9वीं से 12वीं तक 30 फीसदी कोर्स कम, UP बोर्ड के फैसले पर अब सियासी बखेड़ा | allahabad – News in Hindi

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 9वीं से 12वीं तक 30 फीसदी कोर्स कम, UP बोर्ड के फैसले पर अब सियासी बखेड़ा

कांग्रेस नेताओं ने बोर्ड के फैसले को इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताया है.

कांग्रेस (Congress) नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने यूपी बोर्ड के सचिव दिव्य कांत शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर अपना पुरजोर विरोध जताया है. कांग्रेसी नेताओं ने बीजेपी (BJP) सरकार पर देश की आजादी में कांग्रेस के योगदान को खत्म करने का आरोप लगाया है.

प्रयागराज. कोरोना संक्रमण (COVID-19) को देखते हुए यूपी बोर्ड (UP Board) ने 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में 30 फीसदी तक की कटौती कर दी है. लेकिन यूपी बोर्ड के इस फैसले को लेकर सियासी बखेड़ा भी खड़ा हो गया है. दरअसल, 12वीं के पाठ्यक्रम में नागरिक शास्त्र की पुस्तक से कांग्रेस का इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और आज़ाद भारत में कांग्रेस की भूमिका से जुड़े अध्याय को हटा दिया गया है. 12वीं के पाठ्यक्रम से कांग्रेस (Congress) के इतिहास (History) के अंश को हटाए जाने को लेकर ही सियासी तूफान खड़ा हो गया है. इस मामले में कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने यूपी बोर्ड के सचिव दिव्य कांत शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर अपना पुरजोर विरोध जताया है. कांग्रेसी नेताओं ने बीजेपी (BJP) सरकार पर देश की आजादी में कांग्रेस के योगदान को खत्म करने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस नेताओं ने इसे इतिहास के साथ छेड़छाड़ बताते हुए आज़ादी के महानायकों का अपमान बताया है. कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने कहा है कि कोर्स से हटाए गए अंश को दोबारा जोड़े जाने तक कांग्रेस का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहेगा. वहीं इस बारे में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह का कहना है कि बीजेपी राज में सियासी साजिश के तहत इतिहास से जानबूझकर छेड़छाड़ की जा रही है. बीजेपी के पास खुद के बारे में बताने को कुछ भी नहीं है, इस वजह से कांग्रेस की पहचान को भी ख़त्म करना चाहती है.

बीजेपी ने कही ये बात

दूसरी तरफ इतिहास की प्रोफेसर रहीं बीजेपी सांसद डॉ० रीता बहुगुणा जोशी का कहना है कि कांग्रेस आपदा के हर मौके को सियासी अवसर में बदलना चाहती है, इसलिए वह इसे बेवजह का मुद्दा बनाकर विरोध कर रही है. उनका कहना है कि कांग्रेस के बारे में ज़्यादातर लोगों को जानकारी है ही. ऐसे में उसके बारे में और ज़्यादा जानने की कोई ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा है कि पाठ्यक्रम में कटौती अस्थायी रूप से कोरोना को लेकर की गई है. इसलिए इस पर कोई विवाद सही नहीं है.ये भी पढ़ें: दिल्ली में 4 साल की बच्ची को बचाने किडनैपर्स से भिड़ गई मां, देखें VIDEO

हटाए गए ये टॉपिक

दूसरी तरफ इलाहाबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफ़ेसर और जाने माने इतिहासकार प्रो योगेश्वर तिवारी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और गलत बताया है. उनका कहना है कि इसके पीछे वजह कुछ भी हो, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए था. उन्होंने कहा है कि इतिहास केवल कांग्रेस का इतिहास नहीं है बल्कि स्वतन्त्रा आन्दोलन के इतिहास में कई अन्य संगठनों का भी योगदान है. गौरतलब है कि पाठ्यक्रम से हटाए गए अंश के तहत 12वीं नागरिक शास्त्र के कोर्स से स्वतन्त्र भारत में राजनीति खण्ड ख में अध्याय पांच से एक दल के प्रभुत्व का दौर, प्रथम तीन आम चुनाव, राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रभुत्व की प्रकृति, कांग्रेस के गठबंधीय प्रकृति अध्याय हटाए गए हैं.

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इसी क्रम में खण्ड ख के छठें अध्याय से कांग्रेस कार्यप्रणाली की चुनौतियों से लेकर नेहरू के बाद की राजनीतिक परिपाटी, गैर कांग्रेस वाद, 1967 का चुनाव, कांग्रेस का विभाजन एवं पुर्नगठन, कांग्रेस की 1971 के चुनावों में जीत से जुड़ा पूरा अध्याय ही हटा दिया गया है. इसके अतिरिक्त कोर्स से भौतिक स्रोतों के आधार पर विभाजन में 1940 का इतिहास एवं राष्ट्रीयता, सम्प्रदायवाद एवं विभाजन को भी कोर्स से हटा दिया गया है. इसके साथ ही पाठ्यक्रम से बाल संरक्षण का टॉपिक और स्वास्थ्य एवं रोग टॉपिक भी कोर्स से हटा दिए गए हैं.



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