Autistic Pride Day 2020: बच्चा प्रतिक्रया देर में देता है? कैसे जानें ये ऑटिज्म है या अटेंशन डेफिसिट हाइपरऐक्टिविटी डिसऑर्डर | health – News in Hindi

0
110
.
ऑटिस्टिक प्राइड डे 2020 (Autistic Pride Day 2020): दुर्भाग्यवश बच्चों में होने वाली 2 सबसे कॉमन बीमारियां हैं- अटेंशन डेफिसिट हाइपरऐक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और ऑटिज्म. एक बार के लिए देखने में भले ही दोनों बीमारियां एक जैसी लगती हों क्योंकि इन दोनों ही बीमारियों की वजह से बच्चे का ध्यान कमजोर होने लगता है, लोगों के साथ की जाने वाली बातचीत और परस्पर क्रियाएं कम होने लगती हैं और सामाजिक व्यवहार में भी कमी आने लगती है. बावजूद इसके, ये दोनों ही बीमारियां बच्चे के व्यवहार को किस तरह से प्रभावित करती हैं इस मामले में ये दोनों बीमारियां एक दूसरे से काफी अलग हैं.

इसे भी पढ़ें: Workplace Bullying: 75% लोग होते हैं वर्कप्लेस बुलिंग का शिकार, कहीं आप भी तो नहीं!

हर साल 18 जून को मनाए जाने वाले ऑटिस्टिक प्राइड डे के मौके पर व्यवहार से जुड़ी इन दोनों बीमारियों के अलग-अलग पहलूओं के बारे में हम आपको बता रहे हैं. बेहद जरूरी है कि दोनों बीमारियों के बीच यह भेद जल्द से जल्द कर लिया जाए क्योंकि इन दोनों बीमारियों का इलाज अलग तरह से होता है और इलाज जितनी जल्दी शुरू हो जाए उसका असर उतना ही ज्यादा होता है.

इसे भी पढ़ें: Adversity Quotient: आखिर क्यों IQ की तरह बच्चों का AQ मजबूत होना है बेहद जरूरी, जानें…ध्यान या चौकसी : जिन बच्चों को ADHD की समस्या होती है उनकी चीजों पर ध्यान लगाने की क्षमता कमजोर होने लगती है और इसलिए उनके लिए किसी काम पर फोकस करना फिर चाहे वह पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा काम ही क्यों न हो मुश्किल हो जाता है. ऐसे बच्चों का ध्यान (अटेंशन) बार-बार एक चीज से दूसरी चीज पर बदलता रहता है. वहीं, जिन बच्चों को ऑटिज्म की दिक्कत होती है वे देखने में लापरवाह लगते हैं क्योंकि बेहद कम चीजें हैं जिसमें उन्हें दिलचस्पी होती है. हालांकि अगर उन्हें किसी ऐसी गतिविधि में शामिल किया जाए जिसमें बच्चे की दिलचस्पी है तो वे उसमें निरंतर ध्यान और फोकस लगा पाते हैं. इस तरह के बच्चे कला, संगीत, विज्ञान या गणित जैसे क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं.

बातचीत करना : ADHD बीमारी से पीड़ित बच्चे बहुत ज्यादा बात करते हैं, एक मुद्दे से दूसरे मुद्दे पर शिफ्ट होते रहते हैं और कई बार तो दर्शकों का अपमान या अनादर भी कर देते हैं. वहीं, ऑटिज्म वाले बच्चों को अक्सर बोलने या दूसरों के साथ संपर्क साधने और मिलने-जुलने में मुश्किल होती है, हाव-भाव, संकेत और भावनाओं को समझना मुश्किल होता है और यहां तक कि वे तो दूसरों की नकल तक नहीं कर पाते. ऑटिस्टिक बच्चों की सबसे बड़ी रुकावट यही होती है कि वे रिश्ते और सामाजिक नियमों को नहीं बना पाते.

नियम कानून : क्लासरूम या इस तरह की औपचारिक जगहों पर नियम और व्यवस्था को बनाए रखना ADHD बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए काफी मुश्किल होता है। ऐसे बच्चे किसी भी ऐक्टिविटी से बड़ी जल्दी बोर हो जाते हैं और उन्हें जल्दी-जल्दी अलग-अलग ऐक्टिविटी में शामिल करने की जरूरत होती है. वहीं, ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे अपने द्वारा चुनी गई ऐक्टिविटी में इतने ज्यादा व्यस्त या ऑब्सेस रहते हैं कि उनका ध्यान किसी और गतिविधि में लगाना बेहद मुश्किल होता है.

