कैंसर के मरीजों के लिए कोविड-19 जानलेवा, कैंसर केयर को लग रहा तगड़ा झटका | health – News in Hindi

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पिछले 6 महीनों में कोविड-19 महामारी ने बड़े ही नाटकीय ढंग से हम सभी के जीवन को बदल दिया है. लॉकडाउन के सख्त नियम, फेस मास्क या फेस कवर का अनिवार्य इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों ने न सिर्फ हम सभी को घरों में बंद कर दिया है, बल्कि दोस्तों, परिवारवालों और हमारे दैनिक दिनचर्या से भी दूर कर दिया है. जैसे-जैसे पूरे भारत में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या रोजाना तेजी से बढ़ रही है उसे देखते हुए सरकारी अधिकारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स का पूरा ध्यान कोविड-19 की टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेशन और मरीजों के इलाज पर केंद्रित है.

लेकिन जैसा कि मौजूदा स्थितियों को देखकर लग रहा है कि यह जानलेवा वायरस जल्द खत्म होने वाला नहीं है, डॉक्टर और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स लोगों को यही चेतावनी दे रहे हैं कि कोविड-19 बीमारी पर दिए जा रहे अत्यधिक फोकस की वजह से एक और बेहद घातक और जानलेवा बीमारी की उपेक्षा हो रही है, जो चुपचाप लाखों भारतीयों को अपनी चपेट में ले रही है और इस बीमारी से होने वाला मृत्यु दर भी काफी अधिक है – वह बीमारी है कैंसर.

हर 15 में से 1 भारतीय की कैंसर से मौत का खतराभारत में कैंसर का बहुत बड़ा संकट है और इस बीमारी के आंकड़े बेहद स्पष्ट और डराने वाले हैं. वर्ल्ड कैंसर रिपोर्ट : कैंसर रिसर्च फॉर कैंसर प्रिवेंशन के मुताबिक, हर 10 में से 1 भारतीय को अपने जीवन में कभी न कभी कैंसर होने का और हर 15 में से 1 भारतीय की कैंसर की वजह से मौत होने का खतरा है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च के मुताबिक, हर साल भारत में कैंसर के करीब 11 लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं और एक अनुमान के मुताबिक करीब साढ़े 22 लाख भारतीय पहले से ही इस बीमारी के साथ जी रहे हैं. भारत में सबसे अधिक व्याप्त 6 तरह के कैंसर हैं- ब्रेस्ट कैंसर, ओरल कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, गैस्ट्रिक कैंसर, फेफड़े का कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर.

50-60% मरीज में अडवांस स्टेज में कैंसर डायग्नोज होता है 
वैसे तो पिछले कुछ दशकों में कैंसर के इलाज में काफी उन्नति देखने को मिली है लेकिन अब भी कैंसर की रोकथाम, शुरुआत में ही समय रहते बीमारी की पहचान और जल्द से जल्द इलाज शुरू हो जाए तो मरीज के जीवित बचने की संभावना अधिक होती है. लेकिन भारत में खतरनाक ढंग से करीब 50 से 60 प्रतिशत मरीजों में बीमारी तब डायग्नोज होती है जब बीमारी स्टेज 3 या 4 में यानी अडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाती है. इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं जैसे- जागरूकता की कमी, स्क्रीनिंग प्रोग्राम की कमी, सीमित डायग्नोस्टिक और चिकित्सीय सुविधाओं की कमी खासकर देश के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में, कैंसर केयर सेंटर का शहरी इलाकों में केंद्रीकरण और कैंसर के इलाज से जुड़ा भारी वित्तीय बोझ. इस लंबी सी लिस्ट में अब एक और कारक जुड़ गया है कोविड-19.

कोविड-19 महामारी की वजह से कैंसर केयर हो रहा प्रभावित

कोविड-19 महामारी के दौरान कैंसर केयर को घातक झटका लगा है. पिछले कुछ महीनों में मीडिया रिपोर्ट्स और चिकित्सकों से मिल रही जानकारी से कैंसर रोगियों की परेशान करने वाली कहानियों के बारे में पता चला है. जिनका इलाज देशभर में लगे संपूर्ण राष्ट्रीय लॉकडाउन, राज्यों के बॉर्डर सील होने और यात्रा के दौरान आने वाली मुश्किलों के कारण बाधित हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैंसर के कई मरीज जो अपने गृह-नगर से दिल्ली और मुंबई जैसे सेंटर्स पर इलाज करवाने के लिए आए थे वे लॉकडाउन के दौरान पूरी तरह से फंस गए और खुद को असहाय पाया तो वहीं, कैंसर के कई ऐसे मरीज भी थे, जिन्हें अपनी बीमारी के बारे में हाल ही में पता चला, लेकिन वे इलाज करवाने के लिए यात्रा करने में असमर्थ रहे.

कैंसर के मरीजों को कोविड-19 का खतरा अधिक
डॉक्टर और कैंसर का इलाज करने वाले अस्पताल भी इस महामारी के समय कैंसर के मरीजों की देखभाल करने में कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. इनमें कैंसर सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन के बारे में मुश्किल फैसले लेना शामिल है, खासकर उन मरीजों के मामले में जो अपनी बढ़ती उम्र के कारण अतिसंवेदनशील हैं या फिर कई दूसरी बीमारियों जैसे- हृदय रोग, डायबिटीज, किडनी की बीमारी आदि से पीड़ित हैं. कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए अस्पतालों में बिस्तर की बढ़ती मांग और घर या अस्पताल में क्वारंटीन को लेकर उत्पन्न भ्रम की स्थिति ने भी कई तृतीयक देखभाल यानी टर्शियरी केयर अस्पतालों को दुविधा में डाल दिया है.अक्सर कोविड-19 के लिए इस्तेमाल होने वाले बेड्स, उन बेड्स की कीमत पर आ रहे हैं जो अन्यथा कैंसर रोगियों के लिए आरक्षित होते हैं.

