कंधे को मजबूत बनाएंगे ये योगासन, पीठ और कमर दर्द भी होगा दूर | health – News in Hindi

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योग (Yoga) करने के बाद सबसे ज्यादा जरूरी है शरीर को रिलैक्स (Relax) करना और इसके लिए शवासन और प्राणायाम जरूर करें. योग करने के बाद मांसपेशियों को रिलैक्स करना बहुत जजरूरी होता है ताकि शरीर का तनाव (Stress) और दर्द (Pain) दूर हो सके. दिनभर घर बैठे काम करने वाले लोगों को बॉडी लूजनिंग और फैट बर्निंग के योगासन करने चाहिए. योग को कम से कम एक घंटा जरूर दें. इन योग अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव से भी मुक्ति मिलती है. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कमर (Waist) को लचीला बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. साथ ही पेट की चर्बी को भी कम करना पड़ता है. ऐसा करने से आपका शरीर ने केवल बाहर से सुंदर दिखता है बल्कि शरीर अंदर से भी हेल्दी रहता है.

भद्रासन
‘भद्र’ का मतलब होता है ‘अनुकूल’ या ‘सुन्दर’. यह आसन लम्बे समय तक ध्यान / मेडीटेसन में बैठे रहने के लिए अनुकूल है और इससे शरीर निरोग और सुंदर रहने के कारण इसे भद्रासन कहा जाता है. भद्रासन कई प्रकार से किया जाता है.

भद्रासन करने का तरीकासबसे पहले एक समान और समतल जगह पर दरी या चटाई या योग मैट बिछा दें.

अब वज्रासन में बैठ जाएं.
अब घुटनों को जितना संभव हो उतना दूर रखें.
पैर के पंजो को इस तरह रखे की पैरों की उंगलियों का संपर्क जमीन से रहे और नितम्ब (हिप्स) को पंजो के बीच जमीन पर रखें.
दोनों हाथों की हथेलियों को नीचे की ओर घुटनों पर रखें.
शरीर को स्थिर और सीधा रखें. कमर-गर्दन सीधी रहनी चाहिए.
अब नाक के अग्र (फ्रंट ) पर दृष्टि केंद्रित करें.

भद्रासन के लाभ
मेडिटेशन में बैठने के लिए एक उपयोगी आसन है.
एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और दिमाग तेज होता है.
मन की चंचलता कम होती है.
प्रजनन शक्ति बढ़ाता है.
पाचन शक्ति ठीक रहती है.
पैर के स्नायु मजबूत होते हैं.
सिरदर्द, कमरदर्द, आंखों की कमजोरी, अनिद्रा और हिचकी जैसी समस्या में राहत मिलती है.

मलासन
मल निकालते वक्त हम जिस अवस्था में बैठते हैं उसे मलासन कहते हैं. बैठने की यह स्थति पेट और पीठ के लिए बहुत ही लाभदायक रहती है.

कैसे करें मलासन
दोनों घुटनों को मोड़ते हुए मल त्याग करने वाली अवस्था में बैठ जाएं. फिर दाएं हाथ की कांख को दाएं और बाएं हाथ की कांख को बाएं घुटने पर टिकाते हुए दोनों हाथ को मिला दें (नमस्कार मुद्रा). उक्त स्थिति में कुछ देर तक रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं.

मलासन के फायदे
मलासन से घुटनों, जोड़ों, पीठ और पेट का तनाव खत्म होता है और इनका दर्द कम होता है. इससे कब्ज और गैस की समस्या से भी मुक्ति मिलती है.

तितली आसन
तितली आसन करने के लिए अपने दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा कर के बैठ जाएं. रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. अब पैरों को मोड़कर हाथों की उंगलियों को पैरों के पंजों के ऊपर लाकर आपस में मिला दें. इस दौरान आपकी एडियां शरीर से सटी हुई होनी चाहिए. सामान्‍य रूप से सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर ले जाएं और फिर नीचे लाएं. आपको ऐसा 15 से 20 बार करना है.

ताड़ासन
ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.

ताड़ासन करने का तरीका
इसके लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें.
अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें.
खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें.
इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें.
फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं.
इस तरह से एक चक्र पूरा होता है.

ताड़ासन के फायदे
वजन कम करता है
हाइट बढ़ाता है
पीठ के दर्द में लाभदायक
मांसपेशियों के दर्द में आराम
घुटने और पैरों के दर्द में राहत

उष्ट्रासन
उष्ट्रासन में शरीर ऊंट की आकृति बनाता है. जैसे ऊंट रेगिस्तान के मुश्किल हालातों में भी आसानी से रह सकता है, अगर इस आसन का अभ्यास नियमित तौर पर किया जाए तो ये शरीर से हर शारीरिक और मानसिक परेशानी को दूर करके स्वस्थ जीवन देने में मदद करता है.

उष्ट्रासन के फायदे
पाचन सुधारने में मदद करता है
सीने और पेट के निचले हिस्से से अतिरिक्त चर्बी कम होती है
कमर और कंधों को मजबूत बनाता है
कमर के निचले हिस्से में दर्द कम करने में मदद करता है
इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है.
शरीर का पोश्चर सुधारने में भी ये आसन मदद करता है.

