बकरीद पर गाइडलाइन: ‘बकरीद में कुर्बानी के आड़े आ रही महाराष्ट्र सरकार की गाइडलाइन’, आंदोलन की चेतावनी – maharashtra government guideline hurdles in sacrifice for bakrid muslims warn state of agitation

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Edited By Shashi Mishra | टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Updated:

सांकेतिक चित्रसांकेतिक चित्र

मुंबई

मुंबई में मुस्लिम कार्यकर्ताओं और मौलानाओं ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि महा विकास अगाड़ी सरकार से उनका मोह भंग हो गया है। सरकार बकरीद पर पशुओं को बलि और कुर्बानी देने को लेकर अड़चने लगा रही है। बुधवार को इस संबंध में मौलानाओं ने वर्चुअल मीटिंग करने के आंदोलन की चेतावनी जारी की।

उद्धव ठाकरे की ‘सांप्रदायिक’ सरकार को मौलानाओं ने आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बकरीद पर कुर्बानी को बहुत कठिन बना दिया है। यहां तक कि ऑनलाइन बकरों की खरीद-फरोख्त को लेकर भी अड़चने लगाई जा रही हैं। उनके ट्रांसपोर्ट के दौरान वाहनों को रोका जा रहा है।

बॉर्डर पर रोके जा रहे पशुओं वाले वाहन

मौलानाओं ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों से सप्लाई होने वाले बकरों के वाहन बॉर्डर पर रोके जा रहे हैं। चेकोस्ट पर उन्हें एंट्री नहीं दी जा रही है। पुलिस सिर्फ एक बार में दो बकरों को ही एंट्री दे रही है, इससे उन लोगों को परेशानी आ रही है।



‘सरकार ने मुस्लिम नेताओं की भी नहीं सुनी’


ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल मौलाना मसूद दरयाबादी ने कहा, ‘हम लोगों को अपने मुस्लिम विधायकों और मंत्रियों पर विश्वास था। हमें उम्मीद थी कि वे सरकार से संशोधित गाइडलाइन जारी करवाने में कामयाब होंगे। उन लोगों ने बहुत कोशिश की, यहां तक कि एनसीपी मुखिया शरद पवार ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया लेकिन कुछ नहीं हुआ।’

‘ऑनलाइन बकरे खरीदने में आ रही परेशानी’

हांडीवाली मस्जिद के इमाम मौलाना ऐजाज कश्मीर ने बताया कि जहां पुलिसवालों ने वाहन रोके वहां उनके मुसलमान साथी गए भी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पूर्व मंत्री नसीम खान ने कहा कि इस्लाम में प्रतीकात्मक कुर्बानी का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। ऑनलाइन बकरे खरीदने में भी बहुत परेशानी आ रही है।

‘बीजेपी सरकार करती थी मीटिंग’

अमन कमिटी के मुखिया फरीद शेख ने कहा कि देवनगर के बूचड़खाने में रोज भैसों को काटा जाता है लेकिन कुर्बानी के लिए वहां भैंस काटने की अनुमति नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह किस तरह का नियम है? पूर्व की देवेंद्र फडणवीस सरकार हर त्योहार पर मुस्लिम एनजीओ, मौलानाओं और विधायकों के साथ बैठक करते थे। इस तरह की कोई मीटिंग इस बार आयोजित नहीं की गई। हमने सोचा था कि यह सरकार सांप्रदायिक है।

‘उद्धव के मुस्लिम नेता हुए फेल’

बीजेपी के मुस्लिम नेताओं, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हाजी अराफत शेख और मौलाना आजाद अल्पसंख्यक वित्त निगम के हैदर आजम ने भी इस मामले में हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम मंत्री और मुस्लिम विधायकों की यह असफलता है कि वे उद्धव ठाकरे सरकार पर अपनी मांग नहीं पहुंचा पाए। वे उनसे कुर्बानी को लेकर साफ गाइडलाइन जारी नहीं करवा पाए।

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