परीक्षाएं न होने पर डिग्री की वैधता पर उठेगा सवाल : UGC

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नई दिल्ली।कोरोना वायरस महामारी के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लागू किया गया था। जिसके चलते सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं तक स्थगित कर दी गईं थी। लेकिन अब UGC के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने गुरुवार को इस बात को सामने रखा कि अगर हम फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षाएं नहीं कराएंगे तो इससे उनकी डिग्री की वैधता पर एक सवाल उठता है। उन्होंने साथ ही कहा कि कोरोना वायरस की वजह से जो स्तिथियां बदली हैं उनको हमने देखा है और उन स्तिथियों के चलते उस वक्त परीक्षाएं कराना संभव नहीं था। छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को देखते हुए जुलाई में अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा कराना संभव नहीं था, इसलिए 30 सिंतबर तक परीक्षा कराने की गाइडलाइंस दी गई हैं।

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इन मोड में होंगी परीक्षाएं

प्रो. रजनीश जैन ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज ऑनलाइन, ऑफलाइन या ब्लेंडेड किसी भी मोड से परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं। परीक्षाएं आयोजित करने की गाइडलाइंस स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सुझाई गई मानक संचालन प्रक्रिया के आधार पर ही जारी की गई हैं।

सभी राज्यों से अपील करते हुए प्रोफेसर जैन ने कहा कि वह अपने यहां के सभी विश्वविद्यालयों के फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षा जरूर कराएं। उन्होंने कहा, ‘हमें पता चला है कि कई राज्यों ने अपने यहां के विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। लेकिन देश में उच्च शिक्षा स्तर में एकरूपता होना काफी आवश्यक है। सभी राज्यों को यूजीसी की गाइडलाइंस माननी चाहिए और फाइनल ईयर की परीक्षाएं करानी चाहिए।’ उनका कहना है कि ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स की परीक्षाएं कराना काफी जरूरी है हालांकि स्टूडेंट्स की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य भी हमारी प्रमुख चिंता है। हालातों को देखते हुए ही हमने तय किया कि सिर्फ फाइनल ईयर के एग्जाम होंगे। आपको बता दें कि अगर कोई छात्र सितंबर में होने वाली परीक्षाओं में नहीं बैठ पाता है तो यूनिवर्सिटी ऐसे छात्रों के लिए स्पेशल एग्जाम करवाएगी।

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