अतिसक्रियता (हाइपरऐक्टिविटी) : ADHD से पीड़ित बच्चे हाइपरऐक्टिव या अतिक्रियाशील होते हैं. जब उन्हें किसी कमरे में रखा जाता है तो वे वहां मौजूद कई चीजों को बिना जरूरत के भी छूते रहते हैं और चुलबुलापन दिखाते हैं. वहीं, ऑटिस्टिक बच्चे अन्तर्मुखी होते हैं और इसलिए वे कमरे के किसी एक कोने में इस तरह से बैठे रहते हैं मानो वे खुद में ही खोए रहते हों.

सामाजिक रिश्ते : ऑटिस्टिक बच्चों के लिए सामाजिक रिश्तों को बनाना या उसमें शामिल होना उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी होती है. उन्हें लोगों के साथ बातचीत करने में मुश्किल आती है और परिवार के तत्कालिक सदस्यों के अलावा उनके पास बहुत कम लोग होते हैं जिनसे वे जुड़ पाते हैं या बात कर पाते हैं.वे अक्सर अकेले और एकाकी होते हैं. वहीं ADHD से पीड़ित बच्चों को लोगों के साथ संपर्क बनाने में दिक्कत नहीं होती. वे बातचीत के दौरान हावी होने या लोगों पर एकाधिकार करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें लोगों में दिलचस्पी बनाए रखने में समस्या होती है.

बच्चों का प्रदर्शन : ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को उच्च कार्यप्रणाली और कम कार्यप्रणाली वाले ऑटिज्म- दो हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है. कुछ बच्चों को बोलने में भी असमर्थता महसूस होती है. कम कार्यप्रणाली या लो-फंक्शनिंग ऑटिस्टिक बच्चे समग्र प्रदर्शन में अपने साथियों से पिछड़ जाते हैं तो वहीं उच्च कार्यप्रणाली वाले ऑटिस्टिक बच्चे खुद के द्वारा चुने गए कार्यों और गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. ADHD वाले बच्चों में बोलने से जुड़ी समस्या अधिक नहीं होती है और वे बुद्धिमान दिखाई देते हैं. हालांकि, उनकी ध्यान की कमी उनके समग्र उपलब्धि को बाधित करती है.

एक दूसरे में व्याप्त होना : ADHD और ऑटिज्म दोनों ही बीमारियों में ऐसी कई चीजें हैं जो एक दूसरे में व्याप्त यानी ओवरलैप नजर आती हैं. ADHD से पीड़ित बहुते से बच्चों में ऑटिज्म की कसौटी नजर आती है तो वहीं बहुत से ऑटिज्म पीड़ित बच्चों में ADHD की. मनोवैज्ञानिक, परीक्षण करके दोनों बीमारियों में अंतर और निदान कर सकता है. तो वहीं कुछ मामलों में, दोनों स्थितियों के बीच एक ओवरलैप हो सकता है. दोनों बीमारियों का एक दूसरे में इस तरह ओवरलैप होने के कारण कई अहम पहलू सामने आते हैं क्योंकि दोनों स्थितियों में अलग-अलग इलाज की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, व्यवहार संबंधी कई और बीमारियां भी हैं जो इन बीमारियों के साथ ओवरलैप हो सकती हैं जिससे बीमारी की डायग्नोसिस और मूल्यांकन जटिल हो जाता है.

थेरेपी या इलाज : सही ढंग से इन बीमारियों को डायग्नोज करना बेहद जरूरी है क्योंकि रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि शुरुआती हस्तक्षेप से इन बच्चों के बीच बेस्ट रिजल्ट देखने को मिलता है. दोनों ही बीमारियों के कुछ पहलुओं को दवाओं और चिकित्सा के उपयोग के साथ प्रबंधित किया जा सकता है. इस प्रकार दोनों बीमारियों के बीच अंतर को समझकर बेहतर इलाज और परिणाम हासिल किया जा सकते हैं और इन बच्चों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.

(इस आर्टिकल को माइ उपचार के लिए डॉ प्रवीण गुप्ता ने लिखा है जो गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी हैं)

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ऑटिज्म क्या है, कारण, लक्षण, इलाज के बारे में पढ़ें.

न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं।.सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



Source link

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here