सुखासन
‘सुखासन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है. पहला शब्द है सुख जिसका अ​​र्थ ‘आराम’ या ‘आनंद’ है जबकि आसन का ​अर्थ बैठना होता है. सुखासन को ईजी पोज/ डीसेंट पोज या प्लीजेंट पोज (Easy Pose/Decent Pose/Pleasant Pose) भी कहा जाता है. सुखासन को किसी भी उम्र और लेवल के योगी कर सकते हैं. बैठकर किया जाने वाले सुखासन सरल होने के साथ ही उपयोगी भी है. इस आसन के अभ्यास से घुटनों और टखने में खिंचाव आता है. इसके अलावा ये पीठ को भी मजबूत करने में मदद करता है. सुखासन कई रोगों को दूर करने में भी मदद करता है. कई मानसिक और शारीरिक बीमारियां भी इसके नियमित अभ्यास से ठीक होती देखी गई हैं. इसके नियमित अभ्यास से चक्र और कुंडलिनी जागरण में भी मदद मिलती है.

सुखासन के फायदे
ये शरीर और दिमाग के बीच शांति और स्थिरता की भावना विकसित करता है. ये दिमाग को शांति देता है. इसके अभ्यास से थकान, स्ट्रेस, टेंशन, एंग्जाइटी और डिप्रेशन को दूर करने में मदद मिलती है. इसके नियमित अभ्यास से चेस्ट और कॉलर बोन्स चौड़े हो जाते हैं. सुखासन के अभ्यास से शरीर का संतुलन सुधरता है. इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी सीधी हो जाती है. सुखासन से पीठ को मजबूत और सख्त बनाने में मदद मिलती है. इस आसन को करने से घुटनों और टखनों को अच्छा खिंचाव मिलता है.

उत्तानपाद आसन
उत्तानपाद आसन के अभ्यास करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई या दरी बिछाएं और सीधे लेट जाएं. अब श्वास भरते हुए बिना घुटनों को मोड़ें पैरों को 30 डिग्री के कोण तक उठाएं और जितनी देर इस स्थिति में रुक सकते हैं रुकें और फिर धीरे धीरे श्वास छोड़ते हुए पैरों को नीचे जमीन पर लाएं, पैर नीचे की तरफ लाते हुए ध्यान रखें कि पैर झटके के साथ नीचे न लाएं और न ही पैरों को झटके के साथ ऊपर ले जाएं. दोबारा श्वाश भरते हुए पैरों को 60 डिग्री कोण तक धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाएं और जितनी देर रोक सकें रोकें.

इसके बाद श्वास छोड़ते हुए पैरों को धीरे धीरे नीचे लाएं. इस आसन का अभ्यास शुरूआती दिनों में सिर्फ पांच मिनट तक ही करें और धीरे धीरे अपने क्षमता के अनुसार अभ्यास बढ़ाएं. जिन्हें ह्रदय से सम्बंधित या हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है ऐसे लोग इस आसन का अभ्यास न करें. पीठ दर्द में इस आसन को धीरे धीरे करें और अगर स्लिप डिस्क से सम्बंधित दिक्कत है तो इस आसन का अभ्यास योग्य प्रशिक्षक की देख रेख में ही करें. इस आसन को करने से गुस्से पर नियंत्रण होता है मन शांत रहता है व इसका प्रभाव गोनाड्स ग्रंथि पर पड़ने के कारण शुक्रवाहिनियां स्वस्थ होती हैं.

चक्रासन
चक्र का अर्थ है पहिया. इस आसन में व्यक्ति की आकृति पहिये के समान नजर आती है इसीलिए इसे चक्रासन कहते हैं. यह आसन भी उर्ध्व धनुरासन के समान माना गया है.

कैसे करें चक्रासन
सर्वप्रथम शवासन में लेट जाएं. फिर घुटनों को मोड़कर, तलवों को भूमि पर अच्छे से जमाते हुए एड़ियों को नितंबों से लगाएं. कोहनियों को मोड़ते हुए हाथों की हथेलियों को कंधों के पीछे थोड़े अंतर पर रखें. इस स्थिति में कोहनियां और घुटनें ऊपर की ओर रहते हैं. श्वास अंदर भरकर तलवों और हथेलियों के बल पर कमर-पेट और छाती को आकाश की ओर उठाएं और सिर को कमर की ओर ले जाए. फिर धीरे-धीरे हाथ और पैरों के पंजों को समीप लाने का प्रयास करें, इससे शरीर की चक्र जैसी आकृति बन जाएगी. अब धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए शरीर को ढीला कर, हाथ-पैरों के पंजों को दूर करते हुए कमर और कंधों को भूमि पर टिका दें और फिर शवासन की स्थिति में लौट आएं.

चक्रासन के फायदे
मेरुदंड को लचिला बनाकर शरीर को वृद्धावस्था से दूर रखता है. शरीर में शक्ति और स्फूर्ति बनी रहती है. यह रीढ़, कंधे, कमर, पीठ, पेट सभी को स्वस्थ बनाए रखकर शक्ति प्रदान करता है. यह हृदय प्रणाली को सुचारू रूप से चलायमान रखता है.



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