आखिर क्यों आज तक अधूरा है श्री भोजेश्वर महादेव का मंदिर

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लखनऊ। मध्य प्रदेश के भोपाल के नजदीक भोजपुर में पहाड़ी पर भोलेनाथ का एक मंदिर हैं। ये मंदिर सदियों से अधूरा है। आज तक ये विशाल मंदिर बन न सका। इस अधूरे-विशाल लेकिन अद्भुत-अनोखे मंदिर का नाम है “श्री भोजेश्वर महादेव”। यहाँ पर जो शिवलिंग स्थापित है वह बहुत ही बड़े आकार का है। यहां पर स्थापित अनोखे और विशाल आकार वाले शिवलिंग के कारण इन्हें मध्यभारत के सोमनाथ भी कहते हैं।

भगवान शिव के इस मंदिर के अधूरेपन का कोई पुख्ता प्रमाण आज तक नहीं मिल सका है। प्रचलित कथाओं के मुताबिक अपने अज्ञातवास के दौरान पांडवों को माँ कुंती की पूजा के लिए इस स्थान पर एक शिवालय का निर्माण करना था जिसे उन्हें रातभर में ही पूरा करना था। लेकिन गर्भगृह की छत का काम पूरा होने से पहले ही सुबह हो गई, और अपने अज्ञातवास के कारण पांडवों को सूरज निकलते ही छुपना पड़ा और महादेव का यह मन्दिर ऐसे अधूरा रह गया।

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कहा जाता है कि इस विशाल शिवलिंग पर फूल चढ़ाने के लिए पांडवों में दूसरे भाई भीम को अपने घुटनों के बल बैठना पड़ता था। आपको बता दें कि इस मंदिर के पास में प्रसिद्ध बेतवा नदी बहती  है। जहां पर कुंती द्वारा कर्ण को छोड़ने की कथा काफी प्रचलित है।

आपको बता दें कि बाद में परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज [1010 ई-1055 ई] ने इस प्राचीन शिव मंदिर का पुर्नुद्धार किया। यह मंदिर 115 फीट लंबे, 82 फीट चौड़े और 13 फीट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है। हैरान करने की बात तो ये है कि उस ज़माने में इतनी ऊंचाई पर 70 टन भार वाले विशाल पत्थरों को आखिर कैसे शीर्ष तक पहुंचाया होगा?

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जानकारी के लिए बतादें कि इस समय यह मन्दिर ऐतिहासिक स्मारक के रूप में भारतीय पुरातात्त्विक सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है। पास ही इस मन्दिर को समर्पित एक पुरातत्त्व संग्रहालय भी है। शिवरात्रि के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा यहां प्रतिवर्ष भोजपुर उत्सव का आयोजन किया जाता है।

 

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