राम मंदिर भूमिपूजन: 27 वर्षों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ को मिला न्योता | ayodhya – News in Hindi

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राम मंदिर भूमिपूजन: 27 वर्षों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ को मिला न्योता

लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ को मिला न्योता (file photo)

लावारिस शवों की अंत्येष्टि के पीछे की कहानी कुछ यूं है. शरीफ (Shareef) का एक बेटा मेडिकल सर्विस से जुड़ा था. एक बार वह सुल्तानपुर गया था, जहां उसकी हत्या करके शव को कहीं फेंक दिया गया था.

अयोध्या. अयोध्या (Ayodhya) में 5 अगस्त को होने वाले राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janmabhoomi Mandir) के भूमिपूजन की तैयारी पूरी हो चुकी है. साथ ही कार्यक्रम के लिए कई मेहमानों को न्योता भेजा गया है. इसी कड़ी में 27 वर्षों से लावारिस लाशों का मुफ्त में अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ को भूमिपूजन कार्यक्रम में न्योता दिया गया हैं. राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मोहम्मद शरीफ वो इंसान हैं जो लोगों का मुफ्त में अंतिम संस्कार करते हैं और अब तक करीब 10 हजार लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है. वह अयोध्या के निवासी हैं और हमने उन्हें आमंत्रित किया है.

चंपत राय ने बताया कि मंगलवार शाम तक सभी आमंत्रित यहां पहुंच जाएंगे. आरएसएस चीफ मोहन भागवत और सुरेश भैयाजी जोशी भी कल पहुंचेंगे. राय ने कहा कि भूमि पूजन के दिन पीएम मोदी रामलला पर डाक टिकट भी जारी करेंगे. इसके अलावा राम जन्मभूमि में पौधरोपण भी करेंगे.

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बता दें कि पिछले 27 सालों से हिंदू-मुस्लिम, सिख हो या इसाई किसी भी लावारिस लाश को फेंकने नहीं दिया. शरीफ के लिए हिंदू हो तो सरयू घाट पर अंतिम संस्कार और मुस्लिम हो तो कब्रिस्तान में दफन करना रोजमर्रा का काम बन गया था. शरीफ अब तक लगभग 3000 हिन्‍दू और 2500 मुस्लिम लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करवा चुके हैं.

बेटे की हत्या ने लिया प्रण
लावारिस शवों की अंत्येष्टि के पीछे की कहानी कुछ यूं है. शरीफ का एक बेटा मेडिकल सर्विस से जुड़ा था. एक बार वह सुल्तानपुर गया था, जहां उसकी हत्या करके शव को कहीं फेंक दिया गया था. परिजन ने उसे बहुत खोजा, पर लाश नहीं मिली. उसी के बाद शरीफ ने लावारिस शवों को ढूंढ़-ढूंढ़ कर उसका अंतिम संस्कार करने का प्रण लिया था. बता दें कि आम लोगों के बीच वह ‘शरीफ चाचा’ के नाम से मशहूर हैं. वह कहते हैं, ‘जब तक मुझ में जान है, वह लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते रहेंगे. इस सेवा से मुझे सुकून मिलता है. मैं 27 वर्षों से इस सेवा में जुटा हूं.’



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