इन 7 फूड्स से कुदरती तौर पर शरीर में बढ़ा सकते हैं डोपामाइन की मात्रा, जानिए इसका फायदा | health – News in Hindi

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हार्मोन (Hormone) शरीर में बनने वाले एक तरह के केमिकल (Chemical) होते हैं जो कि खून के जरिए अंगों और ऊतकों तक पहुंचते हैं और शरीर की कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं. हार्मोन मेटाबॉलिज्म (Metabolism), शरीर के बढ़ने, प्रजनन, यौन गतिविधियां, मूड आदि क्रियाओं मंन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. myUpchar से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल का कहना है कि हार्मोन का शरीर में कम या ज्यादा होना सेहत पर असर डालता है. ऐसा ही एक हार्मोन है डोपामाइन (Dopamine Hormone).

डोपामाइन को मोटीवेशन हॉर्मोन भी कहा जाता है. एक ऐसा हार्मोन है जो प्रेरणा और मानसिक एकाग्रता देता है. यह एक न्यूरो हार्मोन है जो ध्यान, एकाग्रता और प्रेरणा जैसी मानसिक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होता है. मस्तिष्क में प्राकृतिक रूप से डोपामाइन का उत्पादन होता है, लेकिन शरीर में इसकी कमी होती है तो इसके कारण एकाग्रता की कमी, थकान, ध्यान भटकना, नींद की कमी जैसे लक्षण दिखते हैं. इसलिए शरीर में प्राकृतिक रूप से डोपामाइन की मात्रा को बढ़ाने के लिए उचित आहार लेने की आवश्यकता होती है. यहां ऐसा ही 7 फूड्स बताए गए हैं जो कि डोपामाइन को बढ़ाने में मदद करेंगे, जिससे खुशी और ऊर्जा महसूस होगी.

बादामबादाम और अन्य नट्स में बहुत सारे टाइरोसिन होते हैं, जो कि डोपामाइन के स्तर को बढ़ाएंगे. myUpchar से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि बादाम की गुणवत्ता को देखते हुए इसे दिमाग के लिए सर्वोत्तम आहार माना जाता है. इसमें मौजूद विटामिन ई दिमाग की सतर्कता बढ़ता है और याद्दाश्त को भी बरकरार रखता है. यहीं नहीं बादाम जिंक से भी भरपूर है जो दिमाग की कोशिकाओं को हानिकारक हमलों से बचाता है. विटामिन बी 6 दिमाग की कोशिकाओं की मरम्मत करने में मदद करता है. बादाम डोपामाइन और एड्रेनालाइन जैसे मस्तिष्क के रसायनों के उत्पादन में सहायक है जो कि ध्यान और स्मृति के लिए महत्वपूर्ण है. रोज एक मुट्ठी बादाम खाएं.

फल
सेब, केला, जामुन, तरबूज, स्ट्रॉबेरीज और पपीता जैसे फलों में डोपामाइन का उत्पादन बढ़ाने वाले केवल क्वेरसेटिन और टायरोसिन नहीं होते हैं बल्कि वे विटामिन से भी भरे होते हैं.

शाकाहारी प्रोटीन

यदि शाकाहारी हैं तो सोयाबीन, फलियां और बीन्स जैसे विकल्प हैं, जो टाइरोसिन की अच्छी खुराक देते हैं और इसके साथ डोपामाइन उत्पादन को बढ़ावा देते हैं.

दूध और डेयरी
पनीर, दूध, दही मूल रूप से सभी डेयरी उत्पाद टायरोसिन का एक बड़ा स्रोत हैं और इस तरह डोपामाइन उत्पादन को बढ़ावा देने का एक शानदार तरीका हैं.

चॉकलेट
मीठा दो तरह से काम करता है. सबसे पहले शरीर में फील-गुड हार्मोन सेरोटोनिन का उत्पादन करते हैं. दूसरी बात, चॉकलेट में फिनाइलथाइलामाइन नाम के एक कम्पाउंड की थोड़ी मात्रा होती है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को डोपामाइन रिलीज करने के लिए उत्तेजित करती है.

मांसाहारी भोजन
चिकन, अंडे और मांस से लेकर मछली और झींगे तक प्रोटीन से भरपूर सभी चीजें टाइरोसिन से समृद्ध होती हैं. इसका सीधा सा मतलब है कि नॉन-वेज सेवन को बढ़ाने से डोपामाइन का स्तर भी बढ़ सकता है.

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कॉफी
कॉफी में मौजूद कैफीन मस्तिष्क को सतर्क कर सकता है और डोपामाइन उत्पादन को बढ़ावा दे सकता है. तभी तो कैफीनयुक्त पेय पीने के बाद ज्यादा जागृत और फोकस्ड महसूस करते हैं.

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