World Breastfeeding Week 2020: जानें स्तनपान से मां और बच्चे को कैसे पहुंचता है फायदा | health – News in Hindi

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World Breastfeeding Week 2020: जानें स्तनपान से मां और बच्चे को कैसे पहुंचता है फायदा

नवजात शिशु की वृद्धि और विकास के लिए ब्रेस्टफीडिंग बेहद आवश्यक है. डॉक्टर और एक्सपर्ट्स की मानें तो नवजात शिशु को जन्म से लेकर कम से कम 6 महीने तक सिर्फ मां का ब्रेस्ट मिल्क ही दिया जाना चाहिए.

हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच ब्रेस्टफीडिंग वीक (Breastfeeding Week) मनाया जाता है और इस साल का थीम है “धरती को स्वस्थ बनाने के लिए स्तनपान का समर्थन करें”, जिसका उद्देश्य ब्रेस्टफीडिंग के लाभ के प्रति जागरूकता बढ़ाना है.




  • Last Updated:
    August 5, 2020, 6:25 AM IST

ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) भले ही पूरी तरह से एक हेल्दी प्रैक्टिस हो बावजूद इसके कई महिलाएं आज भी रेस्तरां, ऑफिस और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बच्चे को अपना दूध पिलाने में संकोच करती हैं. इसकी कई वजहें हैं जैसे- लोगों द्वारा स्तनपान कराने वाली महिला को लगातार घूरना हो या उनके द्वारा की जाने वाली असभ्य टिप्पणियां या फिर मां और बच्चे के बैठने और फीड कराने के लिए अच्छी जगह की व्यवस्था न होना. हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच ब्रेस्टफीडिंग वीक मनाया जाता है और इस साल का थीम है “धरती को स्वस्थ बनाने के लिए स्तनपान का समर्थन करें”, जिसका उद्देश्य ब्रेस्टफीडिंग के लाभ के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. ब्रेस्टफीडिंग सिर्फ नवजात शिशु के लिए ही नहीं बल्कि दूध पिलाने वाली मां के लिए भी कई तरह से फायदेमंद है.

शिशु के लिए ब्रेस्टफीडिंग के फायदे
नवजात शिशु की वृद्धि और विकास के लिए ब्रेस्टफीडिंग बेहद आवश्यक है. डॉक्टर और एक्सपर्ट्स की मानें तो नवजात शिशु को जन्म से लेकर कम से कम 6 महीने तक सिर्फ मां का ब्रेस्ट मिल्क ही दिया जाना चाहिए. फैट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स और विटामिन के अलावा, मां के ब्रेस्ट मिल्क में विभिन्न तत्व होते हैं जो बच्चे के मस्तिष्क की कोशिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक हैं. इनमें से कुछ महत्वपूर्ण तत्व हैं :

  • ब्रेस्ट मिल्क में आईजीए एंटीबॉडी होता है जो नवजात शिशु को बैक्टीरिया और वायरस के कारण होने वाली अलग-अलग तरह की कई बीमारियों और इंफेक्शन से बचाता है.
  • ब्रेस्ट मिल्क में ल्युकोसाइट्स (सफेद रक्त कोशिकाएं) और स्टेम सेल्स होते हैं जो नवजात शिशु की इम्यूनिटी को बनाने, अंगों के विकास और चोटों को ठीक करने के लिए आवश्यक होता है.
  • इसके अलावा ब्रेस्ट मिल्क में कई एंजाइम्स भी होते हैं जो भोजन को पचाने और आयरन को अवशोषित करने में शिशु की मदद करते हैं. ये एंजाइम बच्चे के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.
  • ब्रेस्ट मिल्क में 200 से ज्यादा कॉम्प्लेक्स शुगर होता है जो प्रीबायोटिक का काम करते हैं जिससे बच्चे की आंत में गुड बैक्टीरिया के लेवल को बनाए रखने में मदद मिलती है.
  • कोलोस्ट्रोम (बच्चे के जन्म के बाद मां के ब्रेस्ट से निकलने वाला पहला दूध) में एपिडर्मल ग्रोथ फैक्टर और इंसुलिन जैसे विकास कारक- आई(आईजीएफ-1) होता है जो स्वस्थ जठरांत्र मार्ग को बनाए रखने के लिए जरूरी है.
  • मां के दूध में लेप्टिन, एडिपोनेक्टिन, आईजीएफ-1, घ्रेलिन, ओबेस्टेटिन और रेसिस्टिन पाया जाता है जो बच्चे की भूख और नींद के पैटर्न को मैनेज करने में मदद करता है.
  • अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि जिन बच्चों को मां का दूध पिलाया जाता है उन्हें बचपन में होने वाले मोटापे का खतरा 15 से 30 प्रतिशत तक कम होता है.

ब्रेस्टफीडिंग के फायदे मां के लिए
बच्चे को स्तनपान कराना न सिर्फ बच्चे की सेहत के लिए फायदेमंद है बल्कि दूध पिलाने वाली मां के लिए भी. इनमें से कुछ फायदे हैं :

  • अध्ययनों से पता चला है कि जो महिलाएं शिशु को स्तनपान कराती हैं, वे उन महिलाओं की तुलना में डिलिवरी के बाद अधिक वेट लॉस करती हैं जो बच्चे को दूध नहीं पिलातीं. जो महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग करवाती हैं उन्हें प्रसव के बाद पहले तीन महीनों में भले ही अपने वजन में किसी तरह की कोई कमी महसूस न हो लेकिन लेकिन 3 महीने बाद अगर वही महिलाएं स्तनपान जारी रखें तो उन्हें फैट के बर्न होने में वृद्धि का अनुभव होता है.
  • ऑक्सिटोसिन, डिलिवरी से पहले और बाद में भी एक जरूरी हार्मोन है. डिलिवरी के दौरान, ऑक्सिटोसिन संकुचन को बढ़ाकर बच्चे को डिलीवर करने में मदद करता है. डिलिवरी के बाद, यह हार्मोन गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में वापस लाने में भी मदद करता है. ब्रेस्टफीडिंग कराने से शरीर में ऑक्सिटोसिन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे गर्भाशय से ब्लीडिंग कम होती है और तेज गति से इसे वापस सामान्य आकार में आने के लिए प्रोत्साहित करता है.
  • अध्ययनों में यह बात भी सामने आयी है कि जो महिलाएं 12 महीने तक अपने बच्चे को स्तनपान करवाती हैं उन महिलाओं में ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर होने का खतरा 28 प्रतिशत तक कम होता है.
  • स्तनपान करवाने से पोस्टपार्टम डिप्रेशन की समस्या का खतरा भी कम होता है जो डिलिवरी के बाद करीब 15 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है. ऐसा माना जाता है कि ऑक्सिटोसिन में ऐंटी-ऐंग्जाइटी असर होता है और चूंकि ब्रेस्टफीडिंग करवाने से शरीर में ऑक्सिटोसिन की मात्रा अधिक रिलीज होती है, इसलिए पोस्टपार्टम डिप्रेशन होने का खतरा कम होता है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, स्तनपान से जुड़ी समस्याएं और उनका समाधान के बारे में पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

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