सुशांत सिंह मौत की सीबीआई जांच से उद्धव सरकार की परेशानियां बढ़ी

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हाइलाइट्स:

  • महाराष्‍ट्र विकास अघाड़ी के कई नेता मानते हैं कि सुशांत केस की सीबीआई जांच से उद्धव ठाकरे की मुसीबतें बढ़ने वाली
  • बेटे आदित्‍य ठाकरे की चिंता और गठबंधन धर्म के बीच किस तरह से संतुलन बनाना है यह उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी
  • माना जा रहा है कि सीबीआई पूछताछ के लिए आदित्‍य को बुलाएगी इसके बाद बीजेपी उनके इस्‍तीफे की मांग उठाएगी

सीएल मनोज, मुंबई
महाराष्‍ट्र के सत्‍तारूढ़ गठबंधन महाराष्‍ट्र विकास अघाड़ी के कई नेता मानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत केस की सीबीआई जांच और उस पर होने वाली राजनीति तेज हो गई है, ऐसे में उद्धव ठाकरे की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं। अपने बेटे और मंत्री आदित्‍य ठाकरे के प्रति अपनी और परिवार की चिंता और गठबंधन धर्म के बीच किस तरह से संतुलन बनाना है यह उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता मानते हैं कि सीबीआई जांच इस बात का संकेत है कि बीजेपी और केंद्र का रवैया मातोश्री (उद्धव परिवार) के प्रति और आक्रामक हुआ है। गठबंधन के नेता इस बात से सहमत हैं कि बीजेपी का आदित्‍य ठाकरे को निशाने पर लेना और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी होने से पहले ही सीबीआई जांच की मंजूरी देना- यह सब राजनीति से प्रेरित है। बीजेपी दरअसल उद्धव ठाकरे और शिवसेना से नाराज है कि उन्‍होंने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर एनसीपी और कांग्रेस का हाथ पकड़ा।

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‘बिहार चुनावों को देखकर भी मुद्दे को हवा दी’
ये नेता यह भी मानते है कि आने वाले बिहार चुनावों को देखकर भी बीजेपी ने इस मुद्दे को हवा दी है। गठबंधन के नेता इस बात पर एकमत हैं कि मुख्‍यमंत्री उद्धव और गठबंधन सरकार को आने वाले समय में इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि सीबीआई पूछताछ के लिए आदित्‍य ठाकरे को बुलाए, इसके बाद बीजेपी के उन पर होने वाले हमले बढ़ जाएंगे और वह उनके इस्‍तीफे की भी मांग कर सकती है।

नाम न बताए जाने की शर्त पर महाराष्‍ट्र के एक मंत्री ने कहा, ‘सबकुछ इसी तरह से होना पहले से ही तय है और हमें इससे भावनात्मक और व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि राजनीतिक एकजुटता से निपटना होगा।’

‘व्‍यापक राजनीतिक सलाह करना जरूरी था’
पिछले साल जब शिवसेना गठबंधन सरकार ने गद्दी संभाली उस समय लोग हैरान रह गए जब मुख्‍यमंत्री उद्धव ने अपने बेटे आदित्‍य ठाकरे को मंत्रिमंडल में शामिल किया। बहरहाल, अब गठबंधन नेताओं का मानना है कि बीजेपी के सीबीआई जांच की मांग के बाद उद्धव को अपने परिवार और कुछ वफादारों के बीच विचार विमर्श करने की जगह गठबंधन के भीतर ही व्‍यापक राजनीतिक सलाह मशवरा करना चाहिए था। ऐसा करने से ज्‍यादा रणनीतिक और आक्रामक राजनीतिक प्रतिक्रिया दी जा सकती थी, जिसमें खुद सीबीआई जांच की मांग करना शामिल हो सकता था।

गठबंधन के नेताओं को उस समय निराशा और हैरानी हुई जब उन्हें पता चला कि सीएम ने शिवसेना के मंत्री अनिल परब को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बात करने भेजा कि शायद सीबीआई जांच की बीजेपी की मांग को कुछ कम कराया जा सके। हालांकि, इसमें उन्‍हें कामयाबी नहीं मिली।

राज्‍य में गठबंधन के एक नेता का कहना है, ‘बहुत से विपक्षी नेताओं और राजनीतिक परिवारों को केंद्रीय एजेंसियों की जांच का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वह इसका मुकाबला कर रहे हैं। ठाकरे भी अब उसी सूची में जुड़ गए हैं।

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