प्रोटीन के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजें, इम्यूनिटी और एनर्जी दोनों बढ़ेगी | health – News in Hindi

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प्रोटीन शब्द सुनते ही हमारा दिमाग चिकन और मीट के बारे में ही सोचने लगता है. पोषण विज्ञान में, प्रोटीन के बड़े और जटिल अणु होते हैं, जिनमें एमिनो एसिड नाम की सैकड़ों छोटी-छोटी इकाइयां होती हैं जो मानव शरीर में विभिन्न कोशिकाओं की संरचना करती हैं. प्रोटीन हमारी मांसपेशियों में होता है, हड्डियों में होता है, त्वचा, बाल और लगभग शरीर के हर हिस्से में मौजूद होता है. चूंकि कुछ एमिनो एसिड ऐसे होते हैं जिनका निर्माण शरीर के अंदर नहीं हो सकता, इसलिए उन्हें अनिवार्य एमिनो एसिड कहा जाता है और खाने-पीने की चीजों के माध्यम से उन्हें प्राप्त करना पड़ता है.

प्रोटीन का महत्व क्या है?
प्रोटीन हमारे शरीर में कई तरह के कार्य करता है और साथ ही ऊर्जा प्रदान करने में भी मदद करता है- प्रत्येक ग्राम प्रोटीन के लिए 4 कैलोरी. कोशिकाओं के रखरखाव और मरम्मत में, हार्मोन के उत्पादन में, इम्यून सिस्टम की कार्य प्रणाली में, एंजाइम रिलीज करने में, हीमोग्लोबिन के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन ले जाने जैसे कामों के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है और प्रोटीन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

ऊपर बतायी गई भूमिकाओं के अलावा प्रोटीन, इम्यूनिटी क्षमता का समर्थन करने में भी मददगार माना जाता है. प्रोटीन द्वारा समर्थित इम्यून कोशिकाओं में ल्यूकोसाइट्स, साइटोकीन्स, फैगोसाइट्स ये सभी शामिल हैं, जो संक्रमण को दूर रखकर इम्यून सिस्टम को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. प्रोटीन की कमी होने पर शरीर में बार-बार संक्रमण की समस्या होती है.प्रोटीन की जरूरत किसको कितनी है यह व्यक्ति की उम्र, रोजाना वह क्या और कितना काम करता है और उसकी शारीरिक गतिविधियां कैसी हैं इस पर निर्भर करता है. बच्चे की बढ़ती हुई अवस्था में, गर्भावस्था के दौरान और रोग की स्थिति में (कुछ बीमारियों को छोड़कर), प्रोटीन की मात्रा में बढ़ोतरी करने की जरूरत होती है. औसतन, एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना शरीर के वजन के हिसाब से प्रति किलो 1 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. तो मान लीजिए कि अगर किसी व्यक्ति का वजन 60 किलो है तो उसकी प्रोटीन की जरूरत 60 ग्राम प्रति दिन होगी. भारत के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन का भी यही सुझाव है कि पुरुषों को रोजाना कम से कम 60 ग्राम और महिलाओं को रोजाना 55 ग्राम प्रोटीन का सेवन करना चाहिए. बच्चों के लिए यह 16 ग्राम से 60 ग्राम प्रतिदिन के बीच हो सकता है जो उनकी उम्र और लिंग पर निर्भर करता है.

प्रोटीन की कमी को पूरा करना
राष्ट्रीय पोषण निगरानी ब्यूरो की रिपोर्ट 2017 के अनुसार, शहर में रहने वाले भारतीयों का प्रोटीन सेवन आहार की अनुशंसित सीमा से बेहद कम था. भारत की शहरी आबादी प्रोटीन की अनुशंसित मात्रा में से केवल 89.8 प्रतिशत का ही सेवन करती है. इस अंतर को कम करने के लिए हमें अपने दैनिक आहार में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए.

