योग के लिए सबसे जरूरी स्ट्रेचिंग, इन आसनों की मदद से बॉडी में लाएं लचीलापन | health – News in Hindi

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(सविता यादव)

कोरोना (Corona) महामारी के समय घर पर बैठे लोगों के लिए शरीर को फिट (Fit) और हेल्दी (Healthy) रखने के लिए योग (Yoga) का अभ्यास करना बहुत जरूरी है. दिनभर में कम से कम एक घंटा योग पर जरूर दें. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. वर्क फ्रॉम होम करने वालों को तो खासतौर पर इन अभ्यासों को करना चाहिए. अभ्यास करते हुए ही यह एक आदत के रूप में उभर कर आएगा. योग में सबसे जरूरी है स्ट्रेचिंग (खिंचाव). आइए जानते हैं स्ट्रेचिंग के कुछ खास योगासनों के बारे में.

भद्रासन
‘भद्र’ का मतलब होता है ‘अनुकूल’ या ‘सुन्दर’. यह आसन लम्बे समय तक ध्यान / मेडीटेसन में बैठे रहने के लिए अनुकूल है और इससे शरीर निरोग और सुंदर रहने के कारण इसे भद्रासन कहा जाता है. भद्रासन कई प्रकार से किया जाता है.भद्रासन करने का तरीका

सबसे पहले एक समान और समतल जगह पर दरी या चटाई या योग मैट बिछा दें.
अब वज्रासन में बैठ जाएं.
अब घुटनों को जितना संभव हो उतना दूर रखें.
पैर के पंजो को इस तरह रखे की पैरों की उंगलियों का संपर्क जमीन से रहे और नितम्ब (हिप्स) को पंजो के बीच जमीन पर रखें.
दोनों हाथों की हथेलियों को नीचे की ओर घुटनों पर रखें.
शरीर को स्थिर और सीधा रखें. कमर-गर्दन सीधी रहनी चाहिए.

अब नाक के अग्र (फ्रंट ) पर दृष्टि केंद्रित करें.

भद्रासन के लाभ
मेडिटेशन में बैठने के लिए एक उपयोगी आसन है.
एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और दिमाग तेज होता है.
मन की चंचलता कम होती है.
प्रजनन शक्ति बढ़ाता है.
पाचन शक्ति ठीक रहती है.
पैर के स्नायु मजबूत होते हैं.
सिरदर्द, कमरदर्द, आंखों की कमजोरी, अनिद्रा और हिचकी जैसी समस्या में राहत मिलती है.

ताड़ासन
ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.

ताड़ासन करने का तरीका
इसके लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें.
अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें.
खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें.
इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें.
फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं.
इस तरह से एक चक्र पूरा होता है.

ताड़ासन के फायदे
वजन कम करता है
हाइट बढ़ाता है
पीठ के दर्द में लाभदायक
मांसपेशियों के दर्द में आराम
घुटने और पैरों के दर्द में राहत

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.

पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है

उष्ट्रासन
उष्ट्रासन में शरीर ऊंट की आकृति बनाता है. जैसे ऊंट रेगिस्तान के मुश्किल हालातों में भी आसानी से रह सकता है, अगर इस आसन का अभ्यास नियमित तौर पर किया जाए तो ये शरीर से हर शारीरिक और मानसिक परेशानी को दूर करके स्वस्थ जीवन देने में मदद करता है.

उष्ट्रासन के फायदे
पाचन सुधारने में मदद करता है
सीने और पेट के निचले हिस्से से अतिरिक्त चर्बी कम होती है
कमर और कंधों को मजबूत बनाता है
कमर के निचले हिस्से में दर्द कम करने में मदद करता है
इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है.
शरीर का पोश्चर सुधारने में भी ये आसन मदद करता है.

भुजंगासन
भुजंगासन, सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से 8वां है। भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है। इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है। ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है। जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है।

भुजंगासन के फायदे
रीढ़ की हड्डी में मजबूती और लचीलापन.
पेट के निचले हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ती है.
पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ती है.
मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिलती है.
कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है.
फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है.
डिप्रेशन में भी इससे फायदा मिलता है.
अस्थमा में भी राहत.



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