी दी जाएगी, जब मराठी इस्तेमाल ना कर पाने के पीछे कोई ठोस वजह दी जा सके। सर्कुलर में कुछ सरकारी योजनाओं के विज्ञापनों और स्लोगन्स को हिंदी और अंग्रेजी में लिखे जाने की बात को संज्ञान में लाया गया है। कहा गया है कि इस संदर्भ में पहले भी सर्कुलर जारी किए गए हैं लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

कैबिनेट मीटिंग के दौरान भी यह मुद्दा उठा और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे संबंधित विभागों में इसका पालन करवाएं। पूर्व प्रमुख सचिव महेश जागड़े ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, ‘अगर आप महाराष्ट्र में काम कर रहे हैं तो आपको मराठी में ही संचार करना चाहिए। पिछली सरकारों ने भी चेतावनी दी थी लेकिन कोई फर्क नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि इस सरकार ने इसे गंभीरता से ले लिया है।’

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