इस वैश्विक महामारी के बीच, कैंसर के मरीज खुद भी एक मुश्किल या असंभव सी दिखने वाली दुविधा का सामना कर रहे हैं. कैंसर की बीमारी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और इलाज के कई दूसरे तरीकों की वजह से कैंसर के मरीजों का इम्यून सिस्टम बेहद कमजोर हो जाता है और ऐसे लोगों को कोविड-19 का संक्रमण और फिर मौत का खतरा भी काफी अधिक होता है. ऐसे समय में चेकअप, सर्जरी और अन्य कैंसर उपचारों को स्थगित करने का जोखिम कैंसर के मरीजों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए भी एक बड़ा खतरा है.

तुरंत डायग्नोज हो बीमारी तो जीवित रहने की संभावना अधिक
कैंसर सर्वाइवर होने के नाते मैं इस स्थिति और डर को अच्छी तरह से समझ सकती हूं. 3 साल पहले मुझे ब्रेस्ट कैंसर का दुर्लभ और बेहद आक्रामक रूप डायग्नोज हुआ था.  पूरी तरह से फिट और सक्रिय 35 वर्षीय महिला के तौर पर यह एक विनाशकारी डायग्नोसिस था, जिसने मुझे और मेरे परिवार को पूरी तरह से आश्चर्यचकित कर दिया. लेकिन उस वक्त जिस चीज ने मुझे ताकत और आत्मविश्वास दिया वह थी डायग्नोसिस की गति, इलाज की स्पष्ट रेखा और इलाज की तेज शुरुआत. डायग्नोसिस के कुछ दिनों के अदंर ही मेरी सर्जरी हुई और डॉक्टरों की बेहतरीन टीम की निगरानी में कीमोथेरेपी और रेडिएशन की शुरुआत हुई. इसमें दिल्ली के अपोलो इंद्रप्रस्थ हॉस्पिटल के डॉ रमेश सरीन मेरे सर्जन और मेरे डॉक्टरों की टीम के हेड, डॉ मनीष सिंघल, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और डॉ सपना नांगिया, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट शामिल हैं. शुरुआत से लेकर अंत तक मेरे इलाज में 9 महीने का लंबा समय लगा. लॉकडाउन के पिछले कुछ महीनों में जब मैंने अपने इस अनुभव पर विचार किया तो मेरा दिल उन कैंसर मरीजों के लिए परेशान हो उठा, जिनका इलाज इतनी बेरहमी से बाधित हुआ है और जो इस महामारी की वजह से खुद को अपरिचित जगह पर पाते हैं.

कैंसर का भी अब तक कोई इलाज नहीं है
कैंसर जैसी बीमारी की डायग्नोसिस किसी भी स्टेज में क्यों न हो वह मरीज, उसके परिवार वाले और उसकी देखरेख करने वालों के लिए जीवन बदलने वाला क्षण होता है. एक तरफ जहां हम सभी इस कोविड-19 महामारी के खत्म होने और वैक्सीन की जल्द खोज किए जाने का इंतजार कर रहे हैं, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कैंसर का भी अब तक कोई इलाज नहीं है. कैंसर से बचने का सबसे बेस्ट तरीका यही है कि आप कैंसर से खुद को बचाएं और जल्द से जल्द इलाज शुरू करें. लिहाजा यह राष्ट्रीय, राजकीय और स्थानीय स्तर की सरकारों के लिए अनिवार्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कैंसर के मरीजों को पहले की तरह तवज्जो मिले, गुणवत्तापूर्ण देखभाल और इलाज मिलना जारी रहे ताकि उन्हें जीवित रहने का सबसे अच्छा मौका मिल सके.

कोविड-19 के बीच कैंसर के मरीजों का भी सही तरीके से हो इलाज
इसी के साथ टर्शियरी और प्राइमरी कैंसर केयर सुविधा प्रदान करने वाले केंद्रों को पहले की ही तरह मरीजों का इलाज सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में जारी रखने की इजाजत मिलनी चाहिए. इसके अतिरिक्त, टर्शियरी केयर अस्पतालों के लिए भी यह अनिवार्य है कि वे एक अलग सिस्टम और प्रोटोकॉल बनाएं जहां पर कोविड-19 मरीजों का वार्ड और OPD को नियमित जांच और कैंसर के मरीजों के इलाज से अलग रखा जाए. कैंसर मरीजों और मेरे जैसे कैंसर सर्वाइवर्स के लिए बेहद जरूरी है कि वे अपने इलाज के दौरान और उसके बाद भी ऐहतियाति कदम उठाना जारी रखें जैसे- हाथों की साफ-सफाई का अभ्यास करना, मास्क पहनना, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना और साथ ही में फिट और हेल्दी रहने के लिए सभी अनिवार्य कदम उठाना. (इस आर्टिकल को माइउपचार के लिए मंदाकिनी सूरी ने लिखा है. वे नई दिल्ली में रहती और काम करती हैं. वे एक लेखिका और डेवलपमेंट प्रैक्टिशनर हैं और सोशल सेक्टर में पिछले 15 सालों से काम कर रही हैं. मंदाकिनी खुद एक कैंसर सर्वाइवर हैं और वे अपनी लेखनी के जरिए कैंसर और उसके इलाज के बारे में जागरूकता फैलाना चाहती हैं. अपने खाली समय में खाना बनाना, डांस करना और अलग-अलग जगह पर घूमना उन्हें पसंद है.) (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कैंसर के लक्षण, कारण, इलाज के बारे में पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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