हैप्पी हार्मोन्स की वजह से अच्छा रहता है मूड, जानिए क्या है डोपामाइन और सेरोटोनिन के बीच अंतर | health – News in Hindi

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आदमी कभी बहुत खुश होता है, तो कभी एकदम से दुखी महसूस करने लगता है. उसका मूड बदलता रहता है. ये बदलाव हार्मोन के कारण होते हैं. दो हार्मोन डोपामाइन और सेरोटोनिन हैप्पी हार्मोन, जिनके कारण आदमी के मूड और भावनाओं में बदलाव होता है. मूड खराब होने और अवसाद जैसी कुछ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों में भी उनका महत्व है. ये दो न्यूरोट्रांसमीटर हैं जो शरीर के कई कार्यों में हिस्सा लेते हैं, जिसमें नींद, याद्दाश्त, मेटाबॉलिज्म और भावनाएं शामिल हैं.

ये दो हार्मोन शरीर में संतुलन में होने चाहिए. ऐसा न होने पर असंतुलन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा करता है. आमतौर पर इन दोनों खुश करने वाले हार्मोन के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन उनके बीच सटीक अंतर जानना जरूरी है.

डोपामाइन

डोपामाइन न्यूरॉन्स रिलीज करता है और वे उन न्यूरॉन्स में सिग्नल्स ले जाते हैं. इसका इस्तेमाल दो केमिकल नॉरपेनेफ्रिन और एपिनेफ्रीन बनाने के लिए किया जाता है. डोपामाइन प्रेरणा, इच्छा, लालसा आदि महसूस करने के लिए भी एक प्रमुख भूमिका निभाता है. इस हार्मोन से कुछ शारीरिक कार्य भी मैनेज होते हैं जिसमें मूड, नींद, सीखने की ललक, सतर्कता, रक्त प्रवाह, पेशाब और किसी तरह का मूवमेंट शामिल हैं.सेरोटोनिन

यह एक और न्यूरोट्रांसमीटर है जिसका इस्तेमाल मस्तिष्क द्वारा शरीर के अन्य भागों में सिग्नल भेजने के लिए किया जाता है. यह हार्मोन ज्यादातर एंटरोक्रोमफिन कोशिकाओं में पाया जाता है, जहां यह पाचन तंत्र को सुधारता है और नियंत्रित करता है. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अनुराग शाही का कहना है कि पाचन के अलावा, सेरोटोनिन कुछ अन्य शारीरिक कार्यों में शामिल है, जैसे नींद-जागने का चक्र, मूड और इमोशन, मेटाबॉलिज्म, भूख, एकाग्रता, अनुभूति, हार्मोनल गतिविधि, रक्त का जमना आदि.

क्या अंतर है दोनों के बीच

इन दो न्यूरोट्रांसमीटर का इस्तेमाल शरीर के विभिन्न हिस्सों में और भावनात्मक रूप से अच्छा महसूस कराने में सिग्नल भेजने के लिए किया जाता है, लेकिन उनके बीच कुछ अंतर हैं. डोपामाइन शरीर के मूवमेंट्स और को-ऑर्डिनेशन को नियंत्रित करने वाले सिग्नल्स को स्थानांतरित करता है और यह मस्तिष्क के आनंद देने वाले और रिवॉर्ड सेक्शन में भी काम करता है. डोपामाइन के स्तर में बढ़ोतरी ड्रग्स लेने और जुए में उलझने का कारण भी हो सकता है. डोपामाइन के स्तर में अचानक वृद्धि नशे की लत हो सकती है.

myUpchar से जुड़े डॉ. आयुष पांडे का कहना है कि सेरोटोनिन मूड और भावनाओं को विनियमित करने के लिए भी महत्वपूर्ण है, लेकिन यह मुख्य रूप से पाचन तंत्र को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें आंत की गतिशीलता, मेटाबॉलिज्म, भूख आदि शामिल हैं.

दोनों के बीच ये है रिश्ता

न्यूरोट्रांसमीटर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते हैं और यह इन दो हैप्पी हार्मोन्स में भी लागू होता है. वे शरीर के कार्यों के लिए एक-दूसरे से इंटरेक्ट करते हैं और प्रभावित करते हैं. तो, उनमें से एक का निम्न स्तर दूसरे को और उसके कार्य को प्रभावित करता है. उदाहरण के लिए, सेरोटोनिन का निम्न स्तर डोपामाइन को प्रभावित करता है और इसके स्तर को बढ़ाता है. चूंकि डोपामाइन मस्तिष्क में रिवॉर्ड देने वाली प्रणाली को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका उच्च स्तर लोगों को आवेगपूर्ण व्यवहार करता है. सेरोटोनिन आवेगी व्यवहार का कारण बनता है और डोपामाइन आवेग को रोकता है. वे भूख पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं. सेरोटोनिन भूख को दबाता है और डोपामाइन का निम्न स्तर भूख बढ़ा सकता है.

डोपामाइन या सेरोटोनिन का बहुत अधिक या बहुत कम स्तर होना हमारे लिए हानिकारक है. उनके बीच एक स्वस्थ संतुलन होना चाहिए.

डोपामाइन के लिए फूड्स

    • पनीर, दूध, दही जैसे डेयरी खाद्य पदार्थ
    • चिकन की तरह असंसाधित मांस
    • अंडे
    • ओमेगा-3 से समृद्ध मछली जैसे सैल्मन
    • फल और सब्जी
    • डार्क चॉकलेट
    • नट जैसे बादाम, अखरोट आदि

सेरोटोनिन के लिए फूड्स

    • अंडे
    • पनीर
    • पाइनेपल
    • टोफू
    • दाने और बीज

 

 

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए  FIRST EYE जिम्मेदार नही होगा।

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