अयोध्या: मस्जिद की जमीन पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने किया ट्रस्ट का ऐलान, जुफर फारुकी अध्यक्ष | ayodhya – News in Hindi

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लखनऊ. अयोध्या (Ayodhya) के धन्नीपुर गांव, रौनाही में मिली जमीन को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Central Waqf Board) ने ट्रस्ट (Trust) का ऐलान कर दिया है. बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी (Zufar Ahmad Faruqi) ने बताया कि इस ट्रस्ट का नाम इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (Indo Islamic Cultural Foundation) रखा गया है. इस ट्रस्ट के तहत ही जमीन पर मस्जिद और आम लोगों के लिए अन्य सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा.

ट्रस्ट में कुल 15 लोगों को जगह दी गई है, जिनमें से 9 के नाम घोषित कर दिए गए हैं. वहीं बाकी 6 लोगों के नाम की घोषणा भी जल्द की जाएगी. इस ट्रस्ट में सुन्नी बोर्ड के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी को अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं गोरखपुर के अदनान फारुख शाह उपाध्यक्ष होंगे. इनके अलावा लखनऊ के अतहर हुसैन को ट्रस्ट का सचिव बनाया गया है, वहीं  मेरठ के फैज आफताब कोषाध्यक्ष होंगे और 4 सदस्यों के नाम का ऐलान किया गया है.

ट्रस्ट के सदस्यों नाम इस प्रकार है

1- सुन्नी वक्फ बोर्ड सीईओ- फाउंडर ट्रस्टी2- जुफर अहमद फारुकी- चीफ ट्रस्टी/अध्यक्ष

3- अदनान फारुख शाह, गोरखपुर- ट्रस्टी/उपाध्यक्ष

4- अतहर हुसैन, लखनऊ- ट्रस्टी/सचिव

5- फैज आफताब, मेरठ- ट्रस्टी/कोषाध्यक्ष

6- मोहम्मद जुनैद सिद्दीकी, लखनऊ- सदस्य

7- शेखर सउद्दुज्जमान, बांदा- सदस्य

8 मोहम्मद राशिद, लखनऊ- सदस्य

9- इमरान अहमद, लखनऊ- सदस्य

Sunni Waqf Ayodhya trust

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ट्रस्ट का किया ऐलान

ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ही इसके आधिकारिक प्रवक्ता होंगे. ट्रस्ट से जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया को अतहर हुसैन ही देंगे.

यहां मिली है जमीन

बता दें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) पर फ़ैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन मस्जिद (Mosque) निर्माण के लिए दिए जाने का आदेश दिया था. जिसके बाद अब अयोध्या में मस्जिद निर्माण कराने के लिए सोहावल तहसील के रौनाही क्षेत्र के धन्नीपुर में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आधिकारिक रूप से ज़मीन आवंटित कर दी गई है. सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से जिला प्रशासन को स्वीकार पत्र भी मिल गया है. यह जमीन राम जन्मभूमि से लगभग 25 किलोमीटर दूर लखनऊ हाईवे पर स्थित है. ये इलाका एनएच-28 से सटा हुआ है. साथ ही मुस्लिम बाहुल्य क्ष्रेत्र भी है.

जमीन के पास ही शाह गदा बाबा की पुरानी मज़ार

ज़िला प्रशासन ने जिस जमीन का चयन किया था वो सरकारी जमीन है और कृषि विभाग की है. इसी के पास ही शाह गदा बाबा की पुरानी मज़ार है, जहां इलाके के लोग हर साल उर्स के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.

इनपुट: मोहम्मद शबाब



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