Lockdown हापुड़ के टीचर के लिए लाया खुशियां, इस वजह से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम | hapur – News in Hindi

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लॉकडाउन की वजह से बना टीचर ने बनाया रिकॉर्ड.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हापुड़ (Hapur) में रहने वाले अध्‍यापक अजय मित्‍तल के लिए कोरोना वायरस की वजह से लगा लॉकडाउन खुशियां लेकर आया है. इस दौरान उन्‍होंने सुई से छोटी सी कांच की प्‍लेट श्री राम चरितमानस (Shri Ram Charitmanas) को उकेर इंडिया बुक ऑफ रिेकॉर्ड में हासिल की है.

हापुड़. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हापुड़ (Hapur) में रहने वाले एक शिक्षक ने एक नया रिकॉर्ड बनाकर देश में जिले का नाम रोशन किया है. इंटर कॉलेज में पढ़ाने वाले अध्‍यापक अजय मित्‍तल ने 500 घंटो की मेहनत के बाद श्री राम चरितमानस (Shri Ram Charitmanas) को सुई से छोटी सी कांच की प्‍लेट पर अंकित कर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है. इंडिया बुक ऑफ रिेकॉर्ड में नाम दर्ज करने पर शहर के लोगों ने उनका स्‍वागत किया.

लॉकडाउन की वजह से बना रिकॉर्ड
हापुड़ के शिवपुरी निवासी अजय मित्‍तल एक इंटर कॉलेज में अध्‍यापक हैं. पर्यावरण को लेकर उनकी पहले से ही रूचि है और इसी को लेकर उन्‍होनें कागज बचाने की मुहिम शुरू की और कागजों पर शब्‍दों को बहुत छोटा छोटा लिखना शुरू किया. इसी से प्रेरणा लेकर उन्‍होनें श्री राम चरितमानस को कांच की एक छोटी सी प्‍लेट पर अंकित किया. 2015 में उन्‍होनें ये कार्य शुरू किया जो समय के अभाव में पूरा नहीं हो सका, लेकिन कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में उन्‍होनें इसे पूरा कर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है. अजय मित्‍तल ने 30.5 सेंटीमीटर लंबाई और 16.05 सेंटीमीटर चौड़ाई वाली कांच की प्‍लेट पर श्री राम चरितमानस को उकेरा है. उनकी इसी उपलब्धि को लेकर शुक्रवार को शहर के लोगों ने उन्‍हें सम्‍मानित किया.

अजय मित्तल ने कही ये बातइंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले शिक्षक अजय मित्तल ने बताया कि उनका शुरू से ही पर्यावरण को लेकर खासा जोर रहा है, इसलिए स्कूल में भी बच्चों को पेड़ लगाने और उन्हें बचाने का संदेश देते हैं. वह लिखने के लिए बहुत ही कम कागज का इस्तेमाल शुरू से करते आ रहे हैं. बहुत कम कागज में बहुत सारा लेखन का कार्य करते हैं और इसी से उन्हें प्रेरणा मिली की भागवत गीता और श्री राम चरितमानस ग्रंथों की किताबें काफी बड़ी हैं लोग उन्हें अलमारी में रखते हैं. इसलिए उन्होंने सोचा कि लोगों के सामने यह ग्रंथ सूक्ष्म रूप में रहेंगे तो लोग इन ग्रंथों से प्रेरणा ले सकेंगे. इसी के तहत उन्होंने 2015 में भागवत गीता और अब 2020 में श्री राम चरितमानस को सुई से कांच की प्लेट पर उकेरा है जिसे इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है.

देवी देवताओं के 12 चित्र भी बनाए
अजय मित्तल ने बताया कि इस कांच की प्लेट के बीच में हिंदू देवी देवताओं के 12 चित्र भी बनाए गए हैं, जिसमें प्रभु श्री राम के परिवार सहित शिव और रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मीकि का चित्र भी शामिल है.

बिना लेंस नहीं पढ़ सकेंगे श्री राम चरितमानस
कांच पर सुई से लिखी गई श्री राम चरितमानस के शब्द बहुत सूक्ष्म है, जिन्हें साधारण आंखों से नहीं देखा जा सकता. लिहाजा लेंस का प्रयोग करके ही श्री राम चरितमानस को पढ़ा जा सकता है.



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