Defendants’ attempt to delay in deciding the case, sharp comment of special court on non-filing of written arguments | बचाव पक्ष का मामले को निर्णित करने में देरी का प्रयास, लिखित बहस न दाखिल करने पर विशेष अदालत की तीखी टिप्पणी

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लखनऊ18 घंटे पहले

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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई कर रही विशेष सीबीआई अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए बुधवार को कहा कि पूर्व में दो बार समय देने के बावजूद बचाव पक्ष ने अभी तक अपनी लिखित दलीलें पेश नहीं की हैं।

  • अदालत ने कहा है कि ऐसा लगता है कि बचाव पक्ष मामले निर्णित करने में देरी चाहता है
  • दो बार मौका दिए जाने के बाद भी बचाव पक्ष की तरफ से अब तक लिखित बहस दाखिल नहीं हुई है

अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले की सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष कोर्ट ने बुधवार को अपनी टिप्पणी में कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि बचाव पक्ष मामले को निर्णित करने में देरी कराना चाहता है। कोर्ट ने कहा कि दो बार मौका दिये जाने के बावजूद बचाव पक्ष ने अब तक लिखित बहस दाखिल नहीं की है।

विशेष जज एसके यादव ने बचाव पक्ष द्वारा लिखित बहस दाखिल करने के लिए मांगे गए 31 अगस्त तक के समय को भी नहीं स्वीकार किया। कोर्ट ने गुरूवार तक लिखित बहस दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके पूर्व कोर्ट बचाव पक्ष को 21 और 24 अगस्त को भी समय दे चुकी है।

कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 30 सितम्बर तक दी गई समय सीमा में मामले को निर्णित करना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बड़ी संख्या में दस्तावेज हैं व गवाहों की संख्या भी काफी ज्यादा है, इसलिए निर्णय लिखाने में भी कोर्ट को काफी वक्त लगेगा बावजूद इसके बचाव पक्ष बार-बार समय बढ़ाए जाने की मांग कर रहा है।

30 सितम्बर तक आएगा फैसला

बाबरी मस्जिद गिराने के मामले में लखनऊ की विशेष अदालत का फैसला अब 30 सितंबर तक आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष जज एसके यादव की ट्रायल की स्टेट्स रिपोर्ट देखने के बाद यह फैसला लिया था। पहले सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त तक का समय दिया था। इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत कई बड़े नेता आरोपी हैं।

24 जुलाई को आडवाणी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना बयान दर्ज कराया था। सुनवाई 4.5 घंटे चली थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने आडवाणी से 100 से ज्यादा सवाल पूछे थे। अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को ‘कारसेवकों’ ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था।

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