Coronavirus: कोविड-19 ही नहीं इन बीमारियों का भी नहीं मिला अब तक इलाज | health – News in Hindi

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Coronavirus: कोविड-19 ही नहीं इन बीमारियों का भी नहीं मिला अब तक इलाज

पुलिस कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव निकलने से मचा हड़कंप.

लोगों को कोरोना वायरस (Covid19) के साथ ही रहना सीखना होगा. जैसा कि कुछ अन्य बीमारियों के साथ इंसान ने रहना सीख लिया है. जी हां, कोरोना वायरस के अलावा भी दुनिया में ऐसी बीमारियां हैं, जिनका अभी तक पुख्ता इलाज नहीं मिला है.




  • Last Updated:
    June 26, 2020, 6:43 AM IST

दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) से बचने के लिए वैक्सीन बनाने पर काम चल रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि वैक्सीन बनाने के काम में कितनी भी तेजी लाई जाए तो भी दुनियाभर के बाजारों में आने में इसे कम से कम 2 से 3 साल का वक्त लग सकता है. ऐसे में लोगों को कोरोना वायरस (Covid19) के साथ ही रहना सीखना होगा. जैसा कि कुछ अन्य बीमारियों के साथ इंसान ने रहना सीख लिया है. जी हां, कोरोना वायरस के अलावा भी दुनिया में ऐसी बीमारियां हैं, जिनका अभी तक पुख्ता इलाज नहीं मिला है. आइए जानते हैं इन बीमारियों के बारे में –

एचआईवी वायरस : एड्स (AIDS) जैसी घातक बीमारी को जन्म देने वाला एचआईवी वायरस (HIV) भी मानव जाति के लिए घातक है. इस वायरस के बारे में करीब 30 साल पहले वैज्ञानिकों को पता चला था, लेकिन आज तक सटीक इलाज नहीं खोजा जा सका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इस घातक वायरस के कारण अभी तक दुनियाभर में 3.2 करोड़ लोगों की जान जा चुकी है. एचआईवी वायरस ने भी लोगों की जीवनशैली पर बहुत बुरा असर डाला था. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अनुराग शाही के अनुसार, लोगों को अपनी यौन आदतें बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि ज्यादातर एचआईवी वायरस का संक्रमण यौन संबंधों के जरिए ही फैलता है. करीब चार दशक बीत जाने के बाद भी अभी तक इसकी दवा नहीं खोजी जा सकी है, सिर्फ परहेज करने से ही एचआईवी वायरस से बचा जा सकता है.

एवियन इन्फ्लूएंजा : 90 के दशक के अंतिम दौर में एवियन इन्फ्लूएंजा (Bird Flu) के मामले सामने आने शुरू हुए थे. इससे भी कई लोग संक्रमित होकर मारे जा चुके हैं. एवियन इन्फ्लूएंजा चिड़ियों के मल से इंसानों में फैलता है. 1997 में एच5एन1 वायरस का सबसे पहले संक्रमण हांगकांग में पता चला था, जिसके कारण वहां लाखों की तादाद में मुर्गियों को मारा गया था. इसके बाद यह वायरस अफ्रीका, एशिया और यूरोप के करीब 50 से ज्यादा देशों में फैल गया था. इस वायरस की मृत्युदर करीब 60 फीसदी तक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वर्ष 2013 और 2017 के बीच एवियन इन्फ्लूएंजा संक्रमण के कुल 1565 मामले सामने आए हैं, जिसमें से 39 फीसदी संक्रमितों की मौत हो गई थी. इस वायरस का भी अभी तक इलाज नहीं खोज जा सका है.

सार्स वायरस : यह वायरस भी कोरोना परिवार (Coronavirus Family) का ही है. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली के अनुसार, सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी सार्स वायरस का पहली बार 2003 में पता चला था. अभी तक यह माना जाता है कि यह वायरस चमगादड़ों के जरिए इंसान में पहुंचा है. चीन के गुआंगजू प्रांत में 2002 में संक्रमण का पहला मामला सामने आया था. इस वायरस की चपेट में आने पर फेफड़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है. 2003 में 26 देशों के करीब 8000 से ज्यादा लोग सार्स वायरस से संक्रमित हो गए थे, जिसमें 916 लोगों की मौत हो गई थी. सार्स वायरस में मृत्युदर 11 फीसदी के आसपास है. तब से इसके संक्रमण के कम ही मामले सामने आए हैं, इसलिए वैक्सीन पर रिसर्च का काम भी ज्यादा नहीं किया गया.मर्स कोव वायरस : मर्स कोव वायरस भी एक तरह का कोरोना वायरस ही है. इसकी पहली बार जानकारी 2012 में सामने आई थी. इस बीमारी में मृत्युदर सबसे अधिक है. नवंबर 2019 तक दुनियाभर में इससे 2494 लोग संक्रमित हो चुके हैं और करीब 858 लोगों की मौत हो चुकी है. इस वायरस का सबसे पहला मामला सऊदी अरब में सामने आया था. इसके बाद से अभी तक 27 देशों में यह वायरस पाया जा चुका है. मर्स कोव वायरस के अरबी ऊंटों से इंसान में पहुंचने की जानकारी सामने आई है. मर्स और सार्स वायरस का संक्रमण नियंत्रित हो जाने का कारण इनके वैक्सीन पर कोई काम नहीं किया गया.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ये हैं कोविड-19 के चरण, लक्षण, उपचार और दवा पढ़ें।

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