राम मंदिर भूमिपूजन पर बोले कल्याण सिंह- अब शांति से मृत्यु का वरण करुंगा,जीवन भर की आकांक्षा पूरी | ayodhya – News in Hindi

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राम मंदिर भूमिपूजन पर बोले कल्याण सिंह- अब शांति से मृत्यु का वरण करुंगा,जीवन भर की आकांक्षा पूरी

कल्याण सिंह से राम मंदिर आंदोलन पर news 18 की खास बातचीत

कल्याण सिंह ने कहा- मुझे सत्ता जाने का न तब कोई गम था न आज कोई मलाल है. मेरे खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने Contempt of court के लिए 24 घंटे की सजा दी थी और 2000 रुपए का जुर्माना किया था. मैने तिहाड़ जेल में 24 घंटे की सजा भी काटी और जुर्माना भी भरा. इसके लिए न मुझे तब दुख था न आज कोई दुख है. क्योंकि राम मंदिर करोड़ों लोगों के लिए आस्था का विषय है.

लखनऊ. लंबी कानूनी लड़ाई, तमाम उतार-चढ़ावों के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्णय से अयोध्या में राम मंदिर (Ram Temple in Ayodhya) निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ. 5 अगस्त को अयोध्या में भूमिपूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस कार्यक्रम में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुरोधाओं को भी आमंत्रित किया गया है. इन्हीं में से एक हैं कल्याण सिंह (Kalyan Singh). 6 दिसंबर 1992 जब कार सेवकों ने विवादित ढांचे को गिरा दिया था उस समय उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे. इस ध्वंश के बाद कल्याण सिंह को न सिर्फ सत्ता गंवानी पड़ी थी बल्कि न्यायालय की अवमानना के मामले में जेल भी जाना पड़ा था और जुर्माना भी भरना पड़ा था.

आकांक्षा पूरी हो गई!
राममंदिर आंदोलन (Ram temple movement) के पुरोधा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रह चुके कल्याण सिंह भी भूमिपूजन में शिरकत करने अयोध्या जाएंगे. बुधवार को News 18 संवाददाता ने कल्याण सिंह से राम मंदिर आंदोलन से लेकर कई विषयों पर ख़ास बातचीत की. उन्होंने कहा ‘मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है. भूमि पूजन होगा, 5 अगस्त मेरे लिए बहुत ही खुशी का दिन होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) स्वंय आ रहे हैं. साधु-संत के साथ गणमान्य लोग भी पहुंचेंगे. मेरी आकांक्षा पूरी हो गई’.

News 18 के सवाल कल्याण सिंह के जवाबयह पूछे जाने पर कि आप ने सत्ता गंवाई थी, क्या कल्याण सिंह की कुर्बानी काम आई ? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा ‘राम के प्रति मेरे मन में अगाध श्रद्धा है और राम मंदिर के प्रति मेरी प्रतिबद्धता है. राम के लिए सत्ता कोई बड़ी चीज नहीं है. सत्ता आती रहती है. मेरे जीवन भर की आकांक्षा पूरी होने जा रही है. आगे बोलते हुए उन्होंने कहा मुझे सत्ता जाने का न तब कोई गम था न आज कोई मलाल है. मेरे खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने Contempt of court के लिए 24 घंटे की सजा दी थी और 2000 रुपए का जुर्माना किया था. मैने तिहाड़ जेल में 24 घंटे की सजा भी काटी और जुर्माना भी भरा. इसके लिए न मुझे तब दुख था न आज कोई दुख है. क्योंकि राम मंदिर करोड़ों लोगों के लिए आस्था का विषय है. करोड़ों लोगो की आकांक्षा पूरी हो रही है’.

बतौर मुख्मंत्री आपने कर्तव्य नहीं निभाया, कोई अफसोस है आपको ?
इस सवाल के जवाब में उस दौर को याद करते हुए कल्याण सिंह कहते हैं कि ‘6 दिसंबर 1992 को जिला प्रशासन की तरफ से एक रिपोर्ट आई वो रिपोर्ट सचिवालय के अधिकारियों के द्वारा मेरे सामने पेश की गई. रिपोर्ट में कहा गया कि हमने जो केंद्रीय सुरक्षा बल भेजे थे उसकी चार बटालियन मांगी गई थी वो मिल गई है. मजिस्ट्रेट ने मांगी थी हमने दे दिया है. उन्होंने बताया बटालियन फैजाबाद से अयोध्या के लिए चल पड़ी है, लेकिन साकेत महाविद्यालय से आगे नहीं बढ़ पा रही है. लगभग साढ़े तीन लाख लोगों का जमावड़ा है और लोग आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं. ऐसे में जिला प्रशासन ने मुझसे पूछा था कि गोली चलाया जाए या नहीं चलाई जाए. उसी रिपोर्ट में उन्होंने ये भी कहा था कि अगर गोली चलाई जाएगी तो भगदड़ होगी, नरसंहार होगा, खून-खराबा होगा. मैने उसी समय लिखित में आदेश दिया कि अयोध्या कि स्थिति जिस बिंदु पर पहुंच गई है ऐसे में गोली नहीं चलाई जाए. क्योंकि गोली चलाने से हजारों लोगों की जान चली जाएगी. पूरे देश में प्रतिक्रिया होगी हिंसा की लपटें उठेंगी, देश धू-धू कर जल उठेगा जो दुखद और भयंकर होगा’. आगे बोलते हुए कल्याण सिंह कहते हैं कि देश भर से लोग आए थे. इसलिए मैंने कहा एक भी गोली नहीं चलाई जाए. कोई अन्य उपाय जो हो सकता है किया जाए. गोली नहीं चली. ढांचा गिर गया, मेरी सरकार चली गई न उस समय कोई गम था न अभी है’. उन्होंने कहा ‘किसी बड़े काम के लिए बड़ा से बड़ा बलिदान छोटा पड़ता है. सरकार छोटी थी मेरे लिए. सरकार चली गई. 6 दिसबंर 1992 को ढांचा ध्वस्त न होता तो हो सकता है कि न्यायपालिका राम मंदिर बनाने का निर्णय देने के बजाए कुछ और निर्णय देती. जिस दिन ढ़ांचा गया एक प्रकार से उसी दिन राममंदिर बनाने की भूमिका तैयार हो गई थी’.

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चैन व शांति के साथ मृत्यु का वरण करुंगा
कल्याण सिंह कहते हैं मुझे खुशी है कोई दुख नहीं है, राममंदिर मेरे जीवन भर की आकांक्षा रही है. मैं अब जीवन के अंतिम पड़ाव पर हूं और बड़े चैन व शांति के साथ मृत्यु का वरण करुंगा. क्योंकि जो आकांक्षा थी वो पूरी हो गई है. अब जीवन से कुछ और नहीं चाहिए.



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