मल्टीटास्किंग से कम होती है प्रोडक्टिविटी, ऑफिस में पैदा होता है तनाव का माहौल | health – News in Hindi

0
53
.
जिन लोगों के अंदर मल्टीटास्किंग क्वॉलिटी होती है, उनकी कंपनी और सामाज दोनों जगहों पर तारीफ होती है. कंपनियां किसी भी इंप्लॉई को रखने से पहले देखती हैं कि उसमें मल्टीटास्किंग क्वालिटी है या नहीं. कंपनियों को लगता है कि मल्टीटास्कर आदमी प्रोडक्टिविटी को सुधार सकता है या उसे बढ़ा सकता है. लेकिन हालिया शोध में पता चला है कि मल्टीटास्किंग मैन प्रोडक्टिविटी में सुधार करने की बजाए इसे  बिगा देता है. एक ही बार में कई कार्यों को करने से वास्तव में तनाव, उदासी और भय हो सकता है, जो आखिरकार काम में तनावपूर्ण वातावरण पैदा करता है. यदि कोई ऑफिस में काम करता है, तो उसे एक ही बार में कई चीजों को संभालने की जरूरत हो सकती है, जैसे कि रिपोर्ट लिखते समय ईमेल का जवाब देना आदि, लेकिन उन निरंतर रुकावटों से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज बताते हैं कि आप जीवन में भावनात्मक तनाव महसूस करते हैं तो यह एक स्वस्थ संकेत नहीं है. बहुत अधिक तनाव मानसिक समस्याओं का मूल कारण हो सकता है. इससे शारीरिक बीमारियां जन्म लेती हैं.

ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटेशनल फिजियोलॉजी लेबोरेटरी के अध्ययन के अनुसार, इस तरह की तनाव से भरी और नाखुश होने वाली भावनाओं का ऑफिस के माहौल पर भी असर पड़ता है और यह नकारात्मक नतीजे दे सकता है. कम्प्यूटिंग सिस्टम में ह्यूमन फैक्टर पर 2020 सीएचआई कॉन्फ्रेंस में निष्कर्ष सामने आए.

अध्ययन में पाया गया कि जो व्यक्ति मल्टीटास्किंग में लगे थे, वे उन लोगों की तुलना में काफी दुखी दिखाई दिए जो एक समय पर एक काम कर रहे थे. मल्टीटास्किंग एक मानसिक भार देता है जो कि बहुत ज्यादा तनाव और उदासी से जुड़ा होता है, लेकिन इसके साथ-साथ भय के लिए भी जगह बनाती है. ये नकारात्मक भावनाएं कई लोगों के लिए पूरे वर्किंग-डे में जारी रह सकती है.ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के एक शोध दल का दावा है कि लोग इसलिए मल्टीटास्क नहीं करते क्योंकि वे इसमें अच्छे हैं, बल्कि इसलिए कि यह उन्हें अच्छा महसूस कराता है. यही कारण है कि मल्टीटास्किंग इतना लोकप्रिय है, लेकिन यह अनप्रोडक्टिव है. यूनिवर्सिटी के अनुसार, यह एक मिथक है कि मल्टीटास्किंग लोगों को अधिक प्रोडक्टिव बनाता है. वे वास्तव में मल्टीटास्किंग से मिलने वाली सकारात्मक भावनाओं की गलत व्याख्या कर रहे हैं.

प्रोडक्टिविटी को 40%  हो जाती है कम
मल्टीटास्किंग प्रोडक्टिविटी को 40 प्रतिशत कम कर देता है. जब मल्टीटास्क करते हैं, तो अपने मस्तिष्क को अपना ध्यान विभाजित करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन यह ऐसा नहीं कर सकता. मस्तिष्क एक साथ कई कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम नहीं है. मल्टीटास्किंग करते समय मस्तिष्क कार्यों के बीच में आगे-पीछे कूदता है, एक समय में थोड़ा-थोड़ा ध्यान केंद्रित करता है. इस लगातार रुकावट से मस्तिष्क को नुकसान हो सकता है. मल्टीटास्किंग के बजाय, शोधकर्ताओं ने एक समय में एक ऐसी जगह पर काम करने का सुझाव दिया, जहां आप ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.

myUpchar से जुड़े ऐम्स के डॉ. उमर अफरोज के अनुसार, जो लोग मल्टीटास्किंग कर रहे हैं, उन्हें अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए. व्यायाम करना चाहिए, परिवार के साथ वक्त गुजारना चाहिए, शराब सिगरेट से दूर करना चाहिए और बीच-बीच में अवकाश लेते रहना चाहिए.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, तनाव के लक्षण, कारण, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें।

न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



Source link

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here