सामना में पहली बार गैर शिवसेना नेता का इंटरव्यू

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Edited By Raghavendra Shukla | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

शरद पवार और संजय राउत (फाइल फोटो)शरद पवार और संजय राउत (फाइल फोटो)

मुंबई

शिवसेना सांसद और सामना के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत के सवालों का जवाब देते हुए एनसीपी चीफ शरद पवार पहले ऐसे गैर-शिवसेना नेता बन गए हैं, जिनका इंटरव्यू सामना में प्रकाशित किया गया। ‘सामना’ के 33 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। अपने इस साक्षात्कार में पवार ने बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस को निशाने पर लिया। साथ ही केंद्र सरकार पर भी महाराष्ट्र सरकार का सहयोग न करने के आरोप लगाए।

पवार ने इस दौरान लॉकडाउन और महाविकास अघाड़ी की तीनों पार्टियों के आपसी रिश्तों पर भी बात की। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह प्रदेश की सरकार के ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसते हुए कहा कि राजनेताओं की कभी भी जनता को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं को भी एक वक्त में हार का मुंह देखना पड़ा था।

पवार ने महाराष्ट्र की महाविकास अघाडी सरकार में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा, ‘एमवीए (महाविकास अघाड़ी) में वह न तो ‘हेडमास्टर’ हैं और न ही ‘रिमोट कंट्रोल’। हेडमास्टर को किसी स्कूल में होना चाहिए जबकि प्रजातंत्र में सरकार या प्रशासन को कभी भी रिमोट कंट्रोल से संचालित नहीं किया जा सकता। रिमोट कंट्रोल वहां काम करता है, जहां प्रजातंत्र नहीं है। जैसे, रूस, जहां व्लादिमिर पुतिन साल 2036 तक राष्ट्रपति रहेंगे।’

देवेंद्र फडणवीस पर निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए पवार ने कहा कि वह चुनाव से पहले सत्ता में लौटने का दावा करते रहे लेकिन जनता नेताओं के ऐसे बयानों को ‘एरोगेंस’ के रूप में देख सकती है और उन्हें सबक सिखा सकती है, इसलिए राजनेताओं को जनता को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। पवार ने कहा कि बीजेपी नीत सरकार ने हमेशा अपने साझीदार शिवसेना को हाशिये पर रखा।

पवार ने दावा किया कि बीजेपी को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में 105 सीटें शिवसेना की वजह से मिलीं। अगर सेना न होती तो बीजेपी को केवल 40-50 सीटों पर ही जीत मिलती। शरद पवार ने इस दौरान केंद्र सरकार पर भी महाराष्ट्र सरकार को सहयोग न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लॉकडाउन ने कोरोना की भयावहता को नियंत्रित रखता, नहीं तो यहां भी हालात न्यू यॉर्क जैसे हो सकते थे, जहां हर दिन हजारों लोगों की कोरोना से मौत हो रही है।

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