World Plastic Surgery Day: खूबसूरती बढ़ाने के लिए दुनिया में सबसे फेमस हैं ये कॉस्मेटिक सर्जरी, जानें रिस्क भी | fashion – News in Hindi

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वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे (World Plastic Surgery Day): आज 15 जुलाई को वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे है. समय के साथ प्लास्टिक सर्जरी और कॉस्मेटिक सर्जरी का चलन बढ़ा है. इन्फेक्शन, कैंसर, एक्सिडेंट, जलने या अन्य किसी कारण से शरीर के अंगों को हुए नुकसान पर प्लास्टिक सर्जरी की जाती है. वहीं कॉस्मेटिक सर्जरी का उद्देश्य अंगों की सुंदरता को निखारना होता है. अमेरिकन सोसायटी ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स की  2017 की रिपोर्ट के अनुसार, उस साल अमेरिका में लोगों ने कॉस्मेटिक सर्जरी पर 6.5 बिलियन डॉलर खर्च किए. अधिकांश मामलों में महिलाएं अपने स्तन, नाक और पलकों की सर्जरी करवाती हैं. अब भारत में भी यह चलन बढ़ता जा रहा है। 15 जुलाई प्लास्टिक सर्जरी डे के मौके पर जानिए कौन-कौन सी प्लास्टिक या कॉस्मेटिक सर्जरी बहुत लोकप्रिय हैं और इस पूरी प्रक्रिया में किस तरह का जोखिम रहता है.

6 प्रचलित कॉस्मेटिक सर्जरी

लिपोसक्शन : इसके जरिए जांघ, कमर, पेट, हाथ, पैर की सर्जरी की जाती है. इसमें संबंधित स्थान से चर्बी निकालकर उसे सही आकार देने की कोशिश होती है. इसका सबसे बड़ा खतरा होता है सूजन. सर्जरी के बाद सूजन कई महीनों तक बनी रह सकती है और त्वचा लटक भी सकती है.ब्रेस्ट ऑग्मेन्टेशन : यानी स्तन को आकार देना. हाल के वर्षों में यह सर्जरी करवाने वाली महिलाओँ की संख्या तेजी से बढ़ी है. अकेले अमेरिका में हर साल 3 लाख ब्रेस्ट सर्जरी होती हैं. स्तन के आकार से ही जुड़ी ब्रेस्ट रिडक्शन और ब्रेस्ट लिफ्ट सर्जरी की जाती हैं. इन सर्जरी के एक या दो हफ्तों में सब कुछ सामान्य हो जाता है. सबसे बड़ा जोखिम यह है कि सर्जरी के बाद स्तन में गांठ पड़ सकती है.

ब्लेफारोप्लास्टी : यह सर्जरी आईब्रो यानी पलकों पर की जाती है. महिलाएं अपनी लटकी हुईं आईब्रो को शेप में लाने के लिए सर्जरी करवाती हैं. आंख के करीब का मामला होने के कारण यहां जोखिम अधिक रहता है. सर्जरी के बाद कुछ समय तक धूप, धूल और धुएं से बचने की सलाह दी जाती है. इसके कारण बार-बार आंख रगड़ने से इन्फेक्शन का खतरा रहता है. आमतौर पर 10 से 14 दिन में सबकुछ ठीक हो जाता है.

एब्डोमिनोप्लास्टी : पेट को सही आकार में लाने के लिए यह सर्जरी की जाती है.अतिरिक्त चर्बी और त्वचा को निकालकर शेप देन की कोशिश की जाती है. गर्भावस्था के बाद पेट को सही आकार में लाने के लिए महिलाएं यह सर्जरी करवाती . सर्जरी उन लोगों पर सफल होती हैं, जिनके पेट में ज्यादा चर्बी नहीं है, लेकिन त्वचा लटक रही है. सर्जरी के दो से तीन हफ्तों में मरीज सामान्य हो जाता है. दवाओं के इन्फेक्शन का खतरा रहता है.

राइनोप्लास्टी : नाक की खूबसूरती के लिए यह सर्जरी की जाती है. नाक चपटी या सामान्य से बड़ी होने पर लोग इस सर्जरी का सहारा लेते हैं. महिलाएं सुंदर दिखने के लिए नाक तीखी करवाती हैं. सर्जरी कुछ ही घंटों में हो जाती है और एक से दो दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है. इसमें सूजन का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. इसके अलावा इन्फेक्शन के कारण त्वचा का रंग भी बदल सकता है.

रिटिडेक्टॉमी : बढ़ती उम्र की झुर्रियां दूर करने के लिए यह कॉस्मेटिक सर्जरी की जाती है. त्वचा में कसावट लाकर युवा दिखाने की कोशिश होती है. मरीज को सामान्य स्थिति में लाने में कई हफ्ते लग सकते हैं. त्वचा पर सूजन और इन्फेक्शन सबसे बड़ा जोखिम होता है. इसी तरह फोरहेड लिफ्ट भी कॉस्मेटिक सर्जरी का एक रूप है, जिसमें माथे की झुर्रियों को दूर किया जाता है.

कॉस्मेटिक सर्जरी में होते हैं ये जोखिम

कॉस्टमेटिक सर्जरी के फायदे हैं तो जोखिम भी हैं. कई बार मन-मुताबिक परिणाम नहीं मिल पाता है. खूब दवाएं खाने से उनका रिएक्शन होता है. मांसपेशियों को  नुकसान पहुंचता है. हो सकता है कि सर्जरी के निशान जीवनभर बने रहें. सर्जरी के बाद ब्रेस्ट में हमेशा दर्द बने रहने की आशंका रहती है. यदि नौसीखिया सर्जन है तो ज्यादा खून बहने का डर रहता है.

कॉस्टमेटिक सर्जरी हमेशा नाकाम नहीं रहती है या हमेशा ही इसके नुकसान नहीं होते हैं. अमेरिका में प्रकाशित प्लास्टिक एंड रिकंट्रक्टिव सर्जरी मेडिकल जर्नल के अनुसार, 25,000 मामलों में से महज एक फीसदी में परेशानी आती है. इसलिए सबसे जरूरी है योग्य सर्जन का चयन  करना.

कॉस्मेटिक सर्जरी के एक फीसदी केस में सर्जरी वाले स्थान पर खून की थैली बन जाती है. इसे हेमाटोमा करते हैं. इसमें लगातार दर्द बना रहता है. एक और तरह का जोखिम होता है सीरोमा. सीरोमा की स्थिति तब होती है जब सीरम या सर्जरी के लिए इस्तेमाल किया गया तरल पदार्थ, त्वचा की सतह के नीचे आ जाता है. परिणामस्वरूप सूजन और दर्द बना रहता है. यह एक आम जटिलता है जो 15 से 30 फीसदी मरीजों में देखने को मिलती है. सर्जरी के बाद कई मरीजों में ऊंघने की समस्या आ जाती है. नर्स डैमेज के कारण ऐसा होता है. इसके अलावा खून का थक्का जमना (खासतौर पर पैरों में) भी एक जटिलता है. इसे डॉक्टरी भाषा में डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहा जाता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, प्लास्टिक सर्जरी क्या होती है, कैसे होती है पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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