COVID-19: गंभीर बीमार हुए बिना ही मरीज का दिल पड़ सकता है खतरे में | health – News in Hindi

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नए कोरोना वायरस (Coronavirus) सार्स-सीओवी-2 की वजह से होने वाली बीमारी कोविड-19 (Covid-19) को लेकर रोजाना नई-नई बातें सामने आ रही हैं. इन्हीं में से एक ये है कि कोविड-19 सिर्फ मरीज के फेफड़ों को ही नहीं बल्कि हृदय, किडनी, स्किन, तंत्रिका तंत्र और पाचन तंत्र (Digestive System) को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है. इसका ताजा उदाहरण उर्दू के मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) हैं, जिन्हें कोविड-19 इंफेक्शन होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान ही हार्ट अटैक (Heart Attack) की वजह से उनकी मृत्यु हो गई.

रिकवर हो चुके मरीज के हृदय को भी क्षतिग्रस्त करता है वायरस
जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) कार्डियोलॉजी में 27 जुलाई को प्रकाशित स्टडी में जर्मनी के अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि ये नया वायरल इंफेक्शन कोविड-19, सिर्फ संक्रमित मरीज के ही नहीं बल्कि बीमारी से रिकवर हो चुके मरीजों के हृदय को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मरीज को कोविड-19 का गंभीर इंफेक्शन हुआ था या फिर हल्के लक्षणों वाला इंफेक्शन. इस रिसर्च में अनुसंधानकर्ताओं ने कोविड-19 बीमारी से उबर चुके 100 लोगों की कार्डिएक एमआरआई की जांच की और फिर इस एमआरआई की तुलना ऐसे 100 मरीजों से की, जिनकी उम्र और लाइफस्टाइल तो उन 100 मरीजों से मिलती-जुलती थी, लेकिन उन्हें कोविड-19 का संक्रमण कभी नहीं हुआ था.100 में से 76 में कार्डिएक इंजरी के संकेत

अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत उम्र 49 साल थी और इन 100 मरीजों में से करीब दो तिहाई मरीज ऐसे थे जो घर पर रहकर ही कोविड-19 संक्रमण से उबर गए थे. इन मरीजों के ठीक होने के करीब 2 महीने बाद जब उनकी जांच की गई तो इनमें से ज्यादातर मरीजों में हृदय संबंधी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलीं. स्टडी में पता चला कि 100 में से 78 मरीजों के एमआरआई स्कैन में उनके हृदय के आकार में बदलाव नजर आया और 76 मरीजों में कार्डिएक इंजूरी के संकेत भी मिले थे, जैसा कि आमतौर पर हार्ट अटैक के बाद देखने को मिलता है. इतना ही नहीं, 100 में से करीब 60 मरीजों में हृदय में इन्फ्लेमेशन की समस्या भी देखने को मिली, जिसे मायोकार्डाइटिस कहते हैं.

मृत मरीजों के हृदय में बहुत अधिक मात्रा में था वायरस
स्टडी में शामिल वैज्ञानिकों ने एक और हैरान करने वाली बात यह देखी कि ज्यादातर मरीजों की उम्र कम थी और वे युवा थे और उन लोगों ने कोविड-19 का इंफेक्शन होने से पहले किसी तरह की बीमारी की शिकायत नहीं की थी, हृदय से जुड़ी समस्या की तो बिल्कुल नहीं. जामा कार्डियोलॉजी नाम की उसी पत्रिका में प्रकाशित एक और स्टडी में कोविड-19 से मरने वाले मरीजों की जांच करने पर पता चला कि मृत मरीजों के हृदय में बहुत अधिक तादाद में वायरस पाया गया था. कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वाले 39 मरीजों के पोस्टमार्टम से जुड़ी जानकारी में यह बात सामने आयी. इन मरीजों की औसत उम्र 85 साल थी और 39 में से करीब 24 मरीजों में यानी आधे से ज्यादा के हृदय में नया कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 बड़ी मात्रा में पाया गया था.

हार्ट फेलियर जैसी घटनाएं बढ़ने का खतरा

इस स्टडी के निष्कर्षों के साथ ही इससे पहले हुए अध्ययनों में भी कोविड-19 से उत्पन्न होने वाली हृदय की जटिलताओं के बारे में जो बताया गया है उसे देखते हुए हृदय रोग विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यह वायरल इंफेक्शन का मरीज के हृदय पर किस तरह का दीर्घकालिक असर हो सकता है और वह भी मरीज द्वारा इंफेक्शन से पूरी तरह से उबरने के बाद भी. हृदय रोग विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि कोविड-19, हार्ट फेलियर जैसी हृदय से जुड़ी घटनाओं में भी तेजी ला सकता है.

जामा कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इन दोनों अध्ययनों से पहले यूरोपियन हार्ट जर्नल में ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की एक स्टडी प्रकाशित हुई थी, जिसमें अस्पतालों में भर्ती 69 देशों के 1200 से ज्यादा कोविड-19 मरीजों के हार्ट स्कैन या ईसीजी को देखा गया था. इसमें यह पाया गया कि करीब 55 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में कोविड-19 इंफेक्शन की वजह से हृदय से जुड़ी जटिलताएं उत्पन्न हो गई थीं. इतना ही नहीं हर 7 में के 1 मरीज में हृदय से जुड़ी गंभीर जटिलता देखने को मिली.

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अब भी यह पता लगाने के लिए रिसर्च जारी है कि क्या कोविड-19 से उत्पन्न जटिलताएं दूर होंगी या फिर इस इंफेक्शन की वजह से मरीज के हृदय को स्थायी रूप से नुकसान पहुंच सकता है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, हृदय रोग के मरीजों के लिए क्यों जानलेवा हो सकता है कोविड-19 के बारे में पढ़ें।

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