कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रेमडेसिविर के बारे में ये 4 बातें जानना है जरूरी | health – News in Hindi

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21 जून 2020 को हैदराबाद स्थित फार्मासूटिकल कंपनी हेटेरो ने एक प्रेस रिलीज जारी कर इस बात की घोषणा की कि ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया (Drug Controller of India) ने उनकी कंपनी को एंटीवायरल दवा रेमडेसिवियर (Antiviral Drug Remdesivir) के जेनरिक वर्जन को कोविफोर नाम के तहत बनाने और मार्केट में बेचने की स्वीकृति दे दी है. उसी दिन यानी 21 जून को ही मुंबई स्थित फार्मासूटिकल कंपनी सिपला ने भी रेमडेसिवियर के अपने वर्जन- सिप्रेमी की घोषणा कर दी.

रेमडेसिवियर दवा (Remdesivir) की बात करें तो इसे मूल रूप से अमेरिका की बायोटेक्नोलॉजी फर्म गिलियड साइंसेज (Gilead Sciences)ने विकसित किया है. कोविड-19 (Covid-19)के मैनेजमेंट में इस दवा की क्षमता के सबूतों को देखते हुए मई 2020 में अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन FDA ने रेमडेसिवियर दवा की आपातकालीन इस्तेमाल की स्वीकृति दे दी थी. यहां तक की भारत में भी इस दवा को प्रतिबंधित आपातकालीन इस्तेमाल के तहत ही यूज किया जा सकता है. इसका मतलब है कि डॉक्टरों को यह दवा मरीज को देने से पहले मरीज की सहमति लेनी होगी.

रेमडेसिवियर दवा के बारे में आपको भी जरूर पता होनी चाहिए ये 4 बातें:1. आखिर क्या है रेमडेसिवियर?
रेमडेसिवियर एक न्यूक्लियोसाइड ऐनालॉग है जिसे साल 2010 में अफ्रीका में फैले इबोला महामारी से निपटने के लिए विकसित किया गया था. हालांकि यह दवा इबोला मरीजों पर उतनी असरदार साबित नहीं हुई जितनी कि बाकी की थेरेपीज. बाद में यह दवा सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एमइआरएस) इन दोनों वायरस के खिलाफ असरदार साबित हुई. ये दोनों वायरस भी कोरोना वायरस ही हैं जिनका संबंध कोविड-19 बीमारी के लिए जिम्मेदार वायरस से है.

न्यूक्लियोसाइड्स, शुगर और नाइट्रोजेनस बेस से बनते हैं और वे डीएनए और आरएनए के लिए ब्लॉक्स बनाने का काम करते हैं. न्यूक्लियोसाइड ऐनालॉग न्यूक्लियोसाइड्स की तरह ही दिखते हैं और वायरस को बढ़ने में प्रतिरोध उत्पन्न करते हैं जिससे शरीर के अंदर नया वायरस नहीं बन पाता है.न्यूक्लियोसाइड ऐनालॉग का मौजूदा समय में साइटोमेगालोवायरस, एचआईवी और हेपेटाइटिस बी जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल हो रहा है.

2. रेमडेसिवियर कैसे काम करती है?

रेमडेसिवियर, एडेनोसिन नाम के न्यूक्लियोसाइड का इनऐक्टिवेटेड यानी असक्रिय वर्जन है. दरअसल हमारे शरीर में 4 तरह के न्यूक्लियोसाइड्स होते हैं- एडेनोसिन, गुआनोसिन, साइटोसिन और थाइमिन। एक बार जब यह दवा हमारे शरीर में प्रवेश कर जाती है उसके बाद यह सक्रिय हो जाती है. यह सक्रिय रेमडेसिवियर दवा कोविड-19 के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स-सीओवी-2 के RNA पॉलिमर्स के फंक्शन को रोक देती है. RNA पॉलिमर्स एक एन्जाइम है जो शरीर की कोशिकाओं के अंदर वायरल RNA के सैंकड़ों कॉपी बनाने के लिए जिम्मेदार होता है.

3. रेमडेसिवियर असरदार है, इस बात के क्या वैज्ञानिक सबूत हैं?
कोविड-19 के खिलाफ रेमडेसिवियर कितनी असरदार है इसका पता लगाने के लिए अब तक कई ट्रायल और स्टडीज हो चुकी हैं. ऐसा ही एक ट्रायल अमेरिका की नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी किया था जिसमें यह सुझाव दिया गया कि रेमडेसिवियर, कोविड-19 के मरीजों के रिकवरी टाइम को 31 प्रतिशत तक बेहतर कर सकती है और इस तरह से मरीज 11वें दिन में ही अस्पताल से बाहर आ सकता है. जबकी स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट में मरीज को 15 दिन के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलती है.

गिलियड साइंसेज की तरफ से जो क्लिनिकल ट्रायल्स किए गए उसके नतीजे यह बताते हैं कि कोविड-19 के गंभीर मरीजों के लक्षणों में 10 से 11 दिन के अंदर सुधार देखने को मिला जब उन्हें 5 और 10 दिन तक रेमडेसिवियर दवा दी गई. वैसे लोग जिन्हें कोविड-19 की मध्यम श्रेणी की बीमारी हुई थी उनमें से करीब 65 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिन्हें 5 दिन तक रेमडेसिवियर देने के बाद 11वें दिन से उनमें सुधार देखने को मिला.

4. क्या रेमडेसिवियर का कोई साइड इफेक्ट भी है?
अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन FDA का सुझाव है कि रेमडेसिवियर की वजह से लिवर में एन्जाइम्स बढ़ जाते हैं जिसकी वजह से लिवर क्षतिग्रस्त होने की समस्या हो सकती है. रेमडेसिवियर को मौजूदा समय में सिर्फ इंट्राविनस के जरिए ही दिया जा सकता है. लिहाजा कुछ मरीजों में इन्फ्यूजन यानी दवा देने के तरीके से जुड़े कुछ रिऐक्शन भी हो सकते हैं, जैसे- जी मिचलाना, उल्टी आना, पसीना आना या थर-थर कांपना आदि.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोविड-19 क्या है, कारण, लक्षण, इलाज के बारे में पढ़ें।

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