संजीत यादव हत्या मामले में क्या किडनैपर्स के साथ मिली थी बहन

0
178
.

कानपुर। इस साल कानपुर का दूसरा बड़ा और चर्चित केस बना संजीत यादव का अपहरण और हत्या केस में कई खुलासे होने बाकी हैं। पुलिस लगातार मामले की जांच पड़ताल में लगी हुई है। इस हत्या के मामले ने पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। आपको बता दें कि संजीत यादव की बहन रुची ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि पुलिस कम से कम उनके भाई के शव को ही ढूंढ दे। इसी बीच शनिवार को एडीजी बीपी जोगदंड को संजीत के परिजनों और इलाके के लोगों के भारी रोष का भी सामना करना पड़ा था। संजीत के घर पहुंचे एडीजी ने जब पुलिस की भूमिका पूछी तो संजीत के पिता चमनलाल फूट-फूटकर रोए। उन्होंने बताया कि बेटे का पता नहीं लग रहा था तो वह तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता से मिलने गए थे। उन्होंने ऑफिस से दुत्कार कर भगा दिया था।

बदल सकता है हर की पौड़ी का नाम, ये नाम रख सकती है उत्तराखंड सरकार

चमनलाल ने एडीजी को रोते हुए बताया कि बीच में वह निलंबित गोविन्द नगर सीओ मनोज गुप्ता के पास गए थे। सीओ अपने ऑफिस में मौजूद थे उसके बाद उन्होंने चमनलाल को कहलवाया कि वह बर्रा थाने पहुंच रहे हैं वह भी वहीं पहुंचे। बर्रा थाने में पूर्व इंस्पेक्टर रणजीत राय, सीओ और चमनलाल बैठे। तब इंस्पेक्टर ने उनकी बेटी रुचि पर ही अपहरणकर्ताओं से मिले होने का आरोप लगा दिया था। उसके बाद इंस्पेक्टर ने अपनी डायरी खोली तो उसके पास अपहरणकर्ता का नम्बर था जो कॉल ट्रेसिंग में निकला था।

योगी सरकार ने संजीत यादव हत्याकांड में 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। इसमें आईपीएस अपर्णा गुप्ता,डीएसपी मनोज कुमार गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय, दो दारोगा राजेश और योगेंद्र प्रताप सिंह सहित छह सिपाही अवधेश, दिशु भारती, विनोद कुमार, सौरभ पांडे, मनीष और शिवप्रसाद को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड भी कर दिया है।

 

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here