World Breastfeeding Week 2020: क्‍या हैं स्तनपान से जुड़े मिथक और गलतफहमियां, जानिए | health – News in Hindi

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ब्रेस्टफीडिंग या स्तनपान (Breastfeeding) एक प्राकृतिक तरीका है जिसके माध्यम से एक मां अपने बच्चे को अपना दूध पिलाती है, जिससे नवजात शिशु (Newborn Baby) को पोषक तत्व, तरल पदार्थ और यहां तक कि रोगों के खिलाफ एंटीबॉडी भी मिलती है. इसलिए ब्रेस्टफीडिंग पूरी तरह से हेल्दी प्रैक्टिस है जो एक बच्चे को जीवन में सबसे अच्छी शुरुआत प्रदान करने में मदद करता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दुनिया भर के सभी विशेषज्ञ भी यही सलाह देते हैं कि सभी मांओं को अपने नवजात शिशु को उसके जन्म से लेकर कम से कम 6 महीने तक स्तनपान के जरिये सिर्फ अपना दूध ही पिलाना चाहिए.

मां और बच्चे दोनों के लिए ब्रेस्टफीडिंग कितना फायदेमंद है, इसे देखते हुए ही इसके कई लाभों को बढ़ावा देने के लिए, WHO हर साल 1 अगस्त से 7 अगस्त के बीच वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक के रूप में मनाता है. इस साल ब्रेस्टफीडिंग वीक का विषय है- ‘धरती को स्वस्थ बनाने के लिए स्तनपान का समर्थन करें’. वैसे तो ब्रेस्टफीडिंग पूरी तरह से हेल्दी प्रैक्टिस है बावजूद इसके स्तनपान को लेकर लोगों के मन में कई तरह की गलत धारणाएं हैं. इन मिथकों को पूरी तरह से दूर करने के लिए नई मांओं को उचित परामर्श देने और जागरूकता कार्यक्रमों को शुरू करने की जरूरत है. यहां हम आपको ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े सबसे कॉमन मिथकों के बारे में बता रहे हैं :

मिथक1: स्तनपान कराते वक्त निप्पल्स में दर्द होना सामान्य हैहकीकत: यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेन्स फंड (यूनिसेफ) के मुताबिक नई मांओं के लिए शुरुआती कुछ दिनों में बच्चे को स्तनपान कराते समय थोड़ी बहुत असहजता महसूस होना सामान्य सी बात है. इतना ही नहीं, जब बच्चे के दांत आने लगते हैं तो निप्पल्स में सूजन, दर्द और खून आना भी पूरी तरह से नैचरल है. लेकिन इसके अलावा और किसी कारण से स्तनपान कराते समय दर्द नहीं होना चाहिए. अगर होता है तो इसका मतलब है कि आप बच्चे को गलत पोजिशन में रखकर दूध पिला रही हैं या फिर शिशु निप्पल्स को सही तरीके से अटैच नहीं कर पा रहा है. इन दोनों समस्याओं को हल किया जा सकता है. इसके लिए आप चाहें तो किसी नर्स, डॉक्टर या अनुभवी मां से सही रास्ता दिखाने के लिए मदद मांग सकती हैं.

मिथक2: बहुत सी मांओं के लिए पर्याप्त दूध बनाना मुश्किल होता है
हकीकत: यूनिसेफ के मुताबिक, अधिकांश मांएं अपने शिशु के लिए सही मात्रा में दूध का उत्पादन करती हैं, लेकिन अगर आपको लगता है कि आप पर्याप्त दूध का उत्पादन नहीं कर पा रही हैं तो यह इन 3 कारणों में से एक की वजह से हो सकता है- नवजात शिशु निप्पल्स से सही तरीके से अटैच नहीं हुआ है, हर बार दूध पिलाने के दौरान शिशु पर्याप्त और पुरा दूध खत्म नहीं कर पा रहा है या फिर स्तनपान करवाने की फ्रीक्वेंसी सही नहीं है. डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रफेशनल इन तीनों समस्याओं से आपको निकालने और यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि आप पर्याप्त दूध का उत्पादन कर रही हैं. इसके अलावा, स्तनपान के महीनों के दौरान उचित आहार, आराम और व्यायाम भी महत्वपूर्ण है.

मिथक3: जब मां बीमार हो तो वह ब्रेस्टफीट नहीं करवा सकती

हकीकत: आम लोगों की मान्यताओं के विपरित, मांएं आमतौर पर तब भी बच्चे को ब्रेस्टफीड करवा सकती हैं जब वे बीमार हों. हालांकि जरूरी ये है कि आप बीमार होने पर डॉक्टर से परामर्श लें और बीमारी का उचित इलाज करवाएं. मास्टिटिस से लेकर हेपेटाइटिस तक, सभी बीमारियों में यही स्थिति है क्योंकि विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस बीमारी से लड़ने के लिए मां के शरीर में जिस एंटीबॉडी का विकास होता है वह ब्रेस्टफीडिंग के जरिये बच्चे को भी मिल जाती है जिससे बच्चे की इम्यूनिटी उस बीमारी के प्रति बेहतर होती है. अगर बीमारी बहुत ज्यादा संक्रामक हो तो ब्रेस्ट पंप की मदद से ब्रेस्टमिल्क निकालकर बच्चे को पिलाने की सलाह दी जाती है, जैसा कि कोविड-19 इंफेक्शन के केस में होता है.

मिथक4: ब्रेस्टफीडिंग करवाने के दौरान भी आप गर्भवती हो सकती हैं
हकीकत: ब्रेस्टफीडिंग गर्भनिरोधक के विश्वसनीय तरीके के रूप में काम नहीं करता. अमेरिकन अकैडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) की मानें तो वैसे तो ब्रेस्टफीडिंग कुछ महिलाओं में ऑव्यूलेशन को रोकता है, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आप गर्भवती नहीं हो सकतीं. इसकी जगह आपको अपने डॉक्टर से पूछकर गर्भनिरोध का कोई बेहतर तरीका अपनाना चाहिए और ब्रेस्टफीडिंग करवाते समय ऐस्ट्रोजेन युक्त गर्भनिरोधक गोली का सेवन नहीं करना चाहिए.

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मिथक5: ब्रेस्टफीडिंग से ब्रेस्ट का आकार खराब हो जाता है
हकीकत: एएपी की मानें तो स्तनपान की बजाए आपकी उम्र, वजन बढ़ना और गुरुत्वाकर्षण का आपके स्तन के आकार पर अधिक प्रभाव पड़ता है. ज्यादातार महिलाओं में ब्रेस्टफीडिंग बंद करने के बाद ब्रेस्ट फिर से प्रेगनेंसी के पहले वाले आकार और साइज में चला जाता है. हालांकि प्रेगनेंसी के बाद ब्रेस्ट की स्थिरता में परिवर्तन होने की संभावना है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ब्रेस्टफीडिंग के फायदे के बारे में पढ़ें।

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