देश और दुनिया में कैसे और कितनी इस्तेमाल हो रही है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन | america – News in Hindi

0
61
.
ब्राज़ील (Brazil) के राष्ट्रपति बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) हाल में जब Covid-19 से रिकवर हुए तो उन्होंने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (hydroxychloroquine) दवा को न केवल श्रेय दिया बल्कि इस दवा के साथ अपनी तस्वीर भी पोस्ट की. यह दवा चर्चा और विवाद दोनों में रह चुकी है. कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के समय में यह दवा सबसे पहले इसलिए चर्चा में आई थी क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप ने इसका समर्थन कर भारत से इसके डोज़ बड़ी संख्या में चाहे थे.

खास तौर से मलेरिया और रूमैटिक रोगों में इस्तेमाल होने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) को कोविड 19 के दौर में बेहद प्रचार मिलने से इसका बाज़ार स्वाभाविक रूप से बहुत बड़ा हुआ. इस साल के अंत तक इस दवा के ग्लोबल बाज़ार में 100 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी के अनुमान हैं. भारत इस दवा का सबसे बड़ा निर्माता रहा है और अच्छा खासा एक्सपोर्टर भी. जानिए कि भारत के साथ ही दुनिया में इस दवा को लेकर क्या स्थितियां हैं.

कहां से कहां तक पहुंची कहानी? एक नज़र
इस साल की शुरूआत से कोरोना संक्रमण तेज़ी से फैलना शुरू हुआ. चीन के बाद ये दुनिया के और देशों में पहुंचा. अमेरिका में जब इस संक्रमण ने पांव फैलाए तो अमेरिकी सरकार ने भारत सरकार से HCQ सप्लाई के लिए मदद मांगी और 3 करोड़ टैबलेट सुरक्षित करवाईं. यहां से इस दवा का बाज़ार तेज़ी से फैलना शुरू हुआ.

hydroxychloroquine, hydroxychloroquine uses, hydroxychloroquine tablets, hydroxychloroquine dose, hydroxychloroquine price, what is HCQ, हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन tablet, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन क्या है

ब्राज़ीली राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो.

ये भी पढ़ें :- राफेल तो मिले लेकिन तकनीक नहीं… क्यों बड़े घाटे का सौदा है ये?

न सिर्फ भारत और अमेरिका बल्कि भारत के पड़ोसी देशों के साथ ही अफ्रीका और यूरोप में भी इसकी मांग में बढ़त दिखी. फैक्टएमआर के एक विश्लेषण में कहा गया है कि HCQ का ग्लोबल बाज़ार 2020 से 2030 के बीच 4 फीसदी CAGR से बढ़ जाएगा. ये भी कहा गया है कि इस दवा का बड़ा मार्केट एशिया पैसिफिक रहेगा और भारत व चीन के इसके सबसे बड़े निर्माता के तौर पर दिखेंगे.

कितने देशों में है इस दवा की पैठ?

ट्रंप की मेहरबानी से लोकप्रियता कमाने के बाद HCQ की मांग मार्च के महीने में तेज़ी से बढ़ी थी. इस दवा के उत्पादन के ग्लोबल बाज़ार में चूंकि भारत की हिस्सेदारी 70 फीसदी के करीब है इसलिए मार्च से मई के बीच भारत इस दवा का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा. मई के पहले हफ्ते की रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों ने 97 देशों को यह दवा सप्लाई की.

ब्राज़ील, जर्मनी के साथ ही दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देश उस लिस्ट में शुमार थे, जिन्होंने कोविड से निपटने के लिए भारत से इस दवा की मांग की थी. भारत ने बढ़ी मांग के चलते उसी दौरान स्थानीय ज़रूरत को पूरा करने के लिए इस दवा के निर्यात पर बैन भी लगाया था, लेकिन अमेरिका और अन्य देशों की मांग के चलते भारत को यह बैन हटाना पड़ा था और इसके बाद अमेरिका ने करीब 3 करोड़ टैबलेट्स सुरक्षित कर ली थीं.

