Mee Raqsam review: A Glorious Father-daughter bond drama carries film about religious intolerance | देश की गंगा-जमुनी तहजीब को बेहद सलीके से दिखाती है ‘मी रकसम’, बाप-बेटी के रिश्ते के इर्द-गिर्द बुनी गई इसकी कहानी

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उमेश उपाध्याय12 घंटे पहले

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‘मी रकसम’ का प्रीमियर ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर 21 अगस्त को हो चुका है।

फिल्म: ‘मी रकसम’
निर्देशक: बाबा आजमी
रेटिंग: 4/5
स्टार कास्ट: नसीरुद्दीन शाह, अदिति सुबेदी, दानिश हुसैन, श्रद्धा कौल, राकेश चतुर्वेदी ओम, सुदीप्त सिंह, कौस्तुभ शुक्ला
म्यूजिक डायरेक्टर: रिपुल शर्मा
प्लेटफार्म: ZEE5
अवधि: 1.35 घंटा

ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई फिल्म ‘मी रकसम’ सही मायने में भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को आईना दिखाती है। इसकी कहानी एक बाप-बेटी के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इसमें एक तरफ पिता का संघर्ष दिखाया गया है तो दूसरी तरफ बेटी अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। लेकिन उनके इस सफर में बाधाएं ही बाधाएं आती हैं।

कहानी के अनुसार एक मुस्लिम लड़की मरियम (अदिति सुबेदी) अपनी पढ़ाई और जुनून के साथ भरतनाट्यम नृत्य सीखना चाहती है। बेटी का सपना पूरा करने के लिए उसका अब्बू सलीम (दानिश हुसैन) जो कि पेशे से दर्जी है, हरसंभव कोशिश करता है।

पिता देता है बेटी का साथ

सलीम अपनी बेटी का दाखिला भरतनाट्यम नृत्य सिखाने वाली टीचर उमा (सुदीप्त सिंह) की क्लास में करवा देता है। लेकिन ऐसा करने से उसके रूढ़िवादी रिश्तेदार, उसके समुदाय के लोग और बड़े हाशिम सेठ (नसीरुद्दीन शाह) नाराज होकर उसके खिलाफ हो जाते हैं। दूसरी तरफ भरतनाट्यम अकादमी के मुख्य संरक्षक जयप्रकाश (राकेश चतुर्वेदी ओम) को भी ये बात अखरती है कि एक मुस्लिम लड़की होने के बाद भी मरियम बड़े जुनून के साथ भरतनाट्यम सीख रही है।

फैसले से पीछे नहीं हटता पिता

मरियम के सपने को चकनाचूर करने के लिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरफ से खूब अड़ंगा लगाते हैं। लेकिन इसके बाद भी मरियम के अब्बू अपने फैसले से बिल्कुल पीछे नहीं हटते हैं। तो क्या इतने दबाव के बाद भी मरियम अपना सपना पूरा कर पाने में सफल हो पाती है या समाज का कहना मान भरतनाट्यम सीखने का सपना छोड़ देती है, यही आगे फिल्म में बताया गया है।

बेहतरीन संगीत, उम्दा अभिनय

फिल्म की कहानी को ऐसे ताने-बाने के साथ बुना गया है कि समाज की रूढ़िवादिता पर कुठाराघात करते हुए गंगा-जमुनी तहजीब की सीख दे जाती है। निर्देशन के क्षेत्र में पहली बार उतरे बाबा आजमी ने एक-एक सीन को बखूबी फिल्माया है। लोकेशन की बात की जाए तो कहानी के मुताबिक सारे सीन एकदम नेचुरल लगते हैं।

फिल्म के संगीत में शास्त्रीय और सूफी का ऐसा बेहतरीन मिश्रण किया गया है, जो नया और हटकर है। म्यूजिक डायरेक्टर रिपुल शर्मा की यह नई कोशिश कानों को पसंद आती है।

अभिनय की बात की जाए तो नवोदित अदाकारा अदिति में भविष्य की स्टार बनने की काबिलियत नजर आती है। वहीं दूसरी तरफ दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के सामने दानिश हुसैन की परफारमेंस बड़ी दमदार लगती है।

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