कोरोना के इलाज के लिए ‘फैबीफ्लू’ को इजाजत, जानें कितनी डोज लेनी होगी | health – News in Hindi

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Covid 19 Drug: 19 जून 2020 तक, फैविपिराविर (Favipiravir) भारत में कोविड-19 संक्रमण के ओरल इलाज में इस्तेमाल होने वाली पहली पुनर्विकसित दवा बन गयी है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने मुंबई स्थित ग्लेनमार्क फार्मासूटिकल्स को इजाजत दे दी है कि वे फैविपिराविर दवा का टैबलेट फॉर्म में उत्पादन और मार्केटिंग कर सकते हैं. इस दवा को फैबिफ्लू (Fabiflu) नाम से बेचा जाएगा और इसे उन सभी मरीजों को दिया जा सकेगा, जिन्हें कोविड-19 (Covid 19) का हल्का या थोड़ा अधिक कोरोना इंफेक्शन हुआ हो.

ग्लेनमार्क ने फैविपिराविर के क्लीनिकल ट्रायल्स मई 2020 में किए थे जिसमें ये दवा कोविड-19 के 150 वैसे मरीजों को दी गई जिन्हें हल्के से मध्यम श्रेणी का इंफेक्शन हुआ था. मरीजों के इलाज में करीब 14 दिन तक दवा का इस्तेमाल किया गया लेकिन यह स्टडी करीब एक महीने तक चली जिसमें यह निष्कर्ष निकल कर आया कि फैविपिराविर ने मरीजों में लगभग 88 प्रतिशत नैदानिक ​​सुधार (Clinical improvement) दिखाया. हालांकि स्टडी को अब तक विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा किए गए (पियर रिव्यूड) किसी भी जर्नल में प्रकाशित नहीं किया गया है.

फैविपिराविर उन 25 पुनर्विकसित दवाओं की दौड़ में सबसे आगे थी जिसे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था. लिहाजा इस दवा को लेकर कुछ कॉमन सवाल जो ज्यादातर लोगों के मन में हैं उसका जवाब हम आपको यहां दे रहे हैं.

1. फैविपिराविर दवा का इस्तेमाल मूल रूप से किस बीमारी के लिए किया गया था?फैविपिराविर एक एंटीवायरल दवा है जिसे जापान में इन्फ्लूएंजा के इलाज के लिए साल 2014 में लाइसेंस दिया गया था. फ्लू के लिए दवा की अनुशंसित खुराक पहले दिन 1600mg है और उसके बाद दूसरे से पांचवें दिन तक 600mg. हालांकि कोविड-19 के इलाज के लिए ग्लेनमार्क की स्टडी का सुझाव है कि पहले दिन, दिन में दो बार इस दवा का 1800mg का डोज दिया जाए और उसके बाद अगले 14 दिन तक 800mg रोजाना दो बार.

2. कैसे काम करती है फैविपिराविर दवा?
चूंकि यह एक व्यापक पहुंच वाली एंटीवायरल दवा है इसलिए फैविपिराविर ने अन्य कई तरह के वायरस जिनकी वजह से डेंगू बुखार, जीका, इबोला, गैस्ट्रोएंट्राइटिस और डायरिया जैसी बीमारियां होती हैं, पर महत्वपूर्ण असर दिखाया है. कोई भी वायरस या तो DNA बेस्ड होता है या फिर RNA बेस्ड और फैविपिराविर RNA बेस्ड वायरस के खिलाफ बेहद असरदार है. सार्स-सीओवी-2 भी RNA बेस्ड वायरस है और यही वजह है कि इस बात का अनुमान लगाया गया कि फैविपिराविर कोविड-19 बीमारी के लिए जिम्मेदार वायरस के खिलाफ असरदार साबित हो सकता है. फैविपिराविर RNA पॉलिमर्स को टार्गेट करता है. यह वह एन्जाइम है जो इंसान के शरीर में वायरल RNA को तेजी से बढ़ने में मदद करता है. फैविपिराविर नाम की यह दवा वायरस के RNA का रूप बदल देता है जिससे वायरल लोड कम हो जाता है और फेफड़ों की स्थिति में सुधार होने लगता है.

3. क्या बाकी एंटीवायरल की तरह फैविपिराविर भी इंसान के इम्यून सिस्टम को कमजोर बना देती है?

वैसे तो अब तक इस बात के कोई सबूत मौजूद नहीं हैं कि फैविपिराविर किसी भी तरह से इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है लेकिन इस बारे में ज्यादा जानकारी तभी मिल पाएगी जब ग्लेनमार्क की यह स्टडी प्रकाशित हो जाएगी. हालांकि एंटीवायरल दवाइयां आमतौर पर इंसान की प्रतिरक्षा को दबाने वाली प्रतिक्रिया देती हैं. यही वजह है कि फैविपिराविर सिर्फ प्रिस्क्रिप्शन के साथ ही दी जाने वाली दवा है क्योंकि इस दवा के साथ-साथ मरीज के इम्यून सिस्टम को व्यवस्थित करने और बेहतर तरीके से काम करने के लिए भी कुछ और दवाएं भी दी जाती हैं.

4. जिन मरीजों को पहले से कोई बीमारी हो क्या वे फैविपिराविर का इस्तेमाल कर सकते हैं?
ग्लेनमार्क कंपनी का दावा है कि फैविपिराविर दवा की अनुशंसित डोज पहले से डायबिटीज या हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को भी दी जा सकती है. हालांकि कंपनी ने साफतौर पर यह भी कहा है कि वैसे लोग जो किडनी या फिर लिवर की किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हों उन्हें फैविपिराविर दवा नहीं दी जा सकती.

5. क्या गर्भवती महिलाओं के लिए फैविपिराविर दवा सुरक्षित है?
गर्भवती महिलाएं जिन्हें कोविड-19 का हल्का संक्रमण हो या फिर मध्यम श्रेणी का उन्हें भी फैविपिराविर दवा नहीं दी जा सकती. ऐसा इसलिए क्योंकि इस दवा के सेवन से गर्भ में पल रहे भ्रूण को गंभीर विकृतियां होने का खतरा रहता है. ग्लेनमार्क कंपनी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि फैविपिराविर दवा किसी भी हाल में गर्भवती महिला या बच्चे को अपना दूध पिलाने वाली महिला को नहीं दी जानी चाहिए.

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