यूपी विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने लाल जी टंडन को दी श्रद्धांजलि

0
122
हृदय नारायण दीक्षित के साथ लाल जी टंडन
.

लखनऊ। मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन लंबी बीमारी के चलते 85 वर्ष की उम्र में  मंगलवार सुबह 5.30 बजे निधन हो गया। आपको बता दें कि लालजी टंडन पिछले काफी समय से सांस लेने में तकलीफ और बुखार के चलते लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। सोमवार की शाम अचानक फिर से तबियत बिगड़ने पर उन्हें क्रिटिकल केयर वेंटिलेटर पर रखा गया। इलाज के दौरान उनकी तबियत में सुधार भी हुआ था। लेकिन मंगलवार तड़के सुबह उनका निधन हो गया। लालजी टंडन के निधन की जानकारी उनके बेटे अशुतोष टंडन ने ट्वीट कर दी थी। उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल, श्री लालजी टण्डन के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्हेंने कहा कि “लालजी टण्डन मेरे संरक्षक थे। उनका मेरे ऊपर सदैव स्नेह भाव रहा है”। हृदय नारायण दीक्षित ने लालजी टण्डन के निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि लालजी टण्डन एक जनप्रिय नेता थे।

स्व. लाल जी टंडन

पति-पत्नी के विवाद में जीजा की जान लेने की कोशिश, सालों ने घोंपा चाकू | moradabad – News in Hindi

संसदीय प्रतिभा के धनी थे। उनका संसदीय कौशल विधान सभा व लोकसभा में सदैव याद किया जायेगा। आपको बता दें कि लाल जी टंडन ने अपनी राजनैतिक जीवन की शुरूआत जनसंघ के एक साधारण कार्यकर्ता से शुरु की थी। जनसंघ को लखनऊ में लोकप्रिय बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे पं0 दीनदयाल उपाध्याय के निकट थे। डा0 राममनोहर लोहिया सहित वाम विचार के नेताओं से भी उनकी मित्रता थी। 1996 के मध्याविधि चुनाव में प्रथम बार, फरवरी 2002 में दूसरी बार तथा अप्रैल-मई 2007 के सामान्य निर्वाचन में तीसरी बार लगातार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर ही वे विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए। 1978 से 1984 तक तथा 1990 से अक्टूबर 1996 तक भारतीय जनता पार्टी से विधान परिषद के सदस्य भी रहे। वर्ष 1991 में प्रथम बार कल्याण सिंह के मंत्रिमण्डल में वे ऊर्जा मंत्री के रूप में सम्मिलित हुए। तदोपरांत मायावती, रामप्रकाश एवं राजनाथ सिंह के मंत्रिमण्डल में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री के रूप में रहे। लाल जी टंडन ने मई 2007 में नेता विपक्ष के रूप में अपना दायित्व निभाया। वह लखनऊ में अटल बिहारी वाजपई के बाद सांसद भीवचुने गये। इसके बाद बिहार एवं मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन किया।

तीन कोरोना वैक्सीन दौड़ में सबसे आगे, कौन सी वैक्सीन कब हो सकती है लॉंच? | health – News in Hindi

लाल जी टंडन के निधन से पूरे राजनीतिक क्षेत्र को काफी सदमा पहुंचा है। उनके कार्यकर्ताओं के प्रति प्यार, स्नेह, एवं सदैव सहयोगी स्वभाव मस्तिष्क पटल से भुलाये नहीं भुलेगी। हृदय नारायण दीक्षित ने लाल जी टण्डन के बड़े पुत्र श्री आशुतोष टण्डन, मा. मंत्री नगर विकास सहित उनके अन्य परिवार के सदस्यों को इस संकट की घड़ी में सांत्वना प्रदान करते हुये दिवंगत आत्मा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

 

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here