Sushant Singh Rajput Case CBI Probe | Why Is Shiv Sena Party And Uddhav Thackeray Maharashtra Government Afraid And Scared Of CBI | शिवसेना को क्यों डर लग रहा है सुशांत केस में सीबीआई जांच से? कहीं महाराष्ट्र में सरकार जाने का डर तो नहीं?

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एक दिन पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

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  • सीबीआई को जांच सौंपने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना ने दी तीखी प्रतिक्रिया
  • उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने किया था सीबीआई जांच का स्वागत

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले ने शिवसेना को परेशानी में डाल दिया है। जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर शिवसेना का रिएक्शन आया, उससे कई सवाल उठ रहे हैं कि सीबीआई की जांच से सब खुश हैं तो महाराष्ट्र की सत्तासीन पार्टी को उसमें क्या दिक्कत हो रही है। खैर, सुशांत की कथित आत्महत्या को लेकर महाराष्ट्र में सियासी घमासान शुरू हो गया है, यह तय है।

कुछ लोग मराठी माणुस यानी मुंबई पुलिस की क्षमता पर सवाल उठाए जाने को शिवसेना की बौखलाहट से जोड़ रहे हैं। जबकि, बात इससे भी बढ़कर है। सुशांत की मौत को लेकर कई तरह की कहानियां सोशल मीडिया में आईं और जो सबसे ज्यादा चर्चित हुई, उसमें उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की आत्महत्या से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और राज्य के मंत्री आदित्य ठाकरे का गहरा कनेक्शन बताया जा रहा है।

मुंबई में शिवसेना की पॉलिटिक्स को 25 वर्षों से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत शिंदे का कहना है कि आदित्य ठाकरे का फिल्मी कनेक्शन सबको पता है। यह कोई नई बात नहीं है। वह पहले भी फिल्मी पार्टियों का हिस्सा बनते आए हैं। बॉलीवुड में कई स्टार उनके दोस्त हैं। इससे पहले भी आदित्य का नाम बॉलीवुड की एक एक्ट्रेस के साथ जोड़ा गया था।

यह तो साफ है कि आदित्य का अपना सर्कल है और उसमें फिल्मी सितारे भी हैं। सोशल मीडिया पर चल रही कहानियों में एक पोर्टल इंटरव्यूटाइम्स.नेट पर प्रकाशित कहानी के कुछ तथ्य सच भी साबित हुए हैं। इसमें ही आदित्य ठाकरे के कनेक्शन को मजबूती से स्थापित किया गया है। सुशांत का घर छोड़ने से पहले रिया चक्रवर्ती की महेश भट्ट से हुई बातचीत भी इसी पोर्टल पर सबसे पहले सार्वजनिक हुई थी। अब वायरल पोस्ट इसे सही साबित कर रही हैं।

एक और कहानी यह भी चल रही है कि दिशा सालियान केस से जुड़े कुछ दस्तावेज पुलिस थाने से गुम हो गए हैं। मुंबई पुलिस के बहानों पर किसी को भी यकीन नहीं हो रहा और उंगलियां उस पर ही उठ रही हैं। साफ है कि किसी राजनीतिक दबाव के बिना ऐसा नहीं हुआ होगा।

अब जब जांच सीबीआई के हाथ आ ही गई है तो इस कहानी की सच्चाई भी जल्द ही सामने आएगी, ऐसी उम्मीद है। लेकिन, सवाल है कि महाराष्ट्र की सियासत में क्या हो रहा है? दरअसल, इस मुद्दे पर शिवसेना को सत्ता में सहयोगी पार्टियां एनसीपी और कांग्रेस ने अकेला खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र के गौरव की झंडाबरदारी जिस तरह शिवसेना ने की, उतना दमखम कांग्रेस और एनसीपी ने नहीं दिखाया।

एनसीपी चीफ शरद पवार के पोते और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार तो इस मामले में विपक्ष के साथ खड़े दिखाई दिए। पहले तो उन्होंने सीबीआई जांच की मांग कर दी, फिर जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो ‘सत्यमेव जयते’ लिखकर ट्वीट भी किया। भाजपा के नेता नारायण राणे और उनके बेटे नितेश राणे ने तो इस मामले में आदित्य ठाकरे पर ही मुंबई पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। राणे ने जूनियर ठाकरे को लेकर #BabyPenguinresign हैशटेग शुरू किया और देखते-देखते यह ट्विटर पर वायरल हो गया।

दिव्य मराठी के स्टेट एडिटर संजय आवटे की माने तो कहानी यहां थमने वाली नहीं है। इस मामले में सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को ही होने वाला है। मान लो कि सीबीआई को आदित्य ठाकरे की कोई भूमिका नजर न आए, लेकिन यदि उसे पूछताछ के लिए बुला लिया तो शिवसेना की किरकिरी हो जाएगी। तब दो संभावनाएं बनेंगी। पहली, सहयोगी पार्टियां आदित्य और उद्धव पर इस्तीफे के लिए दबाव भी बना सकती हैं। ऐसे में भाजपा को शिवसेना पर दबाव बनाकर साथ आने के लिए मजबूर करने का मौका मिलेगा। दूसरा, एनसीपी शिवसेना का साथ छोड़कर भाजपा के साथ जा सकती है। अजित पवार पहले भी ऐसा कर चुके हैं और आधी रात को देवेंद्र फडणवीस के साथ सरकार भी बना चुके हैं।

जो बात आवटे कह रहे हैं, वह मुंबई के कई पत्रकार कह रहे हैं। कारण यह है कि महाराष्ट्र में सरकार बनने के नौ महीने बाद भी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार स्थिर नहीं हो सकी है। तीनों में समन्वय बन ही नहीं पा रहा। तभी तो निगम-मंडलों में होने वाली राजनीतिक नियुक्तियां अब भी अधर में हैं। इतना ही नहीं, विधानमंडल में 12 नामांकित विधायकों की नियुक्ति का मामला भी आगे नहीं बढ़ पाया है। सरकार अब तक नाम ही फाइनल नहीं कर पाई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवसेना के कई कार्यकर्ता भी अपनी सरकार में खुश नहीं है। लेकिन, बोल कुछ नहीं सकते।

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