बलरामपुर अस्पताल:  शासन  मरीजों को मुहैय्या करायेगा बेहतर इलाज या फिर डा0राजीव को सेवा विस्तार देकर अस्पताल को नर्क बनाने का देगा ठेका

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लखनऊ । यौन शोषण ,वित्तीय अनियमितता से लेकर सीनियारिटी जैसे विवादों से घिरे रहे बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा0 राजीव लोचन को शासन एक बार फिर सेवा विस्तार देने की तैयारी में है। कार्यवाहक निदेशक के तौर वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों का दुरूपयोग कर बलरामपुर अस्पताल को बदहाली तक पहुंचाने वाले डा0राजीव लोचन एक बार फिर सेवा विस्तार के लिए लालायित है। जबकि डा0 राजीव लोचन पहले ही बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक के तौर दो वर्ष तक कार्य कर चुके है और एक वर्ष का सेवा विस्तार भी कार्यवाहक निदेशक के तौर पर ही डा0 राजीव लोचन को शासन द्वारा मिल चुका है। बावजूद इसके डा0 राजीव फिर से सेवा विस्तार चाहते है। यहां पर गौर तलब बात यह है कि डा0राजीव कभी भी पूर्णकालिक निदेशक नही रहे है फिर भी शासन-सत्ता पर अपनी अच्छी पकड़ के चलते ही अब तक कार्यवाहक निदेशक का भी सेवा विस्तार पाने में सफल रहे हैं।

विदित हो कि डा0 राजीव 31 अगस्त को सेवा निवृत्त हो रहे है लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र होने का लाभ उठाते हुए इन्होंने एक बार फिर सेवा विस्तार के लिए सरकार से गुहार लगाई है। लेकिन डा0राजीव की कार्यशैली,इन पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप,भ्रष्टाचार एवं अन्य शिकायतों के चलते अब बलरामपुर अस्पताल का पैरामेडिकल स्टाॅफ,नर्सिंग स्टाॅफ और पीएमएस एसोशिएसन लामबन्द हो गया है,और स्वास्थ्य महानिदेशक का घेराव कर डा0 राजीव लोचन को फिर से सेवा विस्तार दिये जाने का विरोध किया हैं।

विदित हो डा0 राजीव लोचन जब से बलरामपुर अस्पताल के निदेशक बने है तब से लगातार विवादों से घिरे हुए है। डा0राजीव लोचन पर कभी संविदा नर्स द्वारा यौन शोषण का आरोप तो कभी अस्पताल में मशीनरी और दवाओं का टोटा तो कभी सीनियर डाक्टरों को पछाड़ कर स्वयं निदेशक बन जाना। यही नही डा0राजीव लोचन वर्तमान में फिर एक बार चर्चा में है। डा0राजीव पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 राम प्रकाश गुप्ता का पुत्र होने का लाभ उठाते हुए सेवानिवृत्ति के अन्तिम चरण में अस्पताल में रेनोवेशन का काम शुरू कराने और अपने सेवा विस्तार के लिए कोरोना काल में शासन के चक्कर लगाने से भी नही चूक रहे है।

तमाम विरोधों के बावजूद डा0 राजीव लोचन ने कोरोना काल में अस्पताल में साफ सुथरी दीवारो को तोड कर टाइल्स् लगवाना शुरू कर दिया है । जबकि अस्पताल जैसी जगह को साफ सुथरा रखने के बजाय जगह जगह कूडे़ के ढे़र लगे हुए है। लेकिन करीब बीस लाख रूपये सालाना का ठेका दिये जाने के बाद भी डा0 राजीव को सफाई व्यवस्था पर ध्यान नही देने की जरूरत नही है। डा0राजीव अस्पताल में नई टाइल्स् फर्श आदि का काम बिना टेण्डर के कराने में ज्यादा रूचि ले रहे है।

यही नही तिकड़मबाजी में माहिर डा0राजीव पूर्व मुख्यमंत्री श्री स्व0 राम प्रकाश गुप्ता के पुत्र होने का पूरा लाभ उठा रहे है। कुछ माह पूर्व एक संविदा नर्स ने डा0 राजीव पर नौकरी करने के एवज में यौन शोषण किये जाने का आरोप लगाया था। हालंकि डा0 राजीव ने इस मामले मे सफाई देते हुए कहा था कि नर्स को संविदा से हटाये जाने के कारण उसने यह आरोप लगाया है। इस मामले की शिकायत के बाद जांच भी शुरू हुई थी लेकिन यहां भी अपने रसूख का इस्तेमाल कर डा0 लोचन ने क्लीन चिट ले ली और मामला रफा-दफा हो गया। यही हाल डा0 राजीव के खिलाफ सीनियारिटी का मामला लेकर कोर्ट गये डाक्टरों का भी हुआ यहां भी डा0 राजीव ने शासन सत्ता में अपनी पहुंच दिखाकर मामले को निपटा दिया।

