बच्चों में किडनी की सेहत को नजरअंदाज न करें, इन लक्षणों को समय पर पहचानें | health – News in Hindi

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दिल, फेफड़े और लीवर की बीमारियों के उलट किडनी (Kidney) की समस्या होने पर लक्षण एकदम पूरी तरह से सामने नहीं आते, जब तक कि लगभग 80 फीसदी काम प्रभावित न हुआ हो. परेशानी यही है कि इसका डायग्नोसिस (Diagnosis) देर से किया जाता है. इसलिए माता-पिता के रूप में अपने बच्चे के स्वास्थ्य (Health) के इस पहलू के बारे में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. बच्चों में किडनी की बीमारियों के पीछे कई कारण हो सकते हैं. उनमें से कुछ में बर्थ डिफेक्ट्स, वंशानुगत रोग, संक्रमण, यूरिन ब्लॉकेज या रिफलक्स शामिल हैं. जटिलताओं से बचने के लिए माता-पिता को बीमारी के शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है.

देखें बच्चों में ये लक्षण
बच्चों में किडनी की समस्या होने पर कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन अक्सर इन संकेतों पर माता-पिता का ध्यान नहीं जाता है. इसमें पेशाब करने में दर्द, लाल/भूरे रंग का पेशाब, दिन में 4 बार से कम यूरिन पास करना, दिन में 12 बार से ज्यादा पेशाब आना, आंखों के आसपास एडिमा, विकास में गड़बड़ी या हड्डी में विकृति, अत्यधिक प्यास शामिल हैं.

ऐसे होगा डायग्नोसmyUpchar से जुड़ी एम्स की डॉ. वीके राजलक्ष्मी का कहना है कि किडनी की बीमारी को डायग्नोस करने और इसकी गंभीरता जानने के लिए कुछ जांच की जानी चाहिए. यूरिन टेस्ट प्रोटीन, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी और क्रिस्टल की उपस्थिति जैसी कई जानकारी देती है. यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन के संदेह के मामले में यूरिन कल्चर किया जाना चाहिए. यह एक ऐसा टेस्ट है, जिसमें यूरिन संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया का पता करते हैं.

क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने पर किडनी ठीक से काम नहीं करती है. अन्य ब्लड टेस्ट जैसे इलेक्ट्रोलाइट लेवल टेस्ट, हीमोग्लोबिन, ब्लड गैसेस की कभी-कभी जरूरत पड़ती है. सोनोग्राफी किडनी की बीमारी में एक बड़े काम का टेस्ट है. यह किडनी के आकार, जन्मजात विकृति जैसे सिंगल किडनी / पॉलीसिस्टिक किडनी, हाइड्रोनफ्रोसिस यानी किडनी की सूजन, यूरिनरी ट्रैक्ट में कोई भी ब्लॉक, किडनी स्टोन्स और किडनी के ट्यूमर जैसी कई जानकारी देता है.

ये है इलाज
किडनी की बीमारियों का उपचार व्यक्तिगत रोग पर निर्भर करता है. यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक्स 10-14 दिनों के लिए दिए जाते हैं. प्रेडनिसोलोन (स्टेरॉयड) का इस्तेमाल नेफ्रोटिक सिंड्रोम में किया जाता है. कुछ विकृतियों में सर्जिकल करेक्शन की जरूरत हो सकती है. वयस्कों में जब किडनी फेल हो जाती है, तो डायलिसिस किया जाता है और कभी-कभी किडनी ट्रांसप्लांटेशन ही एकमात्र इलाज होता है. बच्चों के लिए भी इसी तरह के उपचार उपलब्ध हैं. डायलिसिस दो तरह का होता है. पहला पेरिटोनियल डायलिसिस जो कि बच्चों के लिए सुविधाजनक माना जाता है और दूसरा हेमोडायलिसिस.

किडनी फेल होने के कारण शरीर में यूरिया, क्रिएटिनिन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और अतिरिक्त पानी जैसे हानिकारक तत्व जमा हो जाते हैं. इन्हें डायलिसिस द्वारा हटा दिया जाता है. डायलिसिस किडनी की बीमारी का इलाज नहीं करता है.

myUpchar के अनुसार किडनी ट्रांसप्लांटेशन में डोनर की सामान्य किडनी को रोगी की रोगग्रस्त किडनी के स्थान पर सर्जरी कर लगाया जाता है. किडनी फेल्योर का इलाज बहुत मुश्किल, दर्दनाक और साथ ही महंगा है. इसलिए इसे स्वस्थ रखने का ज्यादा प्रयास करना चाहिए. बच्चों की शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें, क्योंकि इससे किडनी सहित शरीर के कई अंग स्वस्थ रहते हैं जैसे हृदय, हड्डियां, मांसपेशियां आदि.

अधिक जानकारी के लिए देखें : अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, किडनी फेल होना क्या होता है, जानें लक्षण, बचाव और इलाज

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