BMC: पेड़ काटने से शुरु हुई बीएमसी की बैठकें – bmc meetings started by cutting trees

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मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने स्थानीय निकायों की नियमित बैठक बुलाने का आदेश दिया, तो बीएमसी ने पेड़ों की कटाई के फैसले से बैठक का आगाज किया। शिवसेना ने बीएमसी इकबाल सिंह चहल के साथ मिलकर वृक्ष प्राधिकरण की बैठक में 472 पेड़ों के कत्ल का निर्णय ले लिया। अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि बीएमसी के लिए स्वास्थ्य या स्थायी समिति की बैठक बुलाना जरूरी था या फिर निजी बिल्डरों के हित में पेड़ काटने के लिए बुलाई गई वृक्ष प्राधिकरण की बैठक अनिवार्य था। इस पर शिवसेना नेताओं ने मौन धारण कर लिया है, जबकि कांग्रेस, राकांपा, भाजपा, सपा ने कमिश्रर और शिवसेना के खिलाफ बिगुल बजा दिया है।

वृक्ष प्राधिकरण की बैठक वीसी पर बुलाने के बाबत बीएमसी में विरोधी पक्ष नेता रजि राजा का कहना है कि बीएमसी प्रशासन कितना गंभीर है, इसका पता वृक्ष प्राधिकरण की बैठक लेने से ही पता चलता है। निजी बिल्डरों को फायदा पहुंचाने वाले वृक्ष प्राधिकरण की बजाय कमिश्नर को स्थायी समिति, स्वास्थ्य समिति, शिक्षा समितियों की बैठक बुलानी चाहिए और उससे पहले तो खुद को बीएमसी सभागृह में अपना परिचय देना चाहिए। बीएमसी में समाजवादी पार्टी के नगरसेवक व विधायक रईस शेख कहते हैं, वृक्ष प्राधिकरण से ज्यादा महत्व स्वास्थ्य, स्थायी, शिक्षा समिति की बैठक बुलना जरूरी है, लेकिन यह शिवसेना और बीएमसी प्रशासन को समझ में नहीं आ रहा है। स्थायी समिति की बैठक नहीं बुलाने से कई सारे महत्वपूर्ण निर्णय महीनों से रुके पड़े है।

बीएमसी कमिश्नर चहल की अध्यक्षता में हुई बैठक में पेड़ काटने के लिए 15 अलग-अलग प्रस्ताव लाए गए जिसमें बिल्डरों से संबंधित पेड़ काटने की अनुमति बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया। लेकिन भांडुप एस वॉर्ड में गटर-नाले को प्रभावित करने वाले पेड़ों की कटाई, फायर ब्रिगेड को परेशानी में डालने वाले पेड़, के-पूर्व वॉर्ड में पुल बनाने के बीच रुकावट बने पेड़ों को काटने की अनुमति प्राधिकरण ने नहीं दी। विडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक से कमिश्नर कब उठकर चले गए, हमें तो उसका भी पता नहीं चला। भाजपा के सदस्य अभिजीत सामंत ने आरोप लगाया कि शिवसेना मेट्रो कारशेड में अड़चन बने पेड़ों को काटने का विरोध कर रही थी, लेकिन यहां बिल्डरों के लिए फायदा देने वाले पेड़ों को काटने की अनुमति दी है।

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