कोरोना वायरस से उबरने के बाद इन टिप्स को अपनाकर खुद को भावनात्मक रूप से बना सकते हैं मजबूत | health – News in Hindi

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आदमी जीवन में कई बार बाीमार पड़ता है. चाहे वह छोटी बीमारी से पीड़ित हो या बड़ी बीमारी से. कभी-कभी ये बीमारी लंबे समय तक चलती हैं तो कभी-कभी कम समय में ही आदमी इनसे उबर जाता है. लेकिन इन बीमारियों का असर हमारी मानसिक सेहत पर असर पड़ता है. जब आप बीमार होते हैं तो उस वक्त तनाव, डर, चिंता और उदासी आम है. अगर आपको कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़े तो यह सभी भावनाएं और तीव्र हो जाती हैं. अगर आप कोविड-19 से ग्रस्त हैं तो फिर यह भावनाएं आपको और ज्यादा परेशान कर सकती हैं, क्योंकि दुनियाभर में 2 करोड़ से ज्यादा लोग इससे ग्रसित हो चुके हैं.

मानसिक सेहत का ध्यान रखना है जरूरी
अगर कोविड-19 के बाद अपनी नॉर्मल जिंदगी में लौट रहे हैं तो समझ लें कि इस दौरान आप खुद को भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करते हैं. ऐसे में आपको इस चीज से उबरना भी जरूरी है. मानसिक सेहत को बिल्कुल भी हल्के में ना लें, क्योंकि यह न सिर्फ आपके ठीक होने में बाधा उत्पन्न कर सकता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है.कई अन्य स्टडी की ही तरह जून 2020 में ग्लोबल हेल्थ रिसर्च एंड पॉलिसी में छपी एक स्टडी के अनुसार भी कोविड-19 से उबर रहे मरीजों को पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) का खतरा अधिक होता है. यह भविष्य में गंभीर संकट और मानसिक विकलांगता का कारण भी बन सकता है. जुलाई 2020 में ब्रेन, बिहेवियर और इम्यूनिटी में छपी एक स्टडी के अनुसार कोविड-19 से उबर रहे 55 फीसद मरीजों के क्लिनिकल स्कोर में कम से कम एक मेंटल डिसऑर्डर का पता चला है. यह समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है. हालांकि, लंबे समय तक अस्पताल में रहने, कोविड-19 के इलाज के दौरान हुई देखभाल और व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक इतिहास का भी इस पर असर पड़ता है.

कोरोना से उबरने के बाद मानसिक सेहत का ऐसे रखें ख्याल
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार जो लोग कोविड-19 की वजह से अस्पताल में भर्ती हुए हैं उन्हें अस्पताल की यादें और वहां के अनुभवों से संबंधित सपने परेशान कर सकते हैं. मरीज इस दौरान भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस कर सकता है. रिकवरी के दौरान इस पैंडेमिक से पहले की जिंदगी में वापस न लौट पाने के कारण भी मानसिक सेहत प्रभावित हो सकती है. यही कारण है कि डब्ल्यूएचओ सभी कोविड-19 मरीजों को तनाव, चिंता और अवसाद के प्रबंधन की सलाह देता है.

1. समय पर और अच्छी नींद लें – जब आप इंफेक्शन के कारण अस्पताल में भर्ती थे उस दौरान आपकी नींद भी प्रभावित हुई होगी. सरकाडियन रिदम हमारी नींद को नियंत्रित करती है और समय पर और उचित नींद लेकर मूड सुधर सकता है. नियमित रूप से एक ही समय पर सोने और जागने से आपको इससे उबरने में आसानी होगी. कोशिश करें कि शांत वातावरण में अच्छी नींद लें.

2. अच्छा और पोषक आहार लें – कोविड-19 से आपके शरीर में कई पोषक तत्वों की कमी हो चुकी है, इसलिए स्वस्थ और पोषक भोजन करें, ताकि आप जल्दी से रिकवर कर सकें. अच्छी डाइट लेने से न सिर्फ आपका मूड अच्छा होगा, बल्कि इससे आपके संपूर्ण सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा. फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन आपके शरीर के हार्मोन के कार्य को नियमति करेंगे. इससे आपका मूड भी अच्छा रहेगा और दिमागी सेहत भी सुधरेगी.

3. धीरे-धीरे काम पर लौटें – कोविड-19 के बाद किसी भी तरह की फिजिकल एक्टीविटी आपको थका सकती है और इससे सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे अपनी नॉर्मल एक्टिव लाइफ में लौटने से आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों में लाभ मिलेगा. धीरे-धीरे अपने रूटीन में लौटें, इससे आपको फिर से वही ताकत और मानसिक शांति मिलेगी.

4. भरपूर आराम करें – फिजिकल एक्टीविटी में लौटना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही आराम भी जरूरी है. आराम करने से न सिर्फ आपका तनाव कम होगा, बल्कि मानसिक सेहत भी दुरुस्त होगी. मेडिटेशन, सांसों से जुड़े व्यायाम और स्ट्रेचिंग भी किताब पढ़ने और अच्छा संगीत सुनने की तरह मानसिक शांति प्रदान कर सकते हैं. आप चाहें तो मानसिक शांति के लिए अकेले में बैठकर शांति से पूजा-पाठ भी कर सकते हैं.

5. पुरानी जिंदगी बुला रही है – कोई भी व्यक्ति जो किसी बीमारी से गुजरा हो, वह जानता है कि इस दौरान कितना अकेलापन महसूस होता है और यह आपकी मानसिक सेहत के लिए घातक होता है. पैंडेमिक से पहले कैसे आप अपने हर दुख-सुख को दोस्तों और रिश्तेदारों से बांटते थे, एक बार फिर आपको वैसा ही करना है, लेकिन फिलहाल किसी से व्यक्तिगत तौर पर नहीं मिल सकते हैं तो फोन, वीडियो कॉल आदि से जुड़े रहें. यदि कोई दोस्त या पारिवारिक सदस्य आपके पास मदद के लिए आता है तो उसका स्वागत करें और खूब सारी बातें करें.

ऊपर बताए गए टिप्स आपको अपने ही समाज से दोबारा जुड़ने में मदद करेंगे और आपकी मानसिक सेहत को दुरुस्त करेंगे. फिर भी अगर आपको लगे कि मानसिक दबाव, तनाव, उदासी या चिंता ज्यादा हो रही है तो किसी मनोचिकित्सक से मिलने में बिल्कुल भी देरी ना करें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोरोना के बाद का जीवन: कोविड-19 से रिकवर होने वाले मरीज की देखभाल कैसे करें? पढ़ें।

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