अमेरिका में बना हुआ है असंतोष!
जादुई दवा का खिताब पा चुकी HCQ को लेकर अमेरिका में काफी हलचलें अब भी देखी जा रही हैं. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी डॉक्टरों की एक संस्था AAPS ने संघीय अदालत में सबूत पेश करते हुए कहा कि इस दवा के इस्तेमाल में FDA और स्वास्थ्य विभाग रोड़े अटका रहे हैं, जबकि हेनरी फोर्ड हेल्थ सिस्टम की स्टडी इसके फायदे साबित कर चुकी है. AAPS ने यह भी कहा कि दुनिया भर में इस दवा के इस्तेमाल से कोविड 19 संबंधी मृत्यु दर कम हुई जबकि अमेरिका में रोड़ेबाज़ी के चलते मौतें ज़्यादा हुईं.

अस्ल में अमेरिका में HCQ को अभी बचाव वाली दवा के तौर पर ही इस्तेमाल किए जाने की इजाज़त मिली है इसलिए वहां कई कोरोना रोगी इस दवा का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. AAPS के हवाले से कहा गया कि फिलीपीन्स, पोलैंड, इज़राइल और तुर्की जैसे कई देशों में HCQ बेहतर ढंग से उपलब्ध है. वेनेज़ुएला में तो यह मेडिकल स्टोर से बगैर प्रेस्क्रिप्शन के मिल रही है.

hydroxychloroquine, hydroxychloroquine uses, hydroxychloroquine tablets, hydroxychloroquine dose, hydroxychloroquine price, what is HCQ, हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन tablet, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन क्या है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

भारत में HCQ की मांग घटी, तो पड़ा है स्टॉक!
अप्रैल में इस दवा की मांग का आलम ये था कि महाराष्ट्र के कम से कम 64 स्थानीय दवा निर्माताओं को HCQ के उत्पादन के लिए लाइसेंस दिए गए. मई तक यह मांग कायम रही लेकिन जून से यह मांग घटना शुरू हुई. 15 जून को अमेरिका के FDA ने इस दवा के कोविड 19 मामलों में इमरजेंसी में इस्तेमाल पर हाथ खींचे तो 17 जून को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा को रोक दिया.

दलीलें दी गईं कि इस दवा से उम्मीद के मुताबिक कोई फायदा नहीं दिखा और इसके साइड इफेक्ट के तौर पर दिल के गंभीर रोग या शिकायतें पाई गईं. इन तमाम घटनाक्रमों का असर सीधे इस दवा के बाज़ार पर पड़ा. महाराष्ट्र में FDA के रिकॉर्ड आधारित रिपोर्ट की मानें तो मई की शुरूआत में 22 लाख HCQ टैबलेट बाज़ार में थीं और 20 जुलाई तक 48 लाख का स्टॉक था. 48 लाख में से 17.21 लाख टैबलेट सरकार के पास थीं तो 23.36 लाख बाज़ार में और 7.34 लाख वितरकों के पास.

ये भी पढ़ें :-

राफेल विमानों की टेल पर क्यों लिखा होगा RB या BS? क्या है ये कहानी?

नेवी ने अचानक क्यों समुद्र में तैनात कर दिए बड़ी संख्या में जहाज?

HCQ की एक स्ट्रिप में 15 से 20 टैबलेट होती हैं. AIOCD के डेटा का विश्लेषण बताता है कि देश भर में फरवरी में 17.5 लाख स्ट्रिप बिकी थीं और मार्च में 27.4 लाख. अप्रैल में मांग थोड़ी गिरी तो 24.7 लाख स्ट्रिप्स बिकीं और मई में 26 लाख. जून में मांग गिरने से यह बिक्री 24.7 लाख स्ट्रिप्स की रही जबकि जुलाई में और कम बिक्री के आसार हैं. पिछले साल जून में HCQ की 15.7 लाख स्ट्रिप्स बिकी थीं.

भारत में इस दवा के सबसे बड़े निर्माताओं में इप्का लैब, ज़ाइडस कैडिला और टॉरेंट फार्मा हैं जबकि सिप्ला और सन फार्मा इस दवा के छोटे निर्माता हैं. कोविड 19 महामारी के दौर में इन तमाम निर्माताओं ने इस दवा की भारी मांग के चलते इसका उत्पादन काफी बढ़ाया था. अब विशेषज्ञ मान रहे हैं हालांकि इस दवा का इस्तेमाल बंद नहीं हुआ है लेकिन कम ज़रूर हुआ है.



Source link

Authors

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here