शिक्षा नीति: नई शिक्षा नीति में शिक्षा के अधिकार का कोई जिक्र नहीं: वर्षा गायकवाड – no mention of right to education in new education policy: varsha gaikwad

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मुंबई
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के मूलभूत अधिकार को केंद्र सरकार ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। नई शिक्षा नीति में सिर्फ बड़े-बड़े शब्द ठूंसे गए हैं, जबकि नीति पूरी तरह से अस्पष्ट है। यह बात राज्य की स्कूली शिक्षा मंत्री प्राध्यापक वर्षा गायकवाड ने कही है।

भारतरत्न स्व. राजीव गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर बुधवार को मुंबई कांग्रेस द्वारा आयोजित एक वेबीनार में वर्षा गायकवाड बोल रही थी। मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष एकनाथ गायकवाड की अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ डिजिटल परिसंवाद में वर्षा गायकवाड के अलावा कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर, एआईसीसी के सचिव आशीष दुआ, सोनल पटेल, प्रवक्ता गौरव वल्लभ और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष निरंजन कुंदन भी थे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर अपने विचार रखते हुए वर्षा गायकवाड ने कहा कि 1968 में इंदिरा गांधी और 1986 में राजीव गांधी ने जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस देश को दी थी उसमें सभी को शिक्षा का समान अधिकार मिला था। परंतु भाजपा की नई शिक्षा नीति में सिर्फ ग्लोबल सिटीजनशिप और ऑनलाइन शिक्षा का बोलबाला देखने को मिलता है।

नई शिक्षा नीति में प्री प्राइमरी एजुकेशन को स्कूल एजुकेशन से जोड़ने की कोशिश की गई है लेकिन प्री प्राइमरी एजुकेशन के लिए शिक्षकों की उपलब्धता, उनकी ट्रेनिंग आदि के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। नई शिक्षा नीति का जो ड्राफ्ट हमने देखा था उसमें से कई सारी चीजें हटा दी गई है। मार्जिनल वर्ग को जानबूझकर अनदेखा कर दिया गया है। नई शिक्षा नीति का जो मसौदा हमें दिखाया गया था उसमें उर्दू मीडियम और मुस्लिम एजुकेशन का जिक्र था जो अब गायब है। ऑनलाइन शिक्षा का नई शिक्षा नीति में काफी असर दिखाई देता है, लेकिन देश की स्थितियां इससे बहुत अलग हैं। देश के कई इलाकों में बिजली की नियमित आपूर्ति नहीं है। देशभर के सिर्फ 8% स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध है। सिर्फ 4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है।

नई शिक्षा नीति का मकसद राजनीतिक: केतकर
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर ने परिसंवाद में सीधा आरोप लगाया कि इस नई शिक्षा नीति का मकसद ही राजनीतिक है। उन्होंने कहा कि भारत में हर राज्य की अलग स्थानीय भाषा है। उन भाषाओं में शिक्षा दी जाती है। उन भाषाओं के अलग स्कूल हैं । उनका इस नई शिक्षा नीति में कोई उल्लेख नहीं है। इस शिक्षा नीति का मकसद आरएसऐस का एजेंडा लागू करना है।

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