Sanjay Dutt Lung Cancer: लंग कैंसर से भारत में 50 हजार लोग गंवाते हैं जान | health – News in Hindi

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संजय दत्त को लंग कैंसर है (फोटो साभार: instagram/duttsanjay)

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त लंग कैंसर (Sanjay Dutt Lung Cancer) से जूझ रहे हैं और बताया जा रहा है कि उन्हें एडवांस यानी तीसरे स्टेज का कैंसर है.




  • Last Updated:
    August 12, 2020, 11:41 AM IST

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त लंग कैंसर (Sanjay Dutt Lung Cancer) से जूझ रहे हैं और बताया जा रहा है कि उन्हें एडवांस यानी तीसरे स्टेज का कैंसर है. सीने में दर्द और सांस लेने में दिक्कत के चलते उन्हें हाल ही में मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. हालांकि, अच्छी बात यह है कि उन्हें इसके साथ कोविड-19 का संक्रमण नहीं हुआ है. 10 अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और अब खबर आई है कि उन्हें फेफड़ों का यानी लंग कैंसर है.

बता दें कि भारत में हर साल फेफड़ों के कैंसर के लगभग 55 हजार मामले सामने आते हैं. इसमें और भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 50 हजार लोगों की मौत हो जाती है, जबकि सिर्फ 5 हजार लोगों को ही बचाया जाता है. इतनी बड़ी संख्या में लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इलाज के सही विकल्पों की जानकारी का अभाव ही है. इसमें मौत का आंकड़ा इतना बड़ा इसलिए भी दिखता है, क्योंकि इस बीमारी के शुरुआती चरणों में मरीज को बहुत कम ही जानकारी मिल पाती है. जिन मरीजों में शुरुआती चरण में लंग कैंसर का पता चल जाता है, उनकी जान बचने की उम्मीद ज्यादा होती है. यह जानकारी पिछले साल लखनऊ में मेडिकल आंकोलॉजिस्ट डॉ. हर्षवर्धन आत्रेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी थी.

यदि कोई व्यक्ति बीड़ी, सिगरेट, हुक्का पीता है या पैसिव स्मोकर है यानी उसके आसपास कोई धूम्रपान करता है तो यह दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं. यह धुआं या प्रदूषण हमारी त्वचा, बाल, दीवारों, फर्नीचर, कालीन, कुशन और अन्य जगहों को प्रदूषित कर देता है. इन सबके बीच सांस लेने से हमारे फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचता है. डॉ. आत्रेय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पैसिव स्मोकिंग और पॉल्युशन के कारण भारत में लंग कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि मेडिकल साइंस ने खूब तरक्की कर ली है, लेकिन इसके बावजूद लंग कैंसर का अभी तक पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है. शुरुआती स्टेज में जानकारी मिलने पर मरीज को बचाए जाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. लंग कैंसर के कुछ लक्षणों को आप घर पर ही ऐसे पहचान सकते हैं-

  • सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होना
  • बलगम के साथ खून का आना
  • लगातार खांसी आना
  • थोड़ा सा काम करने पर सांस फूल जाना
  • फिंगर क्लबिंग भी इसका प्रमुख लक्षण माना जाता है

फिंगर क्लबिंग क्या है

कैंसर रिसर्च यूके के अनुसार उंगलियों में गांठें पड़ना और चौड़ा हो जाना (फिंगर क्लबिंग) इस तरह से होता है.

  • सबसे पहले नाखूनों का निचला हिस्सा नरम पड़ने लगता है. बाद में नाखूनों के पास की स्किन चमकीली हो जाती है.
  • नाखूनों अजीब तरह से मुड़ने लगते हैं और भद्दे दिखने लगते हैं. इसे स्कारमाउथ साइन भी कहा जाता है.
  • आखिर में नाखूनों के सिरे बड़े हो जाते हैं. यह सहजन की तरह दिखने लगते हैं, इसलिए इन्हें ड्रमस्टिक फिंगर्स भी कहा जाता है.

डॉक्टरों के अनुसार उंगलियों और नाखूनों की तरफ रक्त प्रवाह बढ़ जाता है. जिसकी वजह से उंगलियों के सिरे पर सॉफ्ट टिश्यू जमा होने लगते हैं और क्लबिंग होने लगती है. हालांकि, इस संबंध में अभी और रिसर्च की जरूरत है.

फिंगर क्लबिंग किन लोगों में होती है

  • नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर वाले 35 फीसद लोगों में यह लक्षण दिखता है.
  • स्मॉल सेल लंग कैंसर वाले सिर्फ 4 फीसद लोगों में ही यह लक्षण नजर आता है.
  • फेफड़े की परत और चेस्ट को प्रभावित करने वाले मेसोथेलियोमा कैंसर में भी यह लक्षण नजर आते हैं.

घर पर ही फिंगर क्लबिंग के लक्षणों का पता ऐसे लगाएं

  • अपने दोनों हाथों को आंखों के सामने लाएं.
  • अब दोनों हाथों की पहली उंगली (इंडेक्स फिंगर) को आपस में चिपकाकर देखें.
  • साधारण स्थिति में नाखूनों के बीच हीरे के आकार की खाली जगह दिखनी चाहिए.

हालांकि, फिंगर क्लबिंग होने पर 100 फीसद लंग कैंसर हो ऐसा नहीं है. फेफड़ों की कुछ अन्य बीमारियों जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस, पल्मनरी फाइब्रोसिस, ब्रोंकाइक्टेसिस और एस्बेस्टोसिस, दिल की समस्या, लिवर की बीमारियों और क्रोहन रोग में भी ऐसा हो सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, लंग कैंसर के प्रकार, कारण, लक्षण, बचाव, इलाज, परहेज, दवा और डॉक्टर पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।



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