यौन संचारित रोग सिफलिस क्या छूने से भी फैलता है, जानें इससे बचने का तरीका | health – News in Hindi

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यौन संचारित रोग सिफलिस क्या छूने से भी फैलता है, जानें इससे बचने का तरीका

यौन संचारित रोग सिफलिस सेक्शुअल रिलेशन बनाने से बढ़ता है.

सिफलिस (Syphilis) टी पैलिडम नाम के बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाला संक्रमण है. इस बीमारी (disease) की शुरुआत त्वचा पर दर्दरहित छालों के साथ होती है.




  • Last Updated:
    June 25, 2020, 6:24 AM IST

सिफलिस बीमारी एक सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन है. इसे हिॆदी में यौन संचारित संक्रमण कहते हैं. अगर समय से इसका इलाज न कराया जाए तो यह हार्ट, ब्रेन और शरीर के दूसरे अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है. इस बीमारी में सिफलिस, टी पैलिडम नाम के बैक्टीरिया द्वारा फैलने वाला संक्रमण है. इस बीमारी की शुरुआत त्वचा पर होने वाले दर्दरहित छालों के रूप में होती है. सिफलिटिक या दर्दरहित छाले जननांगों, मलाशय और यहां तक की होंठ और मुंह में भी हो सकते हैं.

यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क में आने से  फैलती है, लेकिन कई बार यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के स्किन या श्लेष्म झिल्ली (mucous membrane) के संपर्क में आने पर भी स्वस्थ व्यक्ति को हस्तांतरित हो सकती है. हालांकि संक्रमित व्यक्ति द्वारा दरवाजे के हैंडल या मेज जैसी सतहों को छूने, टॉइलेट शेयर करने आदि से यह संक्रमण नहीं फैलता. ओरल, वजाइनल या ऐनल संबंधी यौन गतिविधियों के दौरान इस बीमारी के फैलने की आशंका अधिक होती है. कुछ मामलों में यह किस करने पर भी फैल सकता है.

गर्भवती महिला से बच्चे में फैल सकती है बीमारी
चूंकि यह छाले दर्दरहित होते हैं इसलिए बहुत से लोगों का ध्यान इन छालों की तरफ नहीं जाता. कई बार ये छाले अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन यदि इलाज न किया जाए तो बैक्टीरिया शरीर में ही रह जाता है. सिफलिस को डायग्नोज करना मुश्किल होता है क्योंकि कई बार व्यक्ति में सालों तक इस बीमारी के कोई लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन वह इंफेक्शन का कैरियर होता है. अगर किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान सिफलिस हो जाए तो वह अपने होने वाले बच्चे को भी यह बीमारी संचारित कर सकती है, जिसके घातक परिणाम हो सकते हैं. आज हम इस लेख में आपको सिफलिस बीमारी के कारण, लक्षण और इसके इलाज के बारे में बता रहे हैं.1. सिफलिस के लक्षण और संकेत

सिफलिस बीमारी के मुख्य रूप से 4 चरण होते हैं चारों में अलग-अलग और स्पष्ट लक्षण नजर आते हैं:

प्राथमिक सिफलिस

  • बैक्टीरिया से संक्रमित होने के बाद बीमारी का आरंभिक स्टेज है जो संक्रमण के 3 महीने तक नजर आता है.
  • इस दौरान संक्रमित व्यक्ति को दर्दरहित छाले होते हैं, लेकिन कोई और प्रमुख लक्षण नहीं दिखता.
  • कई बार बिना किसी हस्तक्षेप के भी कुछ हफ्तों में ही प्राइमरी स्टेज का सिफलिस अपने आप ठीक हो जाता है.

द्वितीय चरण का सिफलिस

  • इस चरण में व्यक्ति को हाथ, पैर और जननांगों में खुजली के लक्षण नजर आते हैं.
  • संक्रमित होने के बाद करीब 6 महीने तक व्यक्ति में सेकेंड्री सिफलिस का चरण जारी रह सकता है.
  • इस दौरान संक्रमित व्यक्ति को बुखार, सिर में दर्द या जननांगों में असामान्य विकास की भी समस्या देखने को मिल सकती है.

