बिहार: ‘इकोमा’ तकनीक दिलाएगी कोविड-19 से निजात, इलाज में होगी आसानी

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बिहार। कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। देश में कोरोना संक्रमितों के आंकड़े में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ संक्रमितों में लगातार इजाफा हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ एक नई चिकित्सा पद्धति `इकोमा` बिहार में कोरोना के गंभीर मरीजों का जीवन रक्षक बन लोगों को स्वस्थ होने में मददगार होगी।

बिहार में बढ़ते कोरोना संक्रमण और कोरोना पीड़ितों की गंभीर होती शारीरिक परेशानी को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना ने इस नई चिकित्सा पद्धति को अपनाने का फैसला किया है।

आपको बता दें कि बिहार में एम्स ने सबसे पहले प्लाज्मा थेरेपी के माध्यम से कोरोना पीड़ितों का इलाज शुरू किया है और इसमें सफलता भी हासिल की। लेकिन वैसे मरीज जिन्हें कोरोना के कारण सांस लेने में दिक्कत आ रही है और उन्हें वेंटिलेटर पर ले जाना मुश्किल है, उनके लिए अब ”इकोमा” तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इससे अधिक से अधिक कोरोना मरीज स्वस्थ हो सकेंगे।

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क्या है इकोमा ?

एम्स, पटना के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव कुमार के मुताबिक श्वांस की क्रिया अवरुद्ध होने पर तत्काल हार्ट और लंग्स को रेस्ट (स्थिर ) देकर शरीर में रक्त की आपूर्ति जारी रखने की प्रक्रिया को इकोमा चिकित्सा पद्धति कहते हैं। इस पद्धति से इलाज में मरीज को वेंटिलेटर पर ले जाने की जरूरत नहीं होती है।

 

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