यूपी विधानसभा सचिवालयः मुख्यमंत्रियों के तैल चित्रों के लिए ब्रान्ड पर बहाये साढे़ सात करोड़,प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने झाड़़ा पल्ला,कहा वित्त विभाग जाने

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों ने सरकारी और जनता के धन की ऐसी लूट मचा रखी है जो शायद ही अन्य राज्य में हो। करोड़ों रूपये सरकार के खजाने से दिन ब दिन गायब होते जा रहे है जैसे मानों गधे के सिर से सींग। बावजूद इसके अधिकारी डकार भी नही आने दे रहे है। इसका उदाहरण पीडब्ल्यूडी द्वारा विधानसभा सचिवालय में लगायी गयी पूर्व एवं वर्तमान मुख्यमंत्रियों की पेंन्टिंगस् है। जिनकी कीमत लाखों में है।

हालांकि यह पेन्टिंग्स तो बानगी भर है फिर भी देखना यह होगा कि इन पेन्टिंस् में ऐसा खास क्या है जिसकी वजह से यह पेंिटन्ग्स लाखों की कीमत की है। इन पेन्टिग्स् को लगवाने केे लिए करोड़ों रूपये पानी की तरह बहा दिये गये।

इसके लिए जिम्मेदार लोगों का कहना है कि बत्तीस लाख बीस हजार रूपये प्रति पेन्टिग जो खर्च किया गया वह पेन्टिग पर नही किशन-कन्हाई ब्रान्ड पर खर्च किये गये। इससे ऐसा लगता है कि यहां पर कलाकार की कोई कीमत नही । अगर कीमत है तो वह ब्रान्ड की। उत्तर प्रदेश के विधानसभा सचिवालय का हाल पूर्व मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी से लेकर वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक के आयल पेंटिंग्स् सजाया गया है।

यह पेन्ट्ग्सि वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समय में मथुरा की एक कम्पनी द्वारा बनवाई गयी थी। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समय में पूर्व मुख्यमंत्रियोें के तैल चित्र विधानसभा सचिवालय में लगाने का प्रस्ताव सरकार के सामने प्रस्तुत किया गया था। इस प्रस्ताव के पास होने के बाद इन तैल चित्रों को बनवाने और लगाने की पूरी जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को दी गयी थी और पीडब्ल्यूडी ने सरकार और जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई का ऐसा सदुपयोग किया कि इसे जांच का विषय ही बना दिया।

विधानसभा सचिवालय के हाल में लगाई गयी इन 21 पेन्टिग्स् को बनाने की जिम्मेदारी पद्वम्श्री अवार्ड से सम्मानित मथुरा की किशन-कन्हाई इन्डियन आर्टिस्ट नाम की कम्पनी को दी गयी। इस कम्पनी केे माध्यम से जो वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों के चित्र बनवाये गये उस एक चित्र की कीमत बत्तीस लाख बीस हजार रूपये है। इस तरह से देखा जाये तो विधानसभा सचिवालय के हाल में लगे इन 21 तैल चित्रों की कीमत करीब सात करोड़ आठ लाख चालीस हजार रूपये मथुरा की इस कम्पनी किशन-कन्हाई को सरकारी खजाने से भुगतान किया गया।

इन तैल चित्रों में एक चित्र का साइज 4ग7 है और कीमत बत्तीस लाख बीस हजार रूपये है। गौरतलब बात यह है कि एक तैल चित्र की कीमत इतनी ज्यादा है जो कल्पना से भी परे है। जानकारों का कहना है कि एक तैल चित्र की कीमत में ही सारें चित्र बनवाये जा सकते थे। लेकिन अगर ऐसा होता तो सरकारी धन की लूट खसोट कैसे हो पाती।

क्या कहते है पीडब्ल्यूडी के जेई सुरेश कुमार दुबे

पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्रियों के तैल चित्र बनवाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के जेई सुरेश कुमार दुबे को दी गयी थी। इतने महंगे तैल चित्रों के सम्बन्ध में जब सुरेश कुमार दुबे से बात की गयी तो उनका कहना है कि पैसा तैल चित्रों पर नही किशन-कन्हाई ब्रान्ड पर खर्च किया गया।
क्यों कि किशन-कन्हाई ऐसा ब्रान्ड है कि जहां पर पिता और पुत्र दोनों को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। अब ऐसे ब्रान्ड से काम करायेगे तो महंगा होगा ही। जब श्री दुबे से इसे सरकारी धन का दुरूपयोग कहा गया तो उनका कहना था कि यह तो काफी सस्ते में काम हुआ है।
किशन-कन्हाई तो इन्हीं तैल चित्रों के प्रति तैल चित्र एक करोड़ रूपये मांग रहे थे। वह तो उन्होंने सरकार पर एहसान करते हुए एक करोड़ की कीमत वाली पेन्टिग््स मात्र बत्तीस लाख बीस हजार रूपये में ही बना दी। श्री दुबे की माने तो सिर्फ 19 पेन्टिग्स् ही लगी है।

क्या कहते है विधानसभा सचिवालय प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे

इस सम्बन्ध में विधानसभा सचिवालय के कर्ताधर्ता प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे से बात की गयी तो उन्होंने इस मामले से सिरे ही पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि कौन सा कितना महंगा काम कहां से कराया जा रहा है यह सब वित विभाग की जिम्मेदारी है।

जबकि गौरतलब है कि किसी भी काम के लिए प्रस्ताव यही से और प्रमुख सचिव स्तर से जाती थी। फिर भी प्रमुख सचिव ने इस मामले में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।

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