तीसरे चरण का सिफलिस

  • यह बीमारी का अडवांस्ड स्टेज है, जिसमें प्रमुख अंग प्रभावित होने लगते हैं.
  • अंधापन, पैरालाइसिस या कार्डिएक बीमारियां इस तरह की प्रमुख समस्याएं हैं.
  • अगर इस दौरान भी बीमारी का इलाज न हो पाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है.

इसके अलावा भी कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं जैसे- मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां, वजन घटना, थकान, बाल झड़ना, मानसिक बीमारी, स्मरण शक्ति की क्षति, रीढ़ की हड्डी में होने वाला संक्रमण आदि.

2. सिफलिस होने का प्रमुख कारण क्या है ?

  • ट्रिपोनेमा या टी पैलिडम बैक्टीरिया की वजह से सिफलिस या उपदंश होता है.
  • असुरक्षित सेक्स इस इंफेक्शन के फैलने का सबसे प्रमुख जरिया है.
  • होमोसेक्शुअल या समलैंगिक पुरुषों में सिफलिस होने का खतरा सबसे अधिक होता है.
  • संक्रमित महिला अपने अजन्मे बच्चे को भी यह संक्रमण दे सकती है, जिसे कॉन्जेनिटल या जन्मजात सिफलिस कहते हैं.
  • संक्रमित व्यक्ति के चक्त्ते या छाले के संपर्क में आने पर भी यह इंफेक्शन दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है.
  • एक बार ठीक होने के बाद सिफलिस दोबारा अपने आप नहीं होता, लेकिन अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आएं तो आप फिर से संक्रमित हो सकते हैं.

3. सिफलिस की पहचान और इलाज

डायग्नोसिस

  • डॉक्टर सबसे पहले संक्रमित व्यक्ति की सेक्शुअल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं और त्वचा का परीक्षण भी करते हैं खासकर जननांग के हिस्से का.
  • अगर लक्षण और डॉक्टर का परीक्षण सिफलिस की ओर इशारा करता है तो ब्लड टेस्ट किया जाता है और साथ ही में छाले का परीक्षण भी ताकि सिफलिस बैक्टीरिया का पता लगाया जा सके.
  • अगर सिफलिस के तीसरे चरण का पता चलता है तो अलग-अलग अंगों की स्थिति क्या है इसके लिए टेस्ट किया जाता है.
  • रीढ़ की हड्डी से फ्लूइड लिया जाता है और उसमें बैक्टीरिया की मौजूदगी की जांच की जाती है.
  • अगर सिफलिस की पुष्टि हो जाती है तो संक्रमित व्यक्ति के पार्टनर को भी जांच करवाने की सलाह दी जाती है.

इलाज

  • शुरुआती स्टेज के सिफलिस के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती है. पेनिसिलिन सबसे कॉमन एंटीबायोटिक है जिसका इस्तेमाल सिफलिस के इलाज में किया जाता है.
  • सिफलिस के तीसरे चरण में विस्तृत इलाज की जरूरत होती है, मुख्य रूप से लक्षणों को बेहतर करने के लिए क्योंकि इस स्टेज में आकर बीमारी के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता.
  • इलाज की अवधि के दौरान बेहद जरूरी है कि संक्रमित व्यक्ति किसी तरह की सेक्शुअल ऐक्टिविटी या किसी भी व्यक्ति से शारीरिक रूप से नजदीकी बनाने से बचे.

4. सिफलिस से ऐसे करें बचाव 
सिफलिस को रोकने का सबसे अच्छा तरीका सुरक्षित तरीके से सेक्स करना है. किसी भी प्रकार के यौन संपर्क के दौरान कंडोम का उपयोग करना बेहतर रहेगा. इसके अलावा निम्नलिखित उपाय भी किए जा सकते हैं :

  • एक से ज्यादा सेक्शुअल पार्टनर रखने से बचें.
  • ओरल सेक्स के दौरान डेंटल डैम या कंड़ोम का इस्तेमाल करें.
  • सेक्स टॉयज को शेयर करने से बचें.
  • यौन संचारित संक्रमण की जांच कराएं और अपने पार्टनर से उनके नतीजों के बारे में बात करें.
  • मेडिकल सुई शेयर करने पर भी सिफलिस फैल सकता है इसलिए हमेशा नई सुई का इस्तेमाल करें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, सिफलिस क्या है, कारण, लक्षण, इलाज के बारे में पढ़ें।

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