भारत में लोकप्रिय हो चुका है बैडमिंटन, ओलिंपिक में मेडल की उम्मीद, जानिए इस खेल के सभी नियम | others – News in Hindi

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नई दिल्ली. भारत को ओलिंपिक गेम्स में जिन खेलों में मेडल की उम्मीद है उसमें बैडमिंटन (Badminton) प्रमुख है. देश को टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympic) में वर्ल्ड चैंपियन पीवी सिंधु से उम्मीद है कि वह सिल्वर मेडल को गोल्ड में बदल देंगी. बैडमिंटन खेल को भारत में 1980 के दशक में प्रकाश पादुकोण ने पहचान दिलाई थी. इस खेल की लोकप्रियता देश में काफी बढ़ गई है. जानिए इस खेल के नियम

बैडमिंटन का ओलिंपिक सफर
बार्सिलोना 1992 ओलिंपिक खेलों में बैडमिंटन एक आधिकारिक खेल बन गया. टोक्यो 2020 की प्रतियोगिता में पुरुष और महिला सिंगल्स, पुरुष और महिला डबल्स, और मिक्स्ड डबल्स शामिल होंगे. भारत की वुमेंस वर्ल्ड चैंपियन और रियो 2016 की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु (PV Sindhu) की नज़र अपने देश के लिए पहला बैडमिंटन ओलंपिक खिताब हासिल करने पर होगी.

बैडमिंटन कोर्ट का साइज या शटलकॉकएकल में एक बैडमिंटन कोर्ट 13.41 मीटर (44 फीट) लम्बा और 5.18 मीटर (17 फीट) चौड़ा होता है। वहीं, युगल में चौड़ाई 6.1 मीटर (20 फीट) हो जाती है. नेट का ऊपरी सिरा 1.55 मीटर (5 फीट 1 इंच) ऊंचा होता है और 1.52 मीटर (5 फीट) ऊंचा मध्य में होता है. किसी भी सर्विस को शॉर्ट सर्विस लाइन को पार करना जरूरी होता है, जो नेट से 1.98 मीटर (6.5 फीट) की दूरी पर खिंची होती है.

शॉर्ट सर्विस लाइन के बाद, एक लाइन बीच में खिंची होती है जो दाएं और बाएं सर्विस कोर्ट को विभाजित करती है. बेसलाइन से 0.76 मीटर (2.5ft) की दूरी पर एक डबल्स सर्विस लाइन भी खिंची होती है. इसका मतलब यह हुआ कि हर सर्विस कोर्ट (कुल चार) 3.96 मीटर (13 फीट) लंम्बा और 2.59 मीटर (8.5 फीट) चौड़ा होता है. शटलकाक को बनाने में सिंथेटिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है . एक शटलकॉक में 16 पंख लगाए जाते है. इसका भार 4.74 ग्राम से 5.50 ग्राम के मध्य में रहता है .

खेल की स्कोरिंग
प्रत्येक खेल कुल 21 अंकों का होता है, एक मैच को तीन भागों में विभाजित किया जाता है, यदि दोनों टीमों को 20 -20 अंक प्राप्त होते है, तो यह खेल तब तक जारी रहता है, जब तक किसी एक टीम को दूसरी टीम से अधिक अंक प्राप्त नहीं होते है. यह खेल 29 प्वॉइंट तक जारी रखा जा सकता है, अंत में 29 प्वॉइंट के बाद गोल्डन प्वॉइंट होता है, जो खिलाड़ी इसे जीत लेता है, उसे मैच का विजेता घोषित कर दिया जाता है.

बैडमिंटन शॉट्स
1. ओवरहेड डिफेंसिव क्लियर – इसके लिए खिलाडी हवा में उछलना पड़ता है और शटल को पूरे दबाव के साथ विरोधी खेमे की ओर नीचे की तरफ दबाया जाता है.

2. अंडरआर्म डिफेन्स स्ट्रोक – अंडरआर्म डिफेन्स स्ट्रोक में शटल नीचे से ऊपर की ओर जाती है और विरोधी के कोर्ट में गिराई जाती है.

3. द ड्राप शॉट – ये बैडमिंटन के खेल का एक और महत्वपूर्ण शॉट है. डिफेंसिव शॉट के उलट यहाँ पर शटल को कोर्ट के किनारे से मारा जाता है ताकि वें ज्यादा ऊंचाई पर न् जाते हुए विरोधी के खेमे में गिरे.

4. स्मैश – ये शॉट काफी मुश्किल होता है. यहाँ खिलाडी को अपना संतुलन बनाकर रखना पड़ता है. स्मैश का इस्तेमाल अक्सर विरोधी को चौंकाने के लिए किया जाता है.

5. जम्प स्मैश – हवा में उठकर शटल विरोधी के खेमे में नीचे की ओर दबाना जम्प स्मैश कहलाता है. इसे का सबसे खतरनाक शॉट माना जाता है.

6. नेट शॉट – इस शॉट के इस्तेमाल से विरोधी हाई शॉट खेलने पर मजबूर हो जाता है. इसे अटैकिंग शॉट भी कहा जाता है.

7. डिफेंसिव नेट लिफ्ट – इस शॉट का इस्तेमाल तब किया जाता है जब विरोधी नेट के पास बहुत अच्छा खेल रहा हो. नेट किल को रोकने के लिए ये शॉट खेला जाता है.

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भारत में बैडमिंटन के स्टार
भारत में बैडमिंटन की शुरुआत प्रकाश पादुकोण ने की थी. उन्होंने देश में इस खेल का पहला सुपर स्टार माना जाता है. प्रकाश पादुकोण ने 1980 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीती थी. इसके पुलैला गोपीचंद आए जिनेहोंने 2001 में प्रकाश पादुकोण की सफलता को दोहराया. गोपीचंद ने इसके बाद अपनी अकेडमी खोली और युवाओं को ट्रेन करना शुरू किया. उनकी मेहनत रंग लाई और उनके अकेडमी से सायना नेहवाल औऱ पीवी सिंधु जैसे चैंपियन निकले.



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