कोरोना काल में अस्पताल में लगा कूडे़ का ढे़र

डा0 राजीव लोचन 31 अगस्त को सेवा निवृत्त होने वाले है। लेकिन सेवा विस्तार की उम्मीद अभी भी लगाये बैठे है। विवादों से घिरे डा0 राजीव को अस्पताल की साफ सफाई कोई रूचि नही है। लेकिन उनकी अस्पताल में नया निर्माण कार्य और रेनोवेशन के काम में काफी रूचि दिखाई दे रही है।

क्योंकि अस्पताल में जगह जगह लगे कूडे़ के ढे़र जिसकी सफाई के लिए बलरामपुर अस्पताल लगभग बीस लाख रूपये प्रति वर्ष खर्च करता है। फिर भी अस्पताल में जगह जगह गंदगी के अम्बार देखे जा सकते है।
सोशल डिस्टेसिंग की उड़ रही धज्जियां,मरीजों की जान जोखिम में
बलरामपुर अस्पताल में हो रहे निर्माण कार्य के चलते जमकर सोशल डिस्टेन्सिग की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जगह जगह साफ सुथरी दीवारों को तोड़ कर टाइल्स् लगाने का कार्य चल रहा है। कारीगरों और लेबरों द्वारा टाइल्स काटने और सीमेन्ट मौरंग का काम किया जा रहा ।

यह लोग न तो खुद मास्क लगा रहे है और न ही सोशल डिस्टेंसिग का ही ध्यान रख रहे है। यही नही मरीज भी इसी धूल धक्कड़ के बीच स्टेचर पर पडे़ हुए है,और पहले से बीमार मरीजों की जान बलरामपुर अस्पताल में जोखिम में है।
क्या कहते है निदेशक बलरामपुर डा0 राजीव लोचन

इस सम्बन्ध में जब बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा0राजीव लोचन से बात हुई तो उन्होंने बिना टेण्डर के ही हो रहे निर्माण कार्य के बारे में कहा कि टेण्डर क्या होता है। जो काम हो रहा है वह सही है और नियमानुसार हो रहा। यही नही जब डा0 राजीव लोचन से अस्पताल में कोरोना काल में चल रहे निर्माण कार्य के बारे में बात की तो उनका कहना है कि इस समय निर्माण कार्य कराने का सबसे बेहतर समय है अस्पताल खाली है और मरीज आ नही रहे है। जबकि हकीकत यह है कि अस्पताल में वर्तमान में भी करीब दो हजार मरीजों के रजिस्टेशन प्रतिदिन हो रहे है। लेकिन डा0राजीव का कहना है कि अस्पताल खाली है।

बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में बिजली जाने पर जनरेटर या इनर्वटर तक की व्यवस्था नही है। ऐसे समय में इमरजेन्सी में आने वाले मरीजों का रजिस्टेशन और इलाज कर्मचारी व डाक्टर मोबाइल की टाॅर्च जला करते है। लेकिन नवनिर्माण कराने में व्यस्त निदेशक डा0राजीव लोचन इस व्यवस्था पर विक्षिप्तों जैसा जवाब देते है, और कहते है कि अपना देखने का नजरिया बदलों ,समस्या बिजली की नही आपकी नजरों की है।

अपने रसूख के दलदल में गले तक धंसे डा0राजीव ने अस्पताल में इतनी अव्यवस्था फैला रखी है कि मरीजों को न तो पूरी दवा मिल रही है,न मरीजों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है और न ही लाखों रूपये खर्च करने के बाद अस्पताल से कूड़ा निस्तारण की ही उचित व्यवस्था है। बावजूद इसके डा0 राजीव लोचन सेवा विस्तार की तीव्र इच्छा से प्रेरित है। अब देखना यह है कि शासन बलरामपुर अस्पताल मरीजों को बेहतर इलाज मुहैय्या कराता है या फिर डा0 राजीव लोचन को एक बार फिर सेवा विस्तार देकर अस्पताल को नर्क बनाने का ठेका।

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