भारतीय आहार की बात करें तो अगर आप शाकाहारी हैं तो आपकी डायट में प्रोटीन का आधा हिस्सा अनाज से प्राप्त होता है, लेकिन सिर्फ अनाज के सेवन से प्रोटीन की जरूरी गुणवत्ता को पूरा करना संभव नहीं है. इसलिए दो खाद्य समूहों यानी अनाज और दाल को मिलाकर खाने से आपकी डायट में प्रोटीन की गुणवत्ता में काफी सुधार हो सकता है. परंपरागत रूप से देखें तो हम भारतीय हमेशा से ही सांभर के साथ चावल या दाल के साथ रोटी खाते आ रहे हैं. इसके साथ ही भोजन में अगर कोई दुग्ध उत्पाद जैसे- लस्सी या छाछ को भी मिला लिया जाए तो इससे भारतीय भोजन में प्रोटीन की पर्याप्त गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

 इन चीजों को खा सकते हैं
प्रोटीन, प्लांट फूड यानी पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ और ऐनिमल फूड दोनों में मौजूद रहता है. मांस, अंडा, दूध, दाल, फलियां, सूखा मेवा और बीज- ये सभी खाद्य पदार्थ अच्छी मात्रा में प्रोटीन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. इसके अलावा कुछ अनाज जैसे- जौ, बाजरा और कीन्वा भी प्रोटीन के अच्छे सोर्स हैं.

हाल के सालों में प्रोटीन प्राप्त करने के लिए लोगों की दिलचस्पी पशु स्त्रोत (ऐनिमल सोर्स) की बजाए पौधे यानी प्लांट सोर्स में ज्यादा दिख रही है और इसकी वजह है इंसान और धरती दोनों की सेहत की चिंता. इस बारे में हो चुके कई अध्ययन भी इस निर्णय का समर्थन करते हैं क्योंकि उनका सुझाव है कि पौधे से मिलने वाला प्रोटीन, रेड मीट की तुलना में स्वास्थ्य के लिए अधिक फायदेमंद है.

भारत की बात करें तो यहां पर प्रोटीन के स्रोत के रूप में मांस या मीट पर लोगों की निर्भरता कम है क्योंकि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में मांस खाने की फ्रिक्वेंसी बहुत कम है. यहां आमतौर पर लोग मीट, सिर्फ वीकेंड पर खाते हैं, रोजाना नहीं. इसलिए, प्लांट बेस्ड खाद्य पदार्थ जैसे- अनाज, दालें, फलियां, नट्स, बीज और डेयरी उत्पाद ही नियमित रूप से प्रोटीन के अधिक महत्वपूर्ण स्रोत बन जाते हैं.

वैसे लोग जो कुपोषित हैं, किसी बीमारी से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, बुजुर्ग लोग जिन्हें भोजन के माध्यम से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल पा रहा है, जिन्हें भूख नहीं लगती या जिनकी प्रोटीन की जरूरत काफी अधिक है (जैसे- पेशेवर खिलाड़ी)- ऐसे लोगों के लिए प्रोटीन पाउडर उपयोगी साबित हो सकता है. हालांकि, जब जरूरत न हो तब भी सप्लिमेंट के जरिए प्रोटीन का बहुत अधिक सेवन करने पर फायदे से ज्यादा नुकसान होने का खतरा रहता है. किसी व्यक्ति के लिए प्रोटीन सप्लिमेंट की आवश्यकता है या नहीं, इस पर किसी योग्य डायटिशियन से सलाह लेना ही सबसे बेस्ट है.

और आखिर में इन बातों का रखें ध्यान
प्रोटीन हमारे शरीर के मूलभूत अंगों के निर्माण (बिल्डिंग ब्लॉक्स) के रूप में काम करता है इसलिए अपनी डेली डायट में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा शामिल करें क्योंकि प्रोटीन की कमी शरीर की संरचना और कार्य प्रणाली को प्रभावित कर सकती है. अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ ही प्रोटीन भी, इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में मदद करता है. इसलिए स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें विभिन्न खाद्य पदार्थ शामिल हों ताकि यह बात सुनिश्चित की जा सके कि आपको सिर्फ प्रोटीन ही नहीं बल्कि बाकी के अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी पर्याप्त मात्रा में मिलें.

इस आर्टिकल को माइउपचार के लिए न्यूट्रशिन और वेलनेस सलाहकार शीला कृष्णास्वामी ने लिखा है।

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, प्रोटीन के स्त्रोत, फायदे और नुकसान के बारे में पढ़ें।

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