काम करने या फैसले लेने में हो रही है उलझन? सेकंड हैंड स्ट्रेस का शिकार तो नहीं आप | health – News in Hindi

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तनाव यानी स्ट्रेस (Depression Or Stress) किसी भी तरह से स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन लोगों को अब सेकंड हैंड स्ट्रेस से भी खुद को बचाना होगा. सेकंड हैंड स्मोक (कोई धूम्रपान करे और नुकसान दूसरों को हो) की तरह सेकंड हैंड स्ट्रेस भी खतरनाक है. सेकंड हैंड स्ट्रेस का मतलब है कि व्यक्ति खुद तनाव नहीं लेता है बल्कि दूसरों से तनाव उसे मिलता है. यह उसका पति या पत्नी, परिवार का कोई सदस्य, सहकर्मी या ऐसा व्यक्ति जो बहुत करीब हो, वह हो सकता है. स्पष्ट है कि तनाव से भरे नकारात्मक मानसिकता वाले लोगों के बीच रहने से अन्य व्यक्ति भी तनाव का शिकार हो सकता है. ऐसे लोग अपना तनाव बाहर निकालते हैं और सामने वाले को भी इससे ग्रसित कर देते हैं. जब व्यक्ति किसी और के तनाव का हिस्सा बन जाता है तो वह सेकंड हैंड स्ट्रेस का शिकार कहलाता है.

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि आजकल ऐसे व्यक्ति की कल्पना करना असंभव है जो मानसिक तनाव का अनुभव ना कर रहा हो. फिर चाहे व्यक्तिगत, सामाजिक या आर्थिक समस्या ही क्यों ना हो. मानसिक तनाव तन और मन, दोनों पर बुरा असर डालता है जिससे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियां जन्म लेती हैं. दुखद तो यह है कि वे खुद ये नहीं जानते कि इस तनाव से कैसे बचना है. इसके कारण स्थिति और भी बिगड़ जाती है. इसलिए व्यक्ति को सेकंड हैंड स्ट्रेस के लक्षणों और संकेतों की जानकारी होने चाहिए ताकि मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहे.

बिना कारण तनाव से घिरे रहना:सामान्य तनाव की स्थिति में व्यक्ति उसके पीछे का कारण जानता है. चूंकि सेकंड हैंड स्ट्रेस मस्तिष्क से नहीं उपजा है तो व्यक्ति को पता नहीं होता है कि आखिरी तनाव क्यों हो रहा है और कहां से आया है. इसका नर्वस सिस्टम पर तुरंत असर पड़ता है और मरीज का किसी काम में मन नहीं लगता है.

निराशावादी और भ्रमित

अगर कोई व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोच रखता है और आशान्वित रहता है, लेकिन उसे अपने आसपास हो रही चीजों से निराशा महसूस होने लगे तो समझ जाइए कि सेकंड हैंड स्ट्रेस का शिकार हो सकता है.

हमेशा थकान का अनुभव

अगर व्यक्ति उन लोगों में से है जो कि पहले खुश रहा करते थे, लेकिन इन दिनों उन लोगों के साथ रह रहे हैं जो कि हमेशा तनाव में रहते हैं, किसी न किसी चीज की शिकायत करते रहते हैं तो यह उनकी एनर्जी को भी प्रभावित कर सकता है. ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है जो कि समय के साथ उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और यह सेकंड हैंड स्ट्रेस का संकेत है. इसलिए नकारात्मक लोगों से दूर रहें.

ब्रेन फॉग का शिकार

अगर चीजे भूलने लगे हैं, याददाश्त कमजोर हो रही है, ब्रेन फॉग (ऐसी बीमारी जिसमें सोचने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और व्यक्ति हमेशा कन्फ्यूज महसूस करते हैं) के शिकार हो रहे हैं तो सेकंड हैंड स्ट्रेस का संकेत भी हो सकता है. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि कमजोर याद्दाश्त में तनाव और अवसाद प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं. यह भी आशंका है कि तनाव मस्तिष्क में किसी विशेष मेमोरी के स्टोरेज की प्रक्रिया में दखल करता है. यदि व्यक्तिगत जीवन में समस्या नहीं है, तो यह करीबी लोगों द्वारा दिए गए सेकंड हैंड तनाव के कारण हो सकता है.

ठीक से सोचने और निर्णय लेने में असमर्थ

अगर काम के बारे में सोचने या निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है, तो यह सेकंड हैंड स्ट्रेस भी हो सकता है. सेकंड हैंड स्ट्रेस व्यक्ति की उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है. ऐसी स्थिति में अपना काम पूरा करने में खुशी नहीं मिलती है और यह उसके लिए मुश्किल काम बन सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, तुलसी के पत्ते से लेकर लैवेंडर तेल और अश्वगंधा तक तनाव दूर करने के घरेलू